दिन 30: मसीह में संपूर्णता—अब कुछ भी बाकी नहीं Complete in Christ
आज, जब हम इस यात्रा का समापन कर रहे हैं, तो हम उस सत्य पर ठहरेंगे जो एक विश्वासी के […]
आज, जब हम इस यात्रा का समापन कर रहे हैं, तो हम उस सत्य पर ठहरेंगे जो एक विश्वासी के […]
हमने यीशु के जन्म, उनके स्वभाव, उनके क्रूस के कार्य और कलीसिया में हमारी पहचान को देखा है। लेकिन मसीही
परमेश्वर ने हमें एक ऐसे जीवंत समूह का हिस्सा बनाया है जहाँ हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष पहचान और
आज हम अपनी बुलाहट (Calling) के बारे में बात करेंगे। जब हम मसीह में नई सृष्टि बन जाते हैं और
कल हमने ‘मसीह के दुखों में सहभागिता’ जैसे कठिन लेकिन गहरे विषय पर बात की थी। आज हम उस ‘मरहम’
कल हमने ‘मसीह का मन रखने’ के अद्भुत विशेषाधिकार के बारे में सीखा। आज हम एक ऐसे विषय पर बात
आज हम उस परिणाम पर गौर करेंगे जो इस जुड़ाव से पैदा होता है—हमारी सोच का नवीनीकरण। एक नई सृष्टि
मसीही जीवन केवल एक बार का निर्णय नहीं है, बल्कि यह हर पल का एक जीवंत संबंध है। यीशु ने
आज का विषय एक क्रांतिकारी सत्य है: जब आप मसीह के पास आते हैं, तो वह आपके जीवन की मरम्मत
आज हम एक ऐसे सत्य की गहराई में उतरेंगे जो हमारे ‘सुरक्षा के आश्वासन’ (Assurance of Salvation) की नींव है।