
परमेश्वर के गुणों के इस अध्ययन में हम एक ऐसे शिखर पर पहुँच गए हैं जहाँ मानवीय इंद्रियाँ अपनी सीमा समाप्त कर देती हैं। 1 तीमुथियुस 6:16 हमें उस परमेश्वर के बारे में बताता है जो प्रकाश के ऐसे पुंज में वास करता है जहाँ कोई पहुँच नहीं सकता।
“वही अमरता का अकेला अधिकारी है, और अगम्य ज्योति में रहता है, और जिसे किसी मनुष्य ने न देखा और न देख सकता है; उसकी प्रतिष्ठा और राज्य सदा काल तक बना रहे। आमीन।” (1 तीमुथियुस 6:16)
1. अगम्य ज्योति: प्रकाश जो आँखों को अंधा कर दे
पौलुस यहाँ परमेश्वर का वर्णन “अगम्य ज्योति” (Unapproachable Light) के रूप में करता है। यह एक विरोधाभास (Paradox) जैसा लगता है: प्रकाश देखने के लिए होता है, लेकिन यहाँ प्रकाश इतना तीव्र है कि वह देखने के मार्ग में बाधा बन जाता है।
- अदृश्यता का अर्थ: परमेश्वर अदृश्य है क्योंकि वह “आत्मा” है, लेकिन वह इसलिए भी अदृश्य है क्योंकि उसकी महिमा इतनी अधिक है कि हमारी सीमित आँखें उसे ग्रहण नहीं कर सकतीं। जैसे हम सूर्य को सीधे नहीं देख सकते क्योंकि उसकी रोशनी हमारी आंखों की क्षमता से अधिक है, वैसे ही परमेश्वर की पवित्रता और तेज हमारी मानवीय दृष्टि के लिए “अगम्य” है।
- अमरता का अधिकारी: वह अकेला है जिसका अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होता। वह मृत्यु और क्षय से पूरी तरह मुक्त है।
2. आँखों ने नहीं देखा, पर हृदय ने पहचाना
यदि किसी ने उसे कभी देखा नहीं और न ही देख सकता है, तो हम उसे जानते कैसे हैं? यहाँ धर्मशास्त्र का एक सुंदर सत्य आता है: परमेश्वर को ‘देखना’ उसकी ‘पहचान’ करने के बराबर है।
- सृष्टि के माध्यम से पहचान: यद्यपि हम कलाकार (परमेश्वर) को नहीं देख सकते, लेकिन हम उसकी कलाकृति (सृष्टि) को देख सकते हैं। रोमियों 1:20 कहता है कि उसके “अनदेखे गुण” उसकी बनाई हुई वस्तुओं के माध्यम से साफ दिखाई देते हैं।
- विश्वास की दृष्टि: इब्रानियों 11:27 में लिखा है कि मूसा “उस अनदेखे को मानो देखता हुआ स्थिर रहा।” यह शारीरिक आँखों की दृष्टि नहीं, बल्कि विश्वास की वह दृष्टि है जो हृदय की गहराई में कार्य करती है।
- आत्मा का साक्ष्य: पवित्र आत्मा हमारे हृदय में उस अदृश्य परमेश्वर की उपस्थिति को वास्तविक बनाता है। जिसे आँखें नहीं देख पातीं, उसे हमारा विवेक और हमारी आत्मा महसूस करती है।
3. अदृश्य का दृश्य होना: यीशु मसीह
मसीहियत का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि वह ‘अदृश्य परमेश्वर’ हमारे लिए ‘दृश्य’ हो गया। कुलुस्सियों 1:15 कहता है, “वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप है।”
- 1 तीमुथियुस 6:16 के “अगम्य ज्योति” वाले परमेश्वर ने ‘मनुष्य की देह’ का पर्दा ओढ़ लिया ताकि हम उसकी महिमा को बिना भस्म हुए देख सकें।
- यीशु ने कहा, “जिसने मुझे देखा है, उसने पिता को देखा है” (यूहन्ना 14:9)।
हमारे लिए इसका क्या अर्थ है?
परमेश्वर की अदृश्यता हमें सिखाती है कि हमारी आत्मिक यात्रा ‘देखने’ पर नहीं, बल्कि ‘भरोसा करने’ पर टिकी है।
- विस्मय (Awe): यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर हमारे नियंत्रण में नहीं है। वह इतना महान है कि उसे हम अपनी प्रयोगशालाओं या अपनी दृष्टि में कैद नहीं कर सकते।
- आराधना: हम उस परमेश्वर की आराधना करते हैं जो हमसे कहीं बड़ा है। उसकी “अदृश्य महिमा” हमें उसके सामने नतमस्तक करती है।
- आशा: हम उस दिन की प्रतीक्षा करते हैं जब हमारी आँखें शुद्ध की जाएंगी और हम उसे वैसा ही देखेंगे जैसा वह है (1 यूहन्ना 3:2)।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
क्या आप आज निराश हैं क्योंकि आप परमेश्वर को “देख” नहीं पा रहे हैं या उसकी आवाज़ “सुन” नहीं पा रहे हैं? याद रखें, हवा अदृश्य है पर वह आपको जीवन देती है। बिजली अदृश्य है पर उसमें सामर्थ्य है। परमेश्वर अदृश्य है, लेकिन वह इस समय आपके ठीक बगल में है।
प्रार्थना:
“हे अगम्य ज्योति में रहने वाले परमेश्वर, मैं तेरी महानता के सामने झुकता हूँ। तू जो मेरी आँखों से ओझल है, मेरे हृदय के सबसे करीब है। धन्यवाद कि तूने मसीह यीशु में अपनी अदृश्य महिमा को मुझ पर प्रकट किया। मुझे विश्वास की वह दृष्टि दे कि मैं संसार की चमक-धमक के बीच तेरी अनदेखी उपस्थिति को पहचान सकूँ। मुझे उस दिन के लिए तैयार कर जब मैं तुझे आमने-सामने देखूँगा। यीशु के नाम में, आमीन।”