
आज हम उस परिणाम पर गौर करेंगे जो इस जुड़ाव से पैदा होता है—हमारी सोच का नवीनीकरण। एक नई सृष्टि के रूप में, परमेश्वर हमें केवल एक नया हृदय ही नहीं देता, बल्कि वह हमें सोचने का एक नया तरीका भी देता है। संसार अपनी बुद्धि पर गर्व करता है, लेकिन एक विश्वासी के पास उससे कहीं श्रेष्ठ कुछ है।
प्रेरित पौलुस कुरिन्थियों को संसार की बुद्धि और परमेश्वर की बुद्धि के बीच का अंतर समझाते हुए यह अद्भुत घोषणा करते हैं:
“क्योंकि प्रभु का मन किसने जाना है कि उसे सिखाए? परन्तु हम में मसीह का मन है।” (1 कुरिन्थियों 2:16)
1. “हम में मसीह का मन है” (The Mind of Christ)
इसका अर्थ यह नहीं है कि हम सर्वज्ञानी (सब कुछ जानने वाले) बन गए हैं, बल्कि इसका अर्थ है कि पवित्र आत्मा के द्वारा हमें मसीह के विचारों और उसकी प्राथमिकताओं तक पहुँच प्राप्त है।
- नया चश्मा: मसीह का मन रखने का अर्थ है परिस्थितियों, लोगों और खुद को मसीह के नजरिए से देखना।
- आत्मिक समझ: जहाँ संसार केवल दृश्य (Visible) चीज़ों को देखता है, मसीह का मन हमें अदृश्य और अनंत सत्यों को समझने की क्षमता देता है।
2. मसीह का मन कैसे सोचता है?
यीशु के मन की सबसे बड़ी विशेषता आज्ञाकारिता और प्रेम थी।
- निस्वार्थता: मसीह का मन “मेरा क्या फायदा?” नहीं सोचता, बल्कि “परमेश्वर की महिमा किसमें है?” और “मैं दूसरों की सेवा कैसे कर सकता हूँ?” सोचता है (फिलिप्पियों 2:5-8)।
- सत्य पर आधारित: मसीह का मन भावनाओं या परिस्थितियों के आधार पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन के आधार पर निर्णय लेता है।
3. यह ‘मन’ हमें कैसे मिलता है?
यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हम मेहनत से हासिल करते हैं, बल्कि यह एक उपहार है जो पवित्र आत्मा के निवास करने से मिलता है।
- वचन का प्रभाव: जब हम बाइबल पढ़ते हैं, तो हम दरअसल मसीह के विचारों को अपने भीतर भर रहे होते हैं।
- समर्पण: जब हम अपनी पुरानी सोच (चिंता, क्रोध, बदला) को छोड़ते हैं, तो मसीह का मन हमारे भीतर सक्रिय होता है।
4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?
- चिंता से मुक्ति: मसीह का मन जानता है कि पिता नियंत्रण में है। इसलिए, जब हम मसीह का मन रखते हैं, तो घबराहट की जगह शांति ले लेती है।
- सही निर्णय: जीवन के कठिन मोड़ों पर, मसीह का मन हमें वह बुद्धि देता है जो संसार की समझ से परे है। आप पूछ सकते हैं, “यीशु यहाँ क्या करता?” और पवित्र आत्मा आपको उत्तर देगा।
- विजयी सोच: आप अब अपनी कमियों या हार के विचारों के गुलाम नहीं हैं। मसीह का मन आपको याद दिलाता है कि आप जयवंत से भी बढ़कर हैं।
निष्कर्ष
यीशु मसीह का ‘मन’ रखना एक बहुत बड़ा विशेषाधिकार है। इसका अर्थ है कि आपके पास ब्रह्मांड के रचयिता की ‘सोच’ तक पहुँच है। आज अपने उन पुराने और नकारात्मक विचारों को मसीह के चरणों में डाल दें और उससे कहें कि वह आपके मस्तिष्क के हर कोने को अपनी ज्योति से भर दे।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
आज फिलिप्पियों 2:5-11 पढ़ें। मनन करें कि यीशु ने कैसे सोचा और कैसे अपने अधिकारों को त्याग दिया।
प्रार्थना:
“हे प्रभु यीशु, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मुझे केवल नई देह ही नहीं, बल्कि अपना मन भी दिया है। प्रभु, मुझे क्षमा कर जब मैं संसार की तरह चिंता और स्वार्थ में सोचता हूँ। पवित्र आत्मा, मेरे विचारों को शुद्ध कर और मुझे मसीह जैसा दृष्टिकोण दे। आज के हर निर्णय और हर विचार में, मसीह का मन मुझमें कार्य करे। आमीन।”