परमेश्वर के गुण

परमेश्वर के गुण

परमेश्वर के गुण – परिचय परमेश्वर कौन हैं? यह प्रश्न मसीही विश्वास के सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक है। जब हम परमेश्वर के गुणों का अध्ययन करते हैं, तो हम केवल परमेश्वर के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं करते, बल्कि यह समझने का प्रयास करते हैं कि बाइबल परमेश्वर के स्वभाव, चरित्र और सामर्थ्य […]

दिन 30: मसीह में संपूर्णता—अब कुछ भी बाकी नहीं Complete in Christ

मसीह में संपूर्णता (Complete in Christ Hindi)

आज, जब हम इस यात्रा का समापन कर रहे हैं, तो हम उस सत्य पर ठहरेंगे जो एक विश्वासी के लिए पूर्ण संतोष का आधार है। संसार हमेशा हमें महसूस कराता है कि हममें ‘कुछ कमी’ है, लेकिन परमेश्वर का वचन कुछ और ही कहता है। प्रेरित पौलुस कुलुस्सियों को मसीह की सर्वोच्चता बताते हुए […]

दिन 29: यीशु का दोबारा आना—महान आशा और अंतिम विजय

Second Coming of Jesus Hindi

हमने यीशु के जन्म, उनके स्वभाव, उनके क्रूस के कार्य और कलीसिया में हमारी पहचान को देखा है। लेकिन मसीही विश्वास केवल इतिहास (बीते हुए कल) के बारे में नहीं है, यह एक महान भविष्य के बारे में भी है। आज हम उस सत्य पर गौर करेंगे जो हर सताए हुए, थके हुए और प्रतीक्षारत […]

दिन 28: मसीह की देह का अंग—जुड़ाव और विशिष्टता

मसीह की देह (Body of Christ Hindi)

परमेश्वर ने हमें एक ऐसे जीवंत समूह का हिस्सा बनाया है जहाँ हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष पहचान और उपयोगिता है। मसीही जीवन एक ‘सोलो’ (अकेली) यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक साथ मिलकर चलने वाली यात्रा है। प्रेरित पौलुस कलीसिया की एकता और विविधता को समझाने के लिए मानव शरीर का सबसे सटीक […]

दिन 27: मसीह का राजदूत—परमेश्वर का संदेशवाहक

Ambassador for Christ

आज हम अपनी बुलाहट (Calling) के बारे में बात करेंगे। जब हम मसीह में नई सृष्टि बन जाते हैं और उसकी शांति को पा लेते हैं, तो परमेश्वर हमें केवल अपने पास छिपाकर नहीं रखता, बल्कि वह हमें एक बहुत बड़े मिशन पर भेजता है। अब हम इस संसार में केवल नागरिक नहीं, बल्कि स्वर्ग […]

दिन 26: मसीह की शांति—संसार से परे एक उपहार

मसीह की शांति (Peace of Christ Hindi)

कल हमने ‘मसीह के दुखों में सहभागिता’ जैसे कठिन लेकिन गहरे विषय पर बात की थी। आज हम उस ‘मरहम’ के बारे में सीखेंगे जो हर दुख, हर डर और हर तूफान के बीच एक मसीही विश्वासी को स्थिर रखता है—मसीह की शांति। संसार शांति को ‘मुसीबतों की अनुपस्थिति’ (Absence of trouble) मानता है, लेकिन […]

दिन 25: मसीह के दुख में सहभागी—पीड़ा में छिपा आनंद

मसीह के दुख में सहभागी (Sharing in Christ's Sufferings Hindi)

कल हमने ‘मसीह का मन रखने’ के अद्भुत विशेषाधिकार के बारे में सीखा। आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे अक्सर मसीही जीवन में कठिन माना जाता है, लेकिन यह मसीह के साथ हमारी घनिष्ठता का सबसे गहरा प्रमाण है—उसके दुखों में सहभागिता। जब हम मसीह के मन और स्वभाव को अपनाते हैं, […]

दिन 24: मसीह का मन रखना—स्वर्गीय दृष्टिकोण Mind of Christ Hindi

मसीह का मन रखना (Mind of Christ Hindi)

आज हम उस परिणाम पर गौर करेंगे जो इस जुड़ाव से पैदा होता है—हमारी सोच का नवीनीकरण। एक नई सृष्टि के रूप में, परमेश्वर हमें केवल एक नया हृदय ही नहीं देता, बल्कि वह हमें सोचने का एक नया तरीका भी देता है। संसार अपनी बुद्धि पर गर्व करता है, लेकिन एक विश्वासी के पास […]

दिन 23: दाखलता और डालियाँ—जुड़े रहने का रहस्य

Vine and the Branches

मसीही जीवन केवल एक बार का निर्णय नहीं है, बल्कि यह हर पल का एक जीवंत संबंध है। यीशु ने एक बहुत ही सुंदर उदाहरण के जरिए हमें यह सत्य समझाया है। यीशु ने अपने चेलों को विदा करने से पहले यह महत्वपूर्ण शिक्षा दी: “मैं दाखलता हूँ, तुम डालियाँ हो: जो मुझ में बना […]

दिन 22: मसीह में नई सृष्टि—पुराने का अंत, नए का आरंभ

मसीह में नई सृष्टि (New Creation in Christ Hindi)

आज का विषय एक क्रांतिकारी सत्य है: जब आप मसीह के पास आते हैं, तो वह आपके जीवन की मरम्मत (Repair) नहीं करता, बल्कि वह आपको नया (Recreate) बना देता है। प्रेरित पौलुस कुरिन्थियों की कलीसिया को हमारी नई पहचान का सबसे बड़ा प्रमाण देते हैं: “इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई […]