आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness): मसीह की पवित्रता हमारा पहनावा

आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness): मसीह की पवित्रता हमारा पहनावा

आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness): मसीह की पवित्रता हमारा पहनावा

परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता के बारे में जानने के बाद, एक बहुत ही स्वाभाविक और डरावना प्रश्न उठता है: “यदि परमेश्वर इतना पवित्र है कि वह पाप को देख नहीं सकता, और मैं इतना अशुद्ध हूँ कि अपनी धार्मिकता से उसे कभी खुश नहीं कर सकता, तो मैं उसके सामने खड़ा कैसे हो सकता हूँ?”

इसका उत्तर सुसमाचार के सबसे महान और क्रांतिकारी सिद्धांत में मिलता है, जिसे आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness) कहा जाता है। 2 कुरिन्थियों 5:21 इस दैवीय विनिमय (Divine Exchange) को एक ही आयत में स्पष्ट कर देता है:

“जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।” (2 कुरिन्थियों 5:21)


1. ‘आरोपित’ (Imputation) शब्द का अर्थ

‘आरोपित’ शब्द लेखांकन (Accounting) या बैंकिंग की शब्दावली से आया है। इसका सरल अर्थ है—किसी एक के खाते की राशि को दूसरे के खाते में जमा कर देना।

जब हम मसीह पर विश्वास करते हैं, तो स्वर्ग के न्यायालय में दो बड़े लेन-देन होते हैं:

  • हमारा पाप मसीह के खाते में: हमारे जीवन के सारे पाप, अशुद्धता और विफलताएं यीशु के नाम पर लिख दी गईं (जिसका दंड उसने क्रूस पर भुगता)।
  • मसीह की धार्मिकता हमारे खाते में: यीशु का सिद्ध जीवन, उसकी आज्ञाकारिता और उसकी पवित्रता हमारे नाम पर लिख दी गई।

अब, जब परमेश्वर हमें देखता है, तो वह हमारे पापों को नहीं, बल्कि अपने पुत्र की धार्मिकता को देखता है।

2. वह “पाप से अज्ञात” था

यीशु मसीह एकमात्र ऐसा मनुष्य था जिसने कभी कोई पाप नहीं किया। वह पूरी तरह पवित्र था। फिर भी, 2 कुरिन्थियों 5:21 कहता है कि परमेश्वर ने उसे “हमारे लिए पाप ठहराया।”

इसका मतलब यह नहीं है कि यीशु ‘पापी’ बन गया, बल्कि यह कि उसने एक पापी की तरह दण्ड भोगा। उसने वह ‘कर्ज’ चुकाया जो उसने कभी लिया ही नहीं था, ताकि हम वह ‘पुरस्कार’ पा सकें जिसे हमने कभी कमाया ही नहीं।

3. “मसीह की धार्मिकता” हमारा नया पहनावा

बाइबल अक्सर धार्मिकता की तुलना ‘वस्त्रों’ से करती है। यशायाह 61:10 में लिखा है, “उसने मुझे उद्धार के वस्त्र पहिनाए, और धर्म की चादर ओढ़ा दी है।”

कल्पना कीजिए कि आपके कपड़े गंदगी और कीचड़ से सने हुए हैं (जो हमारे पापों का प्रतीक है)। आप इन कपड़ों में राजा के दरबार में नहीं जा सकते। यीशु क्या करता है? वह आपके गंदे कपड़े खुद पहन लेता है और आपको अपना ‘शाही और निष्कलंक वस्त्र’ पहना देता है।

यह आरोपित धार्मिकता ही वह वस्त्र है जो हमें परमेश्वर की उपस्थिति में बिना किसी डर के खड़ा होने के योग्य बनाता है।

4. इस सत्य का हमारे जीवन पर प्रभाव

जब हम यह समझते हैं कि हमारी धार्मिकता “आरोपित” है (यानी बाहर से दी गई है), तो हमारा मसीही जीवन बदल जाता है:

  1. अहंकार का अंत: हम यह घमंड नहीं कर सकते कि हम “अच्छे” हैं। हम जानते हैं कि हम जो कुछ भी हैं, केवल मसीह के कारण हैं।
  2. दोषभावना (Guilt) से मुक्ति: जब शैतान हमें हमारे पुराने पापों की याद दिलाता है, तो हम कह सकते हैं, “हाँ, मैंने वह किया था, लेकिन अब मेरा खाता मसीह की धार्मिकता से भरा हुआ है।”
  3. आज्ञापालन की प्रेरणा: हम परमेश्वर को ‘प्रसन्न करने के लिए’ आज्ञा का पालन नहीं करते, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उसने हमें पहले ही स्वीकार कर लिया है। हमारा जीवन अब उसके प्रति कृतज्ञता का परिणाम है।

निष्कर्ष: मसीह में पूर्ण

आरोपित धार्मिकता का अर्थ है कि मसीह में आप उतने ही धर्मी माने गए हैं जितना कि स्वयं मसीह। यह आपकी मेहनत का फल नहीं, बल्कि परमेश्वर का मुफ्त दान है। आज आप परमेश्वर के पास बिना किसी हिचकिचाहट के जा सकते हैं, क्योंकि आप “उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन गए हैं।”


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज अपनी कमियों पर ध्यान देने के बजाय, मसीह की पूर्णता पर ध्यान दें। खुद से कहें: “मैं मसीह में परमेश्वर की धार्मिकता हूँ।”

प्रार्थना:

“हे कृपालु पिता, मैं तेरे इस अद्भुत दान के लिए धन्यवाद देता हूँ। धन्यवाद कि तूने मेरे पापों का बोझ यीशु पर डाल दिया और उसकी पवित्रता मुझे पहना दी। प्रभु, मुझे अपनी धार्मिकता पर घमंड करने से बचा और मुझे इस सत्य में सुरक्षित रख कि मैं मसीह में पूरी तरह स्वीकार किया गया हूँ। मुझे आज इस स्वतंत्रता और अनुग्रह में जीना सिखा। यीशु के नाम में, आमीन।”


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