दिन 30: समर्पण का जीवन—एक जीवित बलिदान
अब तक हमने पवित्र आत्मा के बारे में जो कुछ भी सीखा—चाहे वह उसका फल हो, वरदान हो, या उसकी […]
अब तक हमने पवित्र आत्मा के बारे में जो कुछ भी सीखा—चाहे वह उसका फल हो, वरदान हो, या उसकी […]
दिन 29 असल में उस ‘अनंत प्रक्रिया’ की शुरुआत है जिसे “मसीह के स्वरूप में बदलना” (Christlikeness) कहते हैं। यही
आज हम उस ‘जीवनशैली’ पर गौर करेंगे जो इन सब बातों को एक साथ जोड़ती है—आत्मा के अनुसार चलना। यह
आज हम एक बहुत ही गंभीर चेतावनी और जिम्मेदारी पर गौर करेंगे। पवित्र आत्मा एक ‘व्यक्ति’ है, और वह हमारे
हम उस सामर्थ्य की ओर बढ़ रहे हैं जो केवल शांति के समय ही नहीं, बल्कि तूफान और विरोध के
आज हम उस दिव्य प्रकाश के बारे में सीखेंगे जो हमारी बुद्धि को खोलता है। बाइबल केवल एक किताब नहीं
आज हम पवित्र आत्मा के उस कार्य पर गौर करेंगे जो हमारी सबसे निजी और गहरी कमजोरी में हमारी सहायता
हम उस सामर्थ्य के व्यावहारिक स्वरूप को देखेंगे—आत्मिक वरदान। परमेश्वर ने आपको केवल बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी योजना
अब तक हमने पवित्र आत्मा के स्वभाव और हमारे चरित्र में उसके ‘फल’ को देखा। अब हम देखेंगे कि कैसे
हम ‘आत्मा के फल’ के उन दो मुकुटों पर गौर करेंगे जो एक परिपक्व मसीही जीवन की पहचान हैं—नम्रता और