
मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के पांचवें दिन में आपका स्वागत है। कल हमने यीशु को एक ‘अच्छे चरवाहे’ के रूप में देखा, जो हमारी व्यक्तिगत देखभाल करता है। आज हम अपनी दृष्टि को थोड़ा और ऊपर उठाएंगे और यीशु के उस स्वरूप को देखेंगे जो समय और सृष्टि की सीमाओं से परे है—अल्फा और ओमेगा।
संसार में सब कुछ बदलता है—लोग, परिस्थितियाँ और यहाँ तक कि हमारा अपना स्वभाव भी। लेकिन यीशु मसीह वह स्थिर बिंदु है जहाँ से सब शुरू होता है और जहाँ सब समाप्त होता है।
प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में, महिमावान यीशु अपनी पहचान इन शब्दों में बताता है:
“मैं ही अल्फा और ओमेगा, आदि और अन्त, पहला और पिछला हूँ।” (प्रकाशितवाक्य 22:13)
1. “अल्फा और ओमेगा” (The Alphabet of Existence)
अल्फा (Α) यूनानी वर्णमाला का पहला अक्षर है और ओमेगा (Ω) अंतिम।
- पूर्णता: इसका अर्थ है कि ज्ञान, सामर्थ्य और अधिकार की पूरी वर्णमाला यीशु में समाहित है। उसके बाहर कुछ भी नहीं है।
- लेखक: जैसे हर कहानी इन्हीं अक्षरों से बनती है, वैसे ही आपके जीवन की कहानी का हर शब्द यीशु ने लिखा है। वह न केवल कहानी शुरू करता है, बल्कि वह उसे पूरी भी करता है।
2. “आदि और अन्त” (The Beginning and the End)
यीशु केवल ‘आदि’ में मौजूद नहीं था, वह स्वयं ‘आदि’ (Source) है।
- सृष्टि का स्रोत: सब कुछ उसके द्वारा उत्पन्न हुआ। आपके जीवन का अस्तित्व कोई दुर्घटना नहीं है; यह उस ‘आदि’ से शुरू हुआ है।
- अंतिम न्याय और गंतव्य: अंत में सब कुछ उसी के सामने घुटने टेकेगा। वह इतिहास का अंतिम बिंदु है।
3. “पहला और पिछला” (Priority and Permanence)
- सर्वोपरि: यीशु को आपके जीवन में ‘पहला’ स्थान मिलना चाहिए। जब वह पहला होता है, तो बाकी सब कुछ अपने सही स्थान पर आ जाता है।
- अटल साथी: जब सब कुछ खत्म हो जाता है, जब दोस्त साथ छोड़ देते हैं या स्वास्थ्य गिर जाता है, तब भी वह ‘पिछला’ (The Last One) आपके साथ खड़ा रहता है। वह कभी खत्म नहीं होता।
4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?
- भरोसा (Trust): यदि यीशु ने आपके उद्धार का कार्य ‘शुरू’ (Alpha) किया है, तो वह उसे ‘पूरा’ (Omega) करने के लिए भी वफादार है। वह बीच राह में नहीं छोड़ता।
- दृष्टिकोण: हमारी समस्याएँ अक्सर ‘अस्थायी’ होती हैं। जब हम यीशु को ‘ओमेगा’ के रूप में देखते हैं, तो हमें पता चलता है कि अंत में जीत उसी की है।
- विश्राम: आपको अपनी ज़िंदगी का पूरा बोझ खुद उठाने की ज़रूरत नहीं है। ब्रह्मांड का स्वामी, जो आदि से अंत तक सब कुछ जानता है, आपके नियंत्रण में है।
निष्कर्ष
यीशु मसीह ‘अल्फा’ है, इसलिए वह आपकी उत्पत्ति जानता है। वह ‘ओमेगा’ है, इसलिए वह आपका भविष्य जानता है। वह आपके जीवन की हर खाली जगह (A to Z) को अपनी उपस्थिति से भरना चाहता है। आज इस बात में सुकून पाएं कि आपकी ज़िंदगी उस परमेश्वर के हाथों में है जो समय की सीमाओं से ऊपर है।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
क्या आप अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं? याद रखें कि यीशु पहले से ही वहां (ओमेगा पर) मौजूद है और वह सब कुछ संभाल रहा है।
प्रार्थना:
“हे प्रभु यीशु, तू ही अल्फा और ओमेगा है। मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मेरे जीवन की कहानी शुरू की है और तू ही इसे महिमा के साथ पूरा करेगा। प्रभु, मुझे सिखा कि मैं हर दिन तुझे अपने जीवन में पहला स्थान दूँ। जब मैं अंत या असफलताओं से डरूँ, तो मुझे याद दिला कि अंत में जीत तेरी ही है। तू ही मेरा आदि और मेरा अंत है। आमीन।”