आत्मिक वरदान Spiritual Gifts 1 Cor 12:7

दिन 23: आत्मिक वरदान—कलीसिया की उन्नति के लिए उपहार

 हम उस सामर्थ्य के व्यावहारिक स्वरूप को देखेंगे—आत्मिक वरदानपरमेश्वर ने आपको केवल बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी योजना में एक विशिष्ट भूमिका निभाने के लिए बुलाया है।प्रेरित पौलुस कुरिन्थियों की कलीसिया को समझाता है कि पवित्र आत्मा की उपस्थिति का प्रमाण केवल व्यक्तिगत शांति नहीं, बल्कि सेवा की योग्यता भी है:

“किन्तु सब के लाभ के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश (वरदान) दिया जाता है।” (1 कुरिन्थियों 12:7)


1. वरदान बनाम प्रतिभा (Gifts vs. Talents)

अक्सर लोग प्राकृतिक प्रतिभा (जैसे अच्छा गाना या बोलना) और आत्मिक वरदान के बीच भ्रमित हो जाते हैं।

  • प्राकृतिक प्रतिभा: यह जन्म से मिलती है और इसका उपयोग संसार की भलाई या मनोरंजन के लिए किया जा सकता है।
  • आत्मिक वरदान: यह ‘नये जन्म’ के समय पवित्र आत्मा द्वारा दिया जाता है। यह एक अलौकिक योग्यता है जिसका उद्देश्य केवल और केवल परमेश्वर की महिमा और कलीसिया की उन्नति करना है।

2. “सब के लाभ के लिये” (For the Common Good)

पवित्र आत्मा हमें वरदान इसलिए नहीं देता कि हम दूसरों से श्रेष्ठ दिखें या अपनी प्रसिद्धि बढ़ाएं।

  • पवित्र उद्देश्य: वरदानों का मुख्य उद्देश्य कलीसिया (मसीह की देह) को मजबूत करना है। यदि आपके वरदान से दूसरों को आत्मिक लाभ नहीं हो रहा, तो आप आत्मा के उद्देश्य से भटक रहे हैं।
  • निःस्वार्थ सेवा: वरदान एक ‘उपहार’ है, ‘पुरस्कार’ नहीं। इसे कमाया नहीं जा सकता, इसे केवल विनम्रता से दूसरों की सेवा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. विविधता में एकता (Diversity in Unity)

1 कुरिन्थियों 12 के अगले पदों में पौलुस विभिन्न वरदानों की सूची देता है: बुद्धि की बातें, ज्ञान की बातें, विश्वास, चंगा करने का वरदान, भविष्यद्वाणी, और अन्य भाषाएँ।

  • हर कोई महत्वपूर्ण है: पवित्र आत्मा ने कलीसिया में हर व्यक्ति को कम से कम एक वरदान ज़रूर दिया है। कोई भी विश्वासी “खाली हाथ” नहीं है।
  • एक ही स्रोत: जैसे शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग काम करते हैं, वैसे ही हम सब अलग-अलग वरदान रखते हैं, लेकिन उन्हें देने वाला एक ही आत्मा है।

4. अपने वरदान को कैसे पहचानें?

यदि आप नहीं जानते कि आपका आत्मिक वरदान क्या है, तो इन तीन बातों पर गौर करें:

  1. इच्छा: आपको किस प्रकार की सेवा करने में सबसे अधिक आनंद और बोझ (Burden) महसूस होता है?
  2. प्रभाव: जब आप वह कार्य करते हैं, तो क्या दूसरों को आत्मिक लाभ मिलता है?
  3. पुष्टि (Confirmation): क्या कलीसिया के अन्य परिपक्व विश्वासी आपमें उस योग्यता को देख पा रहे हैं?

निष्कर्ष

आत्मिक वरदान पवित्र आत्मा का वह ‘साधन’ (Tool) है जो उसने आपके हाथ में दिया है ताकि आप उसके राज्य का निर्माण कर सकें। वरदानों का उपयोग न करना उस उपहार का अनादर करना है। आज यह न पूछें कि “कलीसिया मेरे लिए क्या कर सकती है?” बल्कि यह पूछें, “पवित्र आत्मा ने मुझे कलीसिया के लाभ के लिए क्या दिया है?”


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज शांत होकर विचार करें कि आप अपनी कलीसिया या मसीही समुदाय में किस प्रकार योगदान दे रहे हैं। क्या आप अपने वरदानों का उपयोग कर रहे हैं या वे धूल खा रहे हैं?

प्रार्थना:

“हे पवित्र आत्मा, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मुझे मसीह की देह का एक उपयोगी अंग बनाया है। प्रभु, मुझ पर मेरे आत्मिक वरदानों को प्रकट कर। मुझे सिखा कि मैं कैसे अपनी योग्यताओं को दूसरों की भलाई और कलीसिया की उन्नति के लिए इस्तेमाल करूँ। मुझे घमंड से बचा और एक विनम्र सेवक बना। मेरी सेवा के द्वारा केवल यीशु का नाम ऊँचा किया जाए। यीशु के नाम में, आमीन।”

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