तूहरियों का पर्व Feast of Trumpets (यिद्दीश में रोश हशनाह – Rosh Hashanah) इस्राएल के लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा स्थापित सात वार्षिक पर्वों में से एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण समय था। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह उन्हें एक गहरे आध्यात्मिक सत्य की ओर इंगित करता था: एक महान विश्राम और परमेश्वर के न्याय का समय शुरू होने वाला है।
इस्राएलियों के कैलेंडर, यानी धार्मिक वर्ष के अनुसार, यह पर्व सातवें महीने (जिसे तिश्री – Tishrei कहा जाता है) के पहले दिन मनाया जाता था।परमेश्वर की आज्ञा और शास्त्रीय आधार स्वयं सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने अपने सेवक मूसा को इस विशेष पर्व को मनाने की स्पष्ट आज्ञा दी थी। इस पर्व से संबंधित विस्तृत विवरण और नियम हमें पवित्रशास्त्र की दो पुस्तकों में मिलते हैं:
- लेव्यव्यवस्था (Leviticus) 23:23-25: “यहोवा ने मूसा से कहा, ‘इस्राएलियों से कह, सातवें महीने के पहिले दिन तुम्हारे लिये महाविश्राम का दिन हो; तुरहियां फूंकने का स्मरण दिलाने वाला, एक पवित्र सभा का दिन हो। उसमें तुम कोई काम-काज न करना, और यहोवा के लिये होमबलि चढ़ाना।“
- गिनती (Numbers) 29:1-6: इस भाग में पर्व के दौरान चढ़ाई जाने वाली विशेष बलियों और भेंटों का विस्तृत लेखा-जोखा दिया गया है, जो इस दिन की पवित्रता और महत्व को और भी उजागर करता है।
तूहरियों का पर्व का नाम और इसका अर्थ
इस पर्व को ‘तूहरियों का पर्व’ (Feast of Trumpets) कहने का कारण इसके मनाए जाने के तरीके में निहित है।
- तूहरी (Trumpet/Shofar): यहूदी परंपरा में, ‘तूहरी’ से तात्पर्य एक विशेष प्रकार के वाद्य यंत्र से है जिसे शोफ़ार कहा जाता है। यह अक्सर एक मेढ़े या किसी अन्य बलि पशु के सींग से बना होता है। शोफ़ार की आवाज़ अत्यंत तीखी और मर्म भेदी होती थी।
- उद्घोष (The Sounding): यहूदी कैलेंडर के सातवें महीने के पहले दिन, जब सूर्य अस्त होता और नया दिन शुरू होता, तो पूरे इस्राएल में शोफ़ार की आवाज़ गूँज उठती थी। यह आवाज़ न केवल लोगों को एक स्थान पर इकट्ठा होने के लिए बुलाती थी, बल्कि यह उन्हें अपने पापों का प्रायश्चित करने और आने वाले महान न्याय के लिए तैयार होने की चेतावनी भी देती थी।
- महा विश्राम (High Sabbath): शास्त्रीय रूप से, यह दिन उनके लिए एक ‘महा विश्राम’ का दिन होता था, जिसे शबातोन (Shabbaton) भी कहा जाता था, जिसमें किसी भी प्रकार का सांसारिक काम करना वर्जित था। इस दिन लोग केवल परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित करते थे, अपनी भेंटें (बलिदान) लेकर परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित होते थे, और आत्मा की शुद्धि के लिए प्रार्थना करते थे।
तूहरियों का पर्व का आत्मिक महत्व और भविष्यवाणी

तूहरियों का पर्व केवल बीते हुए समय को याद करने का दिन नहीं था, बल्कि यह भविष्य में होने वाली महान घटनाओं की ओर भी इशारा करता है, खासकर मसीही (Christian) और यहूदी धर्मशास्त्रों की भविष्यवाणी के संदर्भ में:
- न्याय और स्मरण का दिन (Day of Judgment and Remembrance): यहूदियों के लिए रोश हशनाह को योम हादीन (Yom HaDin – न्याय का दिन) और योम हज़िकारोन (Yom HaZikaron – स्मरण का दिन) भी कहा जाता है, जब परमेश्वर मानव जाति के कार्यों का न्याय करते हैं।
- मसीह के आगमन का संकेत: नए नियम के अनुसार, तूहरी (शोफ़ार) की आवाज़ को यीशु मसीह के दूसरे आगमन और मृतकों के पुनरुत्थान से जोड़ा गया है। 1 थिस्सलुनीकियों 4:16 में लिखा है, “क्योंकि प्रभु स्वयं ऊँचे शब्द के साथ, महादूत की आवाज़ और परमेश्वर की तूहरी के साथ स्वर्ग से उतरेगा…”। शोफ़ार का बजना मसीह के अपने लोगों को एकत्रित करने और उन्हें महिमा में ले जाने का अंतिम उद्घोष होगा।
- जाति का एकत्रण (Gathering of Israel): भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणी की थी कि परमेश्वर इस्राएल के बिखरे हुए लोगों को अंत के दिनों में एक महान तूहरी की आवाज़ से फिर से इकट्ठा करेंगे (यशायाह 27:13)। यह पर्व इस अंतिम, भविष्यसूचक एकत्रण की पूर्व-छाया (Shadow) था।
संक्षेप में, तूहरियों का पर्व इस्राएलियों के लिए परमेश्वर के सम्मुख अपनी पवित्रता को नवीनीकृत करने, विश्राम के महत्व को समझने और भविष्य में होने वाले परमेश्वर के न्याय और महिमा के लिए तैयार रहने का एक गंभीर और आनंदमय आह्वान था।
तूहरियों का पर्व क्यों मनाया जाता था? (Biblical Purpose and Deeper Significance) – गहन अध्ययन
मुख्य वचन: लेव्यव्यवस्था 23:23-25; गिनती 29:1-6
तूहरियों का पर्व, जिसे इब्रानी में योम तेरूआ (Yom Teruah – चिल्लाहट या ध्वनि का दिन) के नाम से जाना जाता था, इस्राइल के कैलेंडर में एक विशेष महत्व रखता था। हालाँकि अन्य पर्वों की तुलना में बाइबल में इसके विस्तृत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख कम मिलता है, फिर भी परमेश्वर ने इसे मनाने के लिए जो विशिष्ट आदेश दिए थे, वे इसके गहरे आध्यात्मिक और भविष्यसूचक उद्देश्यों को उजागर करते हैं। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि परमेश्वर और उसके लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद का माध्यम था।
1. सातवें महीने की परम पवित्रता (The Sanctity of the Seventh Month)
- तूहरियों का पर्व सातवें महीने, जिसे तिश्री (Tishrei) कहा जाता था, के पहले दिन मनाया जाता था।
- पूर्णता का प्रतीक: बाइबल में ‘सात’ का अंक पूर्णता, समाप्ति और पवित्रता का प्रतीक है। जिस प्रकार परमेश्वर ने सृष्टि के कार्य को पूरा करने के बाद सातवें दिन (सब्त) को आशीष दी और पवित्र ठहराया, ठीक उसी प्रकार यह सातवाँ महीना इस्राइलियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता था। यह पवित्रता एक नए आत्मिक चक्र की शुरुआत को चिह्नित करती थी।
- पवित्र सभा और विश्राम: परमेश्वर ने इस दिन को पवित्र सभा (Holy Convocation) के रूप में घोषित किया था। इसका अर्थ था कि इस दिन इस्राइल के लोगों को किसी भी प्रकार का सांसारिक काम करने की अनुमति नहीं थी। यह पूर्ण विश्राम का दिन था, जिसका उद्देश्य लोगों को सांसारिक चिंताओं से दूर होकर पूरी तरह से परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना था।
2. आने वाले गंभीर और आनंदमय पर्वों की तैयारी
- सातवाँ महीना अपने आप में ही पर्वों का मौसम था। इस महीने में तीन प्रमुख पर्व मनाए जाते थे, और तूहरियों का पर्व इनमें से सबसे पहला था, जो एक तरह से “प्रवेश द्वार” का कार्य करता था:
- आगामी पर्वों का शंखनाद: तूहरियों (शोफ़ार) का बजना इस्राइल के लोगों के लिए एक ज़ोरदार, मर्मभेदी बुलावा था। यह उन्हें आने वाले दो अत्यंत महत्वपूर्ण पर्वों के लिए मानसिक और आत्मिक रूप से तैयार करने का संकेत था:
- प्रायश्चित का दिन (Yom Kippur): जो सातवें महीने के दसवें दिन मनाया जाता था। यह इस्राइल के लिए सबसे गंभीर और आत्म-दमन का दिन था, जब महायाजक पूरे राष्ट्र के पापों के लिए प्रायश्चित करता था। तूहरियों का बजना लोगों को पापों की जाँच और पश्चाताप की तैयारी के लिए प्रेरित करता था।
- झोपड़ियों का पर्व (Feast of Tabernacles/Sukkot): जो पंद्रहवें दिन शुरू होता था। यह एक महान आनंद का पर्व था, जो मिस्र से छुटकारे के बाद जंगल में परमेश्वर की सुरक्षा और प्रावधान को याद दिलाता था।
- जागृति और आह्वान: तूहरी का बजना सोते हुए लोगों को जगाने जैसा था, उन्हें अपनी आत्मिक स्थिति की समीक्षा करने और परमेश्वर के साथ अपनी संगति को ताज़ा करने का आह्वान करता था। यह एक चेतावनी और साथ ही आशीष के लिए आमंत्रण दोनों था।
3. प्रार्थना का उत्तर, नई शुरुआत और स्मरण

- कई विद्वान तूहरियों के पर्व को एक आत्मिक नए साल की शुरुआत (Rosh Hashanah) के रूप में भी देखते हैं, जो परमेश्वर के अनुग्रह और नई शुरुआत पर केंद्रित था।
- परमेश्वर का स्मरण: तूहरी का बजना परमेश्वर को अपने लोगों के साथ वाचा और प्रतिज्ञाओं को याद दिलाता था (गिनती 10:9)। यह एक ऐसा कार्य था जिसमें परमेश्वर लोगों के बलिदान और विश्वास को स्वीकार करता था।
- प्रार्थना का उत्तर और धन्यवाद: तूहरियों का उपयोग अक्सर युद्ध में जीत, विपत्ति से छुटकारे, या सूखे के बाद अच्छी फसल मिलने जैसी प्रार्थनाओं के उत्तर मिलने के उपरांत किया जाता था। इस पर्व पर शोफ़ार बजाना इस बात का प्रमाण था कि परमेश्वर ने अपने लोगों की पुकार सुनी है, उन्हें आशीष दी है, और वे एक आत्मिक वर्ष से दूसरे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।
- मसीह में भविष्यसूचक महत्व: नया नियम इन पर्वों में गहरा भविष्यसूचक अर्थ देखता है। मसीही दृष्टिकोण से, तूहरी की ध्वनि मसीह के दूसरे आगमन की घोषणा का प्रतीक है (1 थिस्सलुनीकियों 4:16)। जिस प्रकार तूहरी इस्राइल को तैयार करती थी, उसी प्रकार यह पर्व भविष्य में मसीह के अंतिम शंखनाद के लिए कलीसिया को तैयार रहने की आवश्यकता पर बल देता है।
संक्षेप में, तूहरियों का पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह पवित्रता के लिए एक बुलावा, पश्चाताप की तैयारी, परमेश्वर के प्रति धन्यवाद ज्ञापन, और भविष्य में होने वाले महान उद्धार के कार्य का एक भविष्यसूचक स्मरण था।
मसीहियों के लिए तूहरियों के पर्व का भविष्यसूचक महत्व (Prophetic Significance of the Feast of Trumpets)
परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए बाइबल में सात वार्षिक पर्वों की स्थापना की थी। ये पर्व न केवल अतीत में परमेश्वर के महान कार्यों की याद दिलाते हैं, बल्कि ये भविष्य में होने वाली महान घटनाओं—विशेषकर प्रभु यीशु मसीह के उद्धार के कार्य और उनके दूसरे आगमन की रूपरेखा भी प्रस्तुत करते हैं। इन सात पर्वों को दो मुख्य समूहों में बाँटा जा सकता है:
1. पहले चार पर्व (प्रभु यीशु के प्रथम आगमन पर पूरे हुए):
- फसह (Pesach): यीशु मसीह के बलिदान और हमारे पापों के लिए उनकी मृत्यु को दर्शाता है।
- अखमीरी रोटी का पर्व (Feast of Unleavened Bread): यीशु के पवित्र, निष्पाप जीवन और उनके दफ़न को दर्शाता है।
- प्रथम फल का पर्व (Feast of Firstfruits): यीशु मसीह के पुनरुत्थान को दर्शाता है, जो “मरे हुओं में से पहलौठा” हुए।
- पेंतेकुस्त (Pentecost): पवित्र आत्मा के आगमन और कलीसिया के जन्म को दर्शाता है।
2. बाद के तीन पर्व (प्रभु यीशु के दूसरे आगमन से संबंधित):
ये तीन पर्व, जो पतझड़ (शरद ऋतु) में आते हैं, अभी तक पूरी तरह से पूरे नहीं हुए हैं, और ये प्रभु यीशु मसीह के गौरवशाली दूसरे आगमन के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। तूहरियों का पर्व (Yom Teruah/Feast of Trumpets) इन तीनों में से पहला है, और इसका भविष्यसूचक महत्व अत्यंत गहरा और रोमांचक है।
तूहरियों के पर्व के तीन प्रमुख भविष्यसूचक पहलू
यह पर्व उस समय को इंगित करता है जब परमेश्वर अपनी अंतिम योजना को इस पृथ्वी पर पूरा करने जा रहे हैं।

1. यीशु मसीह के आगमन का उद्घोष (The Announcement of Christ’s Return)
तूहरियों का पर्व, जिसे इब्रानी में योम तेरूआ कहा जाता है, का अर्थ है “फूँकने या चिल्लाने का दिन।” यह पर्व इज़राइल के लिए एक नया साल (रोश हशनाह) का प्रतीक भी था और इसे जोर-शोर से शॊफ़ार (मेमने के सींग से बनी एक पारंपरिक तूहरी) फूँक कर मनाया जाता था।
भविष्य में, यह पर्व प्रभु यीशु मसीह के दूसरे आगमन की शुरुआत का एक ज़बरदस्त उद्घोष होगा। पवित्रशास्त्र में बार-बार यह उल्लेख किया गया है कि प्रभु का आगमन तूहरी के फूँके जाने के साथ प्रारंभ होगा:
- योएल 2:1: “सिय्योन में नरसिंगा फूँको! मेरे पवित्र पर्वत पर ललकारो!”
- मत्ती 24:31: यीशु ने कहा कि “वह बड़े शब्द की तूहरी के साथ अपने दूतों को भेजेगा, और वे आकाश के इस छोर से उस छोर तक, चारों दिशाओं से उसके चुने हुए लोगों को इकट्ठा करेंगे।”
- 1 थिस्सलुनीकियों 4:16: “क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तूहरी फूँकी जाएगी…”
- प्रकाशितवाक्य 8: प्रकाशितवाक्य की पुस्तक सात तूहरियों के न्याय का विस्तृत वर्णन करती है, जो अंत के समय में परमेश्वर के न्याय की शुरुआत का प्रतीक हैं।
यह तूहरी न केवल एक चेतावनी होगी, बल्कि यह सारी सृष्टि के लिए यह घोषणा करेगी कि राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु, यीशु मसीह, अपनी महिमा में वापस आ रहा है।
2. कलीसिया का उठाया जाना (The Rapture of the Church)
पुराने नियम में, शॊफ़ार का उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जिनमें से एक था युद्ध के लिए सेना को इकट्ठा करना या लोगों को किसी महत्वपूर्ण सभा के लिए बुलाना। यह सामूहिक बुलावा तूहरियों के पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
ठीक उसी तरह, जब अंतिम तूहरी फूँकी जाएगी, तब कलीसिया—यानी यीशु मसीह पर विश्वास करने वालों का समूह—बादलों पर अपने प्रभु से मिलने के लिए उठा ली जाएगी। यह घटना, जिसे रैप्चर कहा जाता है, मसीह के दूसरे आगमन का पहला और सबसे मुख्य चिन्ह होगी:
- 1 थिस्सलुनीकियों 4:14-17: यह बताता है कि जो मसीह में सो गए हैं (मर गए हैं) और जो जीवित बचे हैं, वे सब के सब एक साथ बादलों पर उठा लिए जाएँगे, जहाँ वे हवा में प्रभु से मिलेंगे और हमेशा उनके साथ रहेंगे।
यह पर्व कलीसिया के लिए एक भव्य, सामूहिक बुलावा होगा—एक दिव्य निमंत्रण जो हमें पृथ्वी के संघर्षों से मुक्ति दिलाकर अनन्त आनंद के लिए स्वर्ग में ले जाएगा।3. महिमामय शरीर और पुनरुत्थान (Glorification and Resurrection)
तूहरियों के पर्व का एक और सबसे उत्साहजनक और महत्वपूर्ण भविष्यसूचक पहलू मरे हुओं का पुनरुत्थान और जीवित विश्वासियों का रूपांतरण है।
प्रेरित पौलुस इस महान रहस्य को समझाते हुए कहता है कि यह सब अंतिम तूहरी के साथ होगा:
- 1 कुरिन्थियों 15:51-52: “देखो, मैं तुम से एक भेद की बात कहता हूँ: हम सब तो नहीं सोएँगे, परन्तु हम सब बदल जाएँगे। और यह पल भर में, पलक मारते ही, पिछली तूहरी बजते ही होगा। क्योंकि तूहरी बजेगी, और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे।”
जब अंतिम तूहरी बजेगी, तब मसीह में मरे हुए सभी विश्वासी एक नए, अविनाशी और महिमा से भरे हुए शरीर में जी उठेंगे। और हम, जो उस समय जीवित होंगे, तुरंत ही बदल जाएँगे। हमारा नाशवान शरीर अविनाशी में और मरणाधीन शरीर अनन्त जीवन के लिए बदल जाएगा। यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी, अलौकिक घटना होगी, जो हमें अनन्त काल के लिए तैयार करेगी।
निष्कर्ष और आज की प्रासंगिकता
तूहरियों के पर्व की ये भविष्यवाणियाँ पूरी होना अभी बाकी है। यह पर्व हर विश्वासी के लिए एक शक्तिशाली अनुस्मारक है कि परमेश्वर की अनंत काल की योजना अटूट और निश्चित है, और वह अपने वादों को ठीक समय पर पूरा करेगा।
तूहरियों की गूँज आज हमें सचेत करती है कि प्रभु का आना वास्तव में निकट है। यह वह समय नहीं है जब हमें दुनिया की चिंताओं में खो जाना चाहिए, बल्कि यह हमें प्रोत्साहित करता है कि हम:
- पवित्रता में जिएँ: परमेश्वर के वचन के अनुसार अपना जीवन बिताएँ और हर तरह के पाप से दूर रहें।
- जागते रहें: आत्मिक रूप से सतर्क रहें और अंत के समय के चिन्हों को पहचानें।
- तैयार रहें: अपने दिल को शुद्ध रखें और उस अंतिम तूहरी के फूँके जाने के लिए उत्साह और उत्सुकता के साथ परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के गौरवशाली प्रकटीकरण का इंतजार करें।
तूहरियों के पर्व (Feast of Trumpets) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Resources :
Gotquestion – What is the Feast of Trumpet