
‘असंचारित’ गुण Incommunicable Attribute गुण परमेश्वर के आनोखे पण को दर्शाते हैं परमेश्वर को जानने की यात्रा में जब हम ‘संचारित’ गुणों (जैसे प्रेम और न्याय) से आगे बढ़ते हैं, तो हमारा सामना उसकी उस महिमा से होता है जिसे वह किसी के साथ साझा नहीं करता। ये वे गुण हैं जो उसे सृष्टि से पूरी तरह अलग और अद्वितीय बनाते हैं। भजन संहिता 147:5 हमें परमेश्वर की इस असीमित महानता के सम्मुख खड़ा करता है:
“हमारा प्रभु महान और अति सामर्थी है; उसकी बुद्धि अपरम्पार है।” (भजन 147:5)
यहाँ ‘अपरम्पार’ (Infinite) शब्द का उपयोग किया गया है, जिसका अर्थ है जिसकी कोई सीमा न हो। आइए परमेश्वर के उन ‘असंचारित’ (Incommunicable) गुणों पर मनन करें जो केवल उसी के हैं।
1. सर्वसामर्थी (Omnipotence)
भजन 147:5 कहता है कि वह “अति सामर्थी” है। परमेश्वर की शक्ति की कोई सीमा नहीं है।
- मनुष्य की सीमा: हम शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन हमारी शक्ति संसाधनों और शरीर पर निर्भर है।
- परमेश्वर की अद्वितीयता: उसने शून्य से ब्रह्मांड की रचना की। उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। उसकी सामर्थ्य थकावट से मुक्त है। वह जो चाहता है, उसे करने के लिए उसे किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं होती।
2. सर्वज्ञता (Omniscience)
“उसकी बुद्धि अपरम्पार है।” परमेश्वर सब कुछ जानता है—जो बीत चुका है, जो हो रहा है, और जो होने वाला है।
- अद्वितीय ज्ञान: वह न केवल हमारे कार्यों को देखता है, बल्कि हमारे मन के गुप्त विचारों और उद्देश्यों को भी जानता है। उसे कभी कुछ ‘सीखने’ की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि वह कभी किसी बात से अनजान नहीं रहा। उसकी बुद्धि में कोई त्रुटि नहीं है।
3. स्व-विद्यमानता और आत्मनिर्भरता (Aseity)
परमेश्वर को अस्तित्व में रहने के लिए किसी की आवश्यकता नहीं है।
- अद्वितीय अस्तित्व: हम अपने जीवन के लिए हवा, पानी और सबसे बढ़कर परमेश्वर पर निर्भर हैं। लेकिन परमेश्वर स्वयं में पूर्ण है। उसे हमारी आराधना या हमारी सेवा की ‘ज़रूरत’ नहीं है ताकि वह परमेश्वर बना रहे। वह अपनी मर्जी से हमसे प्रेम करता है, ज़रूरत के कारण नहीं। यह उसकी स्वतंत्रता और महानता का प्रमाण है।
4. अपरिवर्तनीयता (Immutability)
याकूब 1:17 कहता है कि उसमें न तो कोई परिवर्तन होता है और न अदल-बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
- अद्वितीय स्थिरता: हम बदलते रहते हैं—हमारी भावनाएं, हमारा ज्ञान और हमारा शरीर। लेकिन परमेश्वर का स्वभाव, उसके वादे और उसके उद्देश्य युगों-युगों तक स्थिर रहते हैं। वह कल, आज और युगानुयुग एक सा है।
इस महानता को जानने का लाभ क्या है?
जब हम परमेश्वर के इन ‘असंचारित’ गुणों पर विचार करते हैं, तो हमारे भीतर दो बातें पैदा होती हैं:
- विस्मय और आराधना (Awe): हम यह महसूस करते हैं कि परमेश्वर हमारा “बड़ा भाई” या सिर्फ एक “शक्तिशाली मार्गदर्शक” नहीं है। वह ब्रह्मांड का वह स्वामी है जिसके सामने स्वर्गदूत भी अपना मुँह ढांप लेते हैं। यह हमें सच्ची नम्रता में लाता है।
- पूर्ण विश्राम (Total Rest): यदि मेरा परमेश्वर सर्वज्ञ है, तो वह मेरी परिस्थितियों को मुझसे बेहतर जानता है। यदि वह सर्वसामर्थी है, तो वह मेरी सहायता करने में सक्षम है। और यदि वह अपरिवर्तनीय है, तो उसके प्रेम के वादे कभी नहीं बदलेंगे।
परमेश्वर की अद्वितीय महानता हमारे लिए डर का विषय नहीं, बल्कि अटूट भरोसे का आधार है।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
आज अपनी उन चिंताओं की सूची बनाएं जो आपको असंभव लगती हैं। फिर भजन 147:5 को पढ़ते हुए याद करें कि जिसे आप ‘असंभव’ कह रहे हैं, वह उस ‘अपरम्पार’ परमेश्वर के लिए कुछ भी नहीं है।
प्रार्थना:
“हे सर्वशक्तिमान और महान यहोवा, तेरी बुद्धि और सामर्थ्य मेरी समझ से बाहर है। मैं तेरी आराधना करता हूँ क्योंकि तू अद्वितीय है और तेरे समान कोई दूसरा परमेश्वर नहीं। धन्यवाद कि तू जो अपनी महानता में इतना ऊँचा है, वही मेरे मन की पुकार को सुनने के लिए नीचा भी झुकता है। मुझे सिखा कि मैं अपनी छोटी बुद्धि पर नहीं, बल्कि तेरी अपरम्पार सामर्थ्य पर भरोसा करूँ। यीशु के नाम में, आमीन।”