दिन 17: प्रेम (अगापे)—परमेश्वर का उंडेला हुआ प्रेम

आज हम उस फल के सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अंश पर गौर करेंगे—प्रेम। बाइबल के अनुसार, प्रेम केवल एक भावना नहीं है, बल्कि यह मसीही जीवन का आधार है। बिना प्रेम के, हमारे अन्य सभी गुण और कार्य व्यर्थ हैं। प्रेरित पौलुस रोमियों को लिखे अपने पत्र में एक बहुत ही सुंदर और गहरी सच्चाई प्रकट करता है:

“और आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा के द्वारा जो हमें दिया गया है, परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में उंडेला गया है।” (रोमियों 5:5)


1. “अगापे” (Agape) क्या है?

यूनानी भाषा में प्रेम के लिए कई शब्द हैं, लेकिन यहाँ ‘अगापे’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

  • यह वह प्रेम है जो ‘बिना शर्त’ (Unconditional) होता है।
  • यह भावनाओं पर नहीं, बल्कि निर्णय पर आधारित होता है।
  • यह वह प्रेम है जो तब भी प्रेम करता है जब सामने वाला व्यक्ति प्रेम के योग्य न हो। यह वही प्रेम है जो यीशु ने क्रूस पर हमारे लिए दिखाया।

2. “उंडेला गया है” (Poured Out)

पौलुस यहाँ ‘बूंद-बूंद’ गिरने की बात नहीं कर रहा, बल्कि ‘उंडेलने’ (Gushed/Flooded) की बात कर रहा है।

  • भरपूरी: जब आप पवित्र आत्मा को प्राप्त करते हैं, तो परमेश्वर अपना प्रेम आपके हृदय के हर कोने में भर देता है।
  • स्रोत: यह प्रेम हमारे भीतर से पैदा नहीं होता (क्योंकि मानवीय प्रेम की एक सीमा होती है), बल्कि यह स्वर्ग से आता है। पवित्र आत्मा वह ‘पाइपलाइन’ है जिसके माध्यम से परमेश्वर का अनंत प्रेम हमारे सूखे हृदयों में बहता है।

3. कठिन परिस्थितियों में भी आशा

रोमियों 5:5 की शुरुआत ‘आशा’ और ‘क्लेश’ के संदर्भ में होती है।

  • जब हम दुखों या परीक्षाओं से गुजरते हैं, तो शैतान हमारे मन में संदेह डालता है: “क्या परमेश्वर तुमसे सच में प्रेम करता है?”
  • ऐसे समय में, पवित्र आत्मा हमारे भीतर गवाही देता है और उस उंडेले गए प्रेम की याद दिलाता है। वह हमें अहसास कराता है कि हमारी परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, परमेश्वर का प्रेम अटल है।

4. प्रेम का फल: दूसरों की ओर बहना

पवित्र आत्मा हमारे भीतर प्रेम इसलिए नहीं उंडेलता कि हम उसे केवल अपने पास रखें।

  • क्षमा का सामर्थ्य: ‘अगापे’ प्रेम ही वह शक्ति है जो हमें अपने शत्रुओं को क्षमा करने और उन्हें प्रेम करने के योग्य बनाती है।
  • निस्वार्थ सेवा: जब हम परमेश्वर के प्रेम से भरे होते हैं, तो हम दूसरों की सेवा बिना किसी स्वार्थ के कर पाते हैं।
  • पहचान: यीशु ने कहा था, “यदि तुम आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो।”

निष्कर्ष

मसीही जीवन में प्रेम करना कोई ‘कोशिश’ नहीं है, बल्कि यह उंडेले गए प्रेम का बहना है। यदि आप आज किसी को प्रेम करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो अपनी ताकत का उपयोग करना बंद करें। पवित्र आत्मा से कहें, “प्रभु, मेरे हृदय में अपने प्रेम को फिर से उंडेल दे, ताकि मैं तेरी आँखों से दूसरों को देख सकूँ।”

परमेश्वर का प्रेम कभी खत्म नहीं होता, और पवित्र आत्मा उस प्रेम का अक्षय भंडार हमारे भीतर खोल देता है।


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें जिसे प्रेम करना आपके लिए कठिन है। फिर याद करें कि परमेश्वर ने आपको कितना प्रेम किया है। पवित्र आत्मा से कहें कि वह उस व्यक्ति के लिए आपके हृदय में ‘अगापे’ प्रेम भर दे।

प्रार्थना:

“हे कृपालु पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तूने मुझे अपने प्रेम से भर दिया है। पवित्र आत्मा, मेरे हृदय के उन कठोर हिस्सों को पिघला दे जहाँ अभी भी कड़वाहट है। मेरे भीतर अपने प्रेम को और भी अधिक उंडेल, ताकि मैं न केवल तुझसे, बल्कि अपने पड़ोसियों और शत्रुओं से भी वैसा ही प्रेम कर सकूँ जैसा तूने मुझसे किया है। मेरी ज़िंदगी तेरे प्रेम की गवाही बने। यीशु के नाम में, आमीन।”

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