
मानवीय जीवन सीमाओं से घिरा हुआ है। हमारी शक्ति, हमारे संसाधन और हमारी बुद्धि एक बिंदु पर आकर समाप्त हो जाते हैं। हम अक्सर ‘असंभव’ शब्द का सामना करते हैं—ऐसी बीमारियाँ जिनका इलाज नहीं, ऐसे रिश्ते जो टूट चुके हैं, और ऐसी परिस्थितियाँ जहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखता। लेकिन बाइबल हमें एक ऐसे परमेश्वर से मिलवाती है जिसका एक विशेष नाम है: एल-शद्दाई (El-Shaddai)।
मत्ती 19:26 में यीशु मसीह ने मानवीय सीमाओं और ईश्वरीय सामर्थ्य के बीच के अंतर को एक ही वाक्य में स्पष्ट कर दिया:
“यीशु ने उनकी ओर देखकर कहा, ‘मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है’।” (मत्ती 19:26)
1. ‘एल-शद्दाई’ (El-Shaddai) का अर्थ
बाइबल के पुराने नियम में, ‘एल-शद्दाई’ शब्द का प्रयोग परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता को दर्शाने के लिए किया गया है।
- एल (El): सामर्थ्य और शक्ति का प्रतीक।
- शद्दाई (Shaddai): इसका मूल अर्थ ‘पर्वत’ या ‘स्तन’ से जुड़ा है, जो यह दर्शाता है कि वह न केवल शक्तिशाली है बल्कि वह ‘सर्व-पर्याप्त’ (All-Sufficient) भी है।
वह एक ऐसा परमेश्वर है जिसके पास अपनी इच्छा पूरी करने के लिए असीमित शक्ति है। उसे किसी से शक्ति उधार लेने की आवश्यकता नहीं है; वह स्वयं शक्ति का स्रोत है।
2. “सब कुछ हो सकता है” का धर्मशास्त्रीय अर्थ
जब यीशु कहते हैं कि परमेश्वर से “सब कुछ” हो सकता है, तो हमें इसकी गहराई को समझना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि परमेश्वर अपनी प्रकृति के विरुद्ध कुछ करेगा (जैसे झूठ बोलना या पाप करना), बल्कि इसका अर्थ है कि:
- सृजन की शक्ति: उसने शून्य से ब्रह्मांड बनाया। जिस परमेश्वर ने केवल शब्द बोलकर आकाशगंगाएँ बना दीं, उसके लिए आपके जीवन की समस्या को सुलझाना कोई बड़ी बात नहीं है।
- परिवर्तन की शक्ति: मत्ती 19 के संदर्भ में, यीशु एक अमीर मनुष्य के उद्धार की बात कर रहे थे। मनुष्यों के लिए हृदय बदलना असंभव है, लेकिन परमेश्वर कठोर से कठोर हृदय को भी बदल सकता है।
- प्राकृतिक नियमों पर अधिकार: उसने समुद्र को दो भाग किया, बीमारों को चंगा किया और मरे हुओं को जिलाया। वह उन नियमों का स्वामी है जिन्हें हम ‘अटल’ मानते हैं।
3. ‘असंभव’ बनाम ‘ईश्वरीय अवसर’
हमारे जीवन में जिसे हम ‘असंभव’ कहते हैं, वह अक्सर परमेश्वर के लिए अपनी महिमा प्रकट करने का एक मंच होता है।
- अब्राहम और सारा: जब वे बूढ़े हो गए थे, तब ‘एल-शद्दाई’ ने उनसे वादा किया और उसे पूरा किया (उत्पत्ति 17:1)।
- लाल समुद्र: इस्राएलियों के पीछे सेना थी और सामने समुद्र। मानवीय रूप से अंत निश्चित था, लेकिन परमेश्वर ने रास्ता निकाला।
जब हमारी क्षमताएं समाप्त होती हैं, तो परमेश्वर की सामर्थ्य काम करना शुरू करती है। आपकी विफलता परमेश्वर की शक्ति के प्रदर्शन का आरंभ हो सकती है।
4. सर्वशक्तिमानता पर भरोसा करने के व्यावहारिक लाभ
यह जानना कि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, हमारे दैनिक जीवन को कैसे बदलता है?
- चिंता से मुक्ति: यदि वह सब कुछ कर सकता है और वह आपसे प्रेम करता है, तो आपको डरने की आवश्यकता क्यों है? उसकी सामर्थ्य आपकी चिंताओं से कहीं बड़ी है।
- प्रार्थना में साहस: हम अक्सर छोटी प्रार्थनाएं करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि परमेश्वर शायद यह न कर पाए। लेकिन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास जाने का अर्थ है—बड़ी उम्मीदें रखना।
- दृढ़ता: जब हम जानते हैं कि जीत अंततः परमेश्वर की होगी, तो हम कठिन समय में भी स्थिर रह सकते हैं।
निष्कर्ष: आपके जीवन की ‘अटल दीवार’
हो सकता है कि आज आप किसी ऐसी परिस्थिति का सामना कर रहे हों जो एक ‘अटल दीवार’ की तरह लग रही हो। याद रखें, आप जिस परमेश्वर की सेवा करते हैं, वह दीवारों को गिराने वाला (यरीहो की तरह) और पहाड़ों को हटाने वाला परमेश्वर है।
यीशु के इन शब्दों को आज अपने हृदय में बसने दें: “परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।”
आज के लिए मनन और प्रार्थना
आज अपनी उस समस्या को लिखें जिसे आप ‘असंभव’ मानते हैं। उसके ऊपर बड़े अक्षरों में लिखें—एल-शद्दाई (El-Shaddai)। अपनी स्थिति को अपनी शक्ति के चश्मे से नहीं, बल्कि उसकी सामर्थ्य के चश्मे से देखें।
प्रार्थना:
“हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर एल-शद्दाई, मैं तेरी असीम सामर्थ्य के सामने झुकता हूँ। मैं स्वीकार करता हूँ कि मेरी बुद्धि और शक्ति सीमित है, लेकिन तेरे लिए कुछ भी असंभव नहीं। मेरे अविश्वास को क्षमा कर। आज मैं अपनी उन चिंताओं और मुश्किलों को तेरे हाथों में सौंपता हूँ जो मुझे असंभव लगती हैं। मुझे यह विश्वास दिला कि तू मेरी परिस्थितियों से कहीं बड़ा है। यीशु के सामर्थी नाम में, आमीन।”