दिन 3: जगत की ज्योति—अंधकार पर विजय
मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के तीसरे दिन में आपका स्वागत है। पहले दो दिनों में हमने यीशु को अनादि […]
मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के तीसरे दिन में आपका स्वागत है। पहले दो दिनों में हमने यीशु को अनादि […]
अब तक हमने पवित्र आत्मा के बारे में जो कुछ भी सीखा—चाहे वह उसका फल हो, वरदान हो, या उसकी
दिन 29 असल में उस ‘अनंत प्रक्रिया’ की शुरुआत है जिसे “मसीह के स्वरूप में बदलना” (Christlikeness) कहते हैं। यही
आज हम उस ‘जीवनशैली’ पर गौर करेंगे जो इन सब बातों को एक साथ जोड़ती है—आत्मा के अनुसार चलना। यह
हम उस सामर्थ्य की ओर बढ़ रहे हैं जो केवल शांति के समय ही नहीं, बल्कि तूफान और विरोध के
आज हम उस दिव्य प्रकाश के बारे में सीखेंगे जो हमारी बुद्धि को खोलता है। बाइबल केवल एक किताब नहीं
हम उस सामर्थ्य के व्यावहारिक स्वरूप को देखेंगे—आत्मिक वरदान। परमेश्वर ने आपको केवल बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी योजना
अब तक हमने पवित्र आत्मा के स्वभाव और हमारे चरित्र में उसके ‘फल’ को देखा। अब हम देखेंगे कि कैसे
भलाई और विश्वास’ हमें मैदान में उतरकर परमेश्वर के लिए कार्य करना सिखाते हैं।प्रेरित पौलुस थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के लिए
आज हम उस आत्मिक फल के अगले दो महत्वपूर्ण हिस्सों पर गौर करेंगे—आनंद और शांति। दुनिया अक्सर खुशी और सुकून