
मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के पहले सप्ताह के अंतिम दिन में आपका स्वागत है। अब तक हमने यीशु को वचन, ज्योति, चरवाहा और मेमने के रूप में देखा। आज हम उस शिखर पर पहुँच गए हैं जहाँ यीशु ने अपनी पहचान के बारे में सबसे शक्तिशाली और चौंकाने वाला दावा किया।
यह दावा इतना बड़ा था कि इसे सुनकर उस समय के धार्मिक लोग उसे पत्थर मारने के लिए तैयार हो गए थे, क्योंकि उन्होंने समझ लिया था कि यीशु खुद को साक्षात परमेश्वर कह रहा है।
जब यहूदियों ने यीशु के अधिकार पर सवाल उठाया और इब्राहीम का ज़िक्र किया, तो यीशु ने उन्हें यह उत्तर दिया:
“यीशु ने उनसे कहा, ‘मैं तुम से सच-सच कहता हूँ कि इससे पहले कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ, मैं हूँ’।” (यूहन्ना 8:58)
1. “इससे पहले कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ” (Pre-existence)
इब्राहीम यहूदियों के लिए सबसे महान पूर्वज थे जो यीशु से लगभग 2000 साल पहले हुए थे।
- यीशु ने यह नहीं कहा कि “मैं इब्राहीम से पहले था” (अतीत काल), बल्कि उसने कहा “मैं हूँ” (वर्तमान काल)।
- यह दर्शाता है कि यीशु समय की सीमाओं में नहीं बंधा है। वह इब्राहीम का वंशज होने के साथ-साथ इब्राहीम का सृष्टिकर्ता भी है।
2. “मैं हूँ” (Ego Emi / I AM)
यह कोई साधारण वाक्यांश नहीं है। यह वही नाम है जो परमेश्वर ने जलती हुई झाड़ी में मूसा को बताया था: “जो मैं हूँ सो मैं हूँ” (निर्गमन 3:14)।
- स्वयंभू (Self-Existent): “मैं हूँ” का अर्थ है कि उसे किसी ने नहीं बनाया, वह हमेशा से है और हमेशा रहेगा।
- संपूर्णता: वह हर उस चीज़ की पूर्ति है जिसकी हमें ज़रूरत है। यदि आपको शांति चाहिए, तो वह “मैं हूँ” है। यदि आपको चंगाई चाहिए, तो वह “मैं हूँ” है।
3. पत्थरवाह का कारण: स्पष्ट दावा
उस समय के लोग समझ गए थे कि “मैं हूँ” कहकर यीशु ने सीधे तौर पर यहोवा (YHWH) के नाम को खुद पर लागू किया है। उनके लिए यह ईश्वर की निंदा थी, लेकिन हमारे लिए यह उद्धार का आधार है। यीशु केवल एक पैगंबर नहीं, बल्कि वह स्वयं परमेश्वर है जो मनुष्य बनकर हमारे बीच आया।
4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?
- अटल सुरक्षा: चूँकि यीशु “मैं हूँ” है, इसलिए वह कभी बदलता नहीं। वह आज भी वही है जो कल था और भविष्य में भी वही रहेगा। आप एक अपरिवर्तनीय परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं।
- वर्तमान की उपस्थिति: वह यह नहीं कहता कि “मैं कल तुम्हारी मदद करूँगा,” वह कहता है “मैं हूँ।” वह आपकी आज की समस्या, आज के दर्द और आज की ज़रूरत के समय आपके साथ मौजूद है।
- पर्याप्तता: आपके जीवन की हर कमी (I am not…) के सामने यीशु का “मैं हूँ” (I AM) खड़ा है। जब आप कमजोर होते हैं, तो वह आपकी सामर्थ्य है।
निष्कर्ष
आज जब आप अपनी चुनौतियों को देखें, तो याद रखें कि आपके साथ कौन खड़ा है। वह जो इब्राहीम से पहले था, जो मूसा के साथ था, वही आज आपके साथ है। वह “मैं हूँ” है—आपके जीवन की हर ज़रूरत का एकमात्र और संपूर्ण उत्तर।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
आज निर्गमन अध्याय 3 और यूहन्ना अध्याय 8 को साथ में पढ़ें। इस बात पर गर्व करें कि आपका उद्धारकर्ता स्वयं ‘अनादि परमेश्वर’ है।
प्रार्थना:
“हे प्रभु यीशु, तू वह महान ‘मैं हूँ’ है। मैं तेरी आराधना करता हूँ क्योंकि तू समय और काल से ऊपर है। प्रभु, धन्यवाद कि तू मेरे जीवन की हर कमी को भरने के लिए पर्याप्त है। जब मैं अकेला या कमजोर महसूस करूँ, तो मुझे याद दिला कि ‘तू है’। मुझे अपने अटूट और अपरिवर्तनीय स्वभाव में स्थिर कर। आमीन।”