दिन 16: चंगाई देने वाला—पीड़ा का भार उठाने वाला

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कल हमने सीखा कि कैसे यीशु ने हमें पापों के दंड से ‘छुटकारा’ दिलाया। आज हम उनके कार्य के एक और महत्वपूर्ण पहलू को देखेंगे जो हमारे शरीर और प्राण की चंगाई से जुड़ा है।यीशु केवल हमारी आत्मा को स्वर्ग ले जाने के लिए नहीं आए, बल्कि वे हमारे इस पृथ्वी के जीवन के दुखों और बीमारियों को दूर करने के लिए भी आए।मत्ती के सुसमाचार में हमें यीशु की सेवकाई का एक शक्तिशाली दृश्य मिलता है, जहाँ वे लोगों को चंगा कर रहे हैं:

“जब संध्या हुई, तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिनमें दुष्टात्माएँ थीं; और उसने शब्दों से दुष्टात्माओं को निकाल दिया और सब बीमारों को चंगा किया: ताकि वह वचन पूरा हो जो यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, कि उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।” (मत्ती 8:16-17)


1. “शब्दों से चंगा किया” (The Power of His Word)

यीशु को चंगा करने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया या दवाओं की ज़रूरत नहीं थी।

  • अधिकार: उनके शब्द में वह सृष्टि वाली सामर्थ्य थी जो बीमारियों को आज्ञा दे सकती थी।
  • पूर्ण चंगाई: उन्होंने केवल कुछ लोगों को नहीं, बल्कि “सब बीमारों को” चंगा किया। उनकी करुणा में कोई भेदभाव नहीं है।

2. “हमारी दुर्बलताओं को ले लिया” (He Took Our Infirmities)

यहाँ मत्ती यशायाह 53:4 को उद्धृत कर रहे हैं। यह एक बहुत ही गहरा सत्य है।

  • अदला-बदली: यीशु ने चंगाई केवल अपनी जादुई शक्ति से नहीं दी, बल्कि उन्होंने हमारे रोगों का ‘भार’ अपने ऊपर ले लिया।
  • कोड़े खाने से चंगाई: बाइबल कहती है कि “उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए।” हमारी शारीरिक चंगाई की कीमत यीशु ने अपने शरीर पर कोड़े खाकर चुकाई है।

3. चंगाई का उद्देश्य: राज्य का प्रकटीकरण

यीशु द्वारा की गई चंगाई केवल शारीरिक आराम के लिए नहीं थी।

  • प्रमाण: यह इस बात का प्रमाण था कि वे ही मसीह (Messiah) हैं।
  • स्वर्ग की झलक: चंगाई यह दिखाती है कि परमेश्वर के राज्य में बीमारी, आँसू और पीड़ा के लिए कोई जगह नहीं है। यीशु वह राज्य इस पृथ्वी पर ला रहे थे।

4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?

  1. वह आज भी चंगा करता है: इब्रानियों 13:8 कहता है कि “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक सा है।” जो सामर्थ्य मत्ती 8 में थी, वह आज भी आपके लिए उपलब्ध है।
  2. प्रार्थना का आधार: जब आप बीमारी में प्रार्थना करते हैं, तो आप इस अधिकार के साथ मांग सकते हैं कि “प्रभु, तूने मेरी बीमारियों को उठा लिया है।” आपकी चंगाई के लिए पहले ही भुगतान किया जा चुका है।
  3. मानसिक और आत्मिक चंगाई: ‘दुर्बलताओं’ में केवल शारीरिक बीमारी ही नहीं, बल्कि डिप्रेशन, चिंता और मन की चोटें भी शामिल हैं। यीशु आपके टूटे हुए दिल को भी जोड़ने की सामर्थ्य रखते हैं।

निष्कर्ष

यीशु मसीह ‘चंगाई देने वाले’ हैं, इसका अर्थ है कि वे आपके दर्द के प्रति उदासीन नहीं हैं। वे आपके शरीर और मन की हर पीड़ा को समझते हैं क्योंकि उन्होंने उसे महसूस किया है। आज अपनी बीमारी या अपनी कमजोरी को उस महान वैद्य के पास ले आएं। उसकी छुअन में आज भी वही जीवन और सामर्थ्य है।


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज अपनी या अपने किसी प्रियजन की बीमारी के लिए विश्वास के साथ प्रार्थना करें। याद रखें कि यीशु ने आपकी बीमारियों को क्रूस पर “उठा लिया” है।

प्रार्थना:

“हे प्रभु यीशु, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने केवल मेरे पाप ही नहीं, बल्कि मेरी बीमारियाँ और दुर्बलताएँ भी अपने ऊपर ले लीं। प्रभु, मैं आज अपनी हर शारीरिक और मानसिक पीड़ा को तेरे पास लाता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि तेरे कोड़े खाने से मुझे चंगाई मिली है। मुझ पर अपना चंगा करने वाला हाथ बढ़ा और मुझे पूर्ण स्वस्थ कर ताकि मैं तेरी महिमा कर सकूँ। आमीन।”

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