दिन 1: आदि में वचन—यीशु की दिव्यता

आदि में वचन

हम अपनी शुरुआत समय की शुरुआत से भी पहले से करेंगे। यीशु केवल 2000 साल पहले पैदा हुआ एक महापुरुष नहीं था, बल्कि वह अनादि काल से अस्तित्व में है। यूहन्ना का सुसमाचार हमें यीशु के जन्म की कहानी से नहीं, बल्कि उसकी अनंत प्रकृति से परिचित कराता है:

“आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।” (यूहन्ना 1:1)


1. “आदि में वचन था” (In the beginning was the Word)

यहाँ ‘वचन’ के लिए यूनानी शब्द ‘Logos’ (लोगोस) का प्रयोग किया गया है।

  • अनादि अस्तित्व: जब कुछ भी नहीं था, तब भी यीशु (वचन) था। वह बनाया हुआ नहीं है, बल्कि वह स्वयं सृष्टिकर्ता है।
  • परमेश्वर की अभिव्यक्ति: जैसे हमारे शब्द हमारे विचारों को प्रकट करते हैं, वैसे ही यीशु मसीह अदृश्य परमेश्वर की दृश्य अभिव्यक्ति है। यदि आप जानना चाहते हैं कि परमेश्वर कैसा है, तो यीशु को देखें।

2. “वचन परमेश्वर के साथ था” (Relationship)

यह आयत हमें पवित्र त्रिएक (Trinity) के रहस्य की एक झलक देती है।

  • यीशु पिता परमेश्वर से अलग कोई शक्ति नहीं है, बल्कि वह अनादि काल से पिता के साथ एक गहरे प्रेम और संगति के रिश्ते में है।
  • वह परमेश्वर के ‘पास’ था, जो उनके बीच की घनिष्ठता को दर्शाता है।

3. “वचन परमेश्वर था” (Identity)

यूहन्ना यहाँ कोई संदेह नहीं छोड़ता। वह स्पष्ट रूप से कहता है कि यीशु केवल परमेश्वर जैसा (God-like) नहीं था, बल्कि वह स्वयं परमेश्वर था।

  • इसका अर्थ है कि यीशु के पास वे सभी गुण, सामर्थ्य और अधिकार हैं जो पिता परमेश्वर के पास हैं।
  • जब हम यीशु की आराधना करते हैं, तो हम साक्षात परमेश्वर की आराधना करते हैं।

4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?

  1. अटल आधार: आपका विश्वास किसी इंसान पर नहीं, बल्कि उस पर है जिसने ब्रह्मांड को रचा है। वह कल, आज और युगानुयुग एक सा है।
  2. परमेश्वर का संदेश: परमेश्वर ने आपसे बात करने के लिए केवल कागज़ पर शब्द नहीं भेजे, बल्कि उसने अपने ‘वचन’ (यीशु) को देहधारी बनाकर भेजा ताकि आप उसे व्यक्तिगत रूप से जान सकें।
  3. अधिकार: चूँकि यीशु परमेश्वर है, इसलिए उसके शब्दों में आपके जीवन की हर परिस्थिति को बदलने का अधिकार है।

निष्कर्ष

यीशु मसीह इतिहास की एक घटना मात्र नहीं है; वह इतिहास का लेखक है। आज इस महान सत्य में विश्राम करें कि जिस उद्धारकर्ता पर आप भरोसा करते हैं, वह स्वयं आदि और अंत है। वह आपकी हर कमजोरी से बड़ा है क्योंकि वह स्वयं परमेश्वर है।


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज यूहन्ना के सुसमाचार का पहला अध्याय पढ़ें। इस बात पर मनन करें कि वह महान परमेश्वर जिसने तारे बनाए, वह आपसे रिश्ता रखने के लिए ‘वचन’ बनकर आया।

प्रार्थना: “हे प्रभु यीशु, मैं तेरी आराधना करता हूँ क्योंकि तू आदि और अंत है। तू वह जीवित वचन है जिसने सब कुछ रचा है। प्रभु, मेरे मन की आँखों को खोल ताकि मैं तेरी दिव्यता और तेरी महिमा को गहराई से समझ सकूँ। धन्यवाद कि तूने मुझे अपना परिचय दिया। आज के दिन में, तेरे वचन को मेरे जीवन में कार्य करने दे। आमीन।”

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