दिन 11: प्रार्थनापूर्ण जीवन—पिता के साथ अटूट संबंध

प्रार्थनापूर्ण जीवन Prayer life of Jesus

 कल हमने यीशु की ‘करुणा’ के बारे में सीखा कि कैसे वे हमारे दुखों से द्रवित होते हैं। आज हम उनके जीवन के उस गुप्त स्रोत पर गौर करेंगे जहाँ से उन्हें यह सारी करुणा और सामर्थ्य प्राप्त होती थी—उनका प्रार्थनापूर्ण जीवन। यीशु, जो स्वयं परमेश्वर के पुत्र थे, उन्होंने इस पृथ्वी पर रहते हुए […]

परमेश्वर का प्रभुत्व (Sovereignty): सिंहासन कभी खाली नहीं रहता

परमेश्वर का प्रभुत्व (Sovereignty): सिंहासन कभी खाली नहीं रहता

इस अस्थिर संसार में, जहाँ प्राकृतिक आपदाएँ, राजनीतिक उथल-पुथल और व्यक्तिगत संकट कभी भी दस्तक दे सकते हैं, हमारा मन अक्सर एक प्रश्न पूछता है: “क्या कोई नियंत्रण में है?” जब चीजें हमारी योजना के अनुसार नहीं चलतीं, तो ऐसा लग सकता है कि दुनिया अराजकता (Chaos) की ओर बढ़ रही है। लेकिन बाइबल हमें […]

अदृश्य महिमा: जिसे आँखों ने नहीं देखा, उसे हृदय ने पहचाना

अदृश्य महिमा:

परमेश्वर के गुणों के इस अध्ययन में हम एक ऐसे शिखर पर पहुँच गए हैं जहाँ मानवीय इंद्रियाँ अपनी सीमा समाप्त कर देती हैं। 1 तीमुथियुस 6:16 हमें उस परमेश्वर के बारे में बताता है जो प्रकाश के ऐसे पुंज में वास करता है जहाँ कोई पहुँच नहीं सकता। “वही अमरता का अकेला अधिकारी है, […]

परमेश्वर आत्मा है: रूप और आकार की सीमाओं से परे

परमेश्वर आत्मा है: रूप और आकार की सीमाओं से परे

परमेश्वर के गुणों के अध्ययन में आज हम एक ऐसे सत्य की ओर बढ़ते हैं जो हमारी भौतिक सोच को चुनौती देता है। हम मनुष्यों के लिए किसी भी अस्तित्व की कल्पना बिना किसी भौतिक रूप या आकार के करना कठिन होता है। लेकिन यीशु मसीह ने सामरी स्त्री के साथ बातचीत करते हुए वास्तविकता […]

स्वयं-पर्याप्तता Self-Sufficiency: परमेश्वर की पूर्णता और हमारा अस्तित्व

स्वयं-पर्याप्तता Self-Sufficiency

अक्सर मानवीय दृष्टिकोण से सोचते हुए हमें लगता है कि परमेश्वर ने हमें इसलिए बनाया क्योंकि वह “अकेला” महसूस कर रहा था या उसे किसी की संगति की कमी महसूस हो रही थी। लेकिन प्रेरितों के काम 17:25 इस मानवीय धारणा को पूरी तरह से उलट देता है और परमेश्वर की स्वयं-पर्याप्तता (Self-Sufficiency) का एक […]

स्वयं-अस्तित्व (Aseity): परमेश्वर किसी का कर्जदार नहीं

स्वयं -अस्तित्व' (Aseity)

मसीही धर्मशास्त्र (Theology) में ‘स्वयं -अस्तित्व’ (Aseity) एक ऐसा शब्द है जो परमेश्वर की परम स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। यह लैटिन शब्द ‘A se’ से आया है, जिसका अर्थ है “स्वयं से।” निर्गमन 3:14 में जब मूसा परमेश्वर से उसका नाम पूछता है, तो परमेश्वर जो उत्तर देता है, वह ब्रह्मांड का सबसे […]

‘संचारित’ गुण: हम में परमेश्वर की छाप | Communicable Attributes

Communicable Attributes

बाइबिल के पहले ही अध्याय में मनुष्य की रचना का एक ऐसा विवरण मिलता है जो हमें पूरी सृष्टि में सबसे अद्वितीय स्थान पर खड़ा कर देता है। उत्पत्ति 1:27 हमें हमारे अस्तित्व के सबसे गहरे सत्य से परिचित कराता है: “तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप […]

परमेश्वर के गुण ही परमेश्वर हैं: गुण और कार्य का अंतर |Attributes of God

Attributes of God

परमेश्वर के गुण Attributes of God Attributes of God परमेश्वर के गुण को जानना या परमेश्वर को जानने की यात्रा में अक्सर हम इस उलझन में पड़ जाते हैं कि परमेश्वर क्या करता है औरपरमेश्वर वास्तव में कौन है। भजन संहिता 145:17 हमें एक बहुत ही गहरा सत्य प्रदान करता है जो हमारे विश्वास की […]

जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता: परमेश्वर को जानना (Knowing God: The Ultimate Necessity of Life)

Knowing God

परमेश्वर को जानना Knowing God – परिचय इस क्षणभंगुर संसार में, जहाँ हर पल परिवर्तन और अनिश्चितता है, मनुष्य जन्म से ही एक अंतहीन खोज में लगा रहता है। हमारी ऊर्जा, हमारा समय और हमारे संसाधन किसी न किसी ऐसी चीज़ को बटोरने में व्यतीत होते हैं, जिसके बारे में हमें यह भ्रम होता है […]

परमेश्वर का राज्य क्या हैं? Parmeshwar ka Rajy Kya hain?

परमेश्वर का

परमेश्वर का राज्य: एक परिचय “राज्य” ये शब्द सुनते ही हमारे मन में एक साफ और स्पष्ट विचार जो आता हैं वह है एक राजा और उसका राज्य। अगर आपको नहीं पता तो अकबर और वीरबल की कहानियाँ तो हम सब जानते ही हैं। अकबर एक राजा था और हर जगह पर उसकी ही हकूमत […]