यहूदी त्योहारों का परिचय: अर्थ, इतिहास और मसीही महत्व| Introduction of Jewish Festival; Meaning, history and Christian importance – 01

यहूदी त्योहारों का परिचय

Jewish Festival Introduction- Hindi यहूदी त्योहारों

यहूदी त्योहारों के बारे में आपने शायद बहुत बार सुना होगा। परंतु यहूदी त्योहारों के विषय में एक बात बहुत ही खास है कि ये सिर्फ त्योहार ही नहीं हैं, बल्कि ये अपने आप में परमेश्वर के द्वारा निर्धारित की हुई योजना के बारे में बहुत सारी बातों को बताते हैं। इसके साथ-साथ यहूदी त्योहार भविष्य में होने वाली बहुत सारी महत्वपूर्ण घटनाओं को अपने में समेटे हुए हैं। इस आने वाली श्रृंखला में आप यहूदी त्योहारों के बारे में विस्तार से सीखेंगे।

इस श्रृंखला के माध्यम से आप जान पाएंगे कि कैसे परमेश्वर का वचन अपनी हर बात में सक्षम और सत्य है। परमेश्वर ने अपने वचन में कोई भी बात बिना किसी ठोस कारण के नहीं लिखी है। इस्राइल के ये त्योहार इस बात का जीवित प्रमाण हैं कि परमेश्वर का वचन कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि एक अटल सत्य है।

मसीही समाज में यहूदी त्योहारों का महत्व

यहूदी त्योहारों का मसीही समाज में बहुत ही ज्यादा महत्व है। ये त्योहार मसीही विश्वास में बहुत सारी बातों की पूर्ति करते हैं। जो बातें पुराने नियम में स्पष्ट नहीं थीं, वे किस तरह नए नियम में उजागर हो गई हैं, यह इन पर्वों को समझकर जाना जा सकता है। जैसा कि परमेश्वर का वचन इब्रानियों 10:1 में बताता है कि पुराने नियम की बातें भविष्य में होने वाली घटनाओं की केवल एक छाया हैं। इसलिए, यहूदी त्योहारों को गहराई से समझना और उन्हें जानना हर विश्वासी के लिए बहुत ही जरूरी है।

Jewish Festival Introduction - Hindi यहूदी त्योहारों

यहूदी त्योहारों का इतिहास | History of Jewish Festival

यहूदी त्योहारों का इतिहास के साथ बहुत ही गहरा रिश्ता है। जैसे हमारी संस्कृति में हम बहुत सारे त्योहारों को मनाते हैं जिनका संबंध कहीं न कहीं परमेश्वर के साथ जुड़ा होता है, ठीक उसी तरह इस्राइल के त्योहारों का इतिहास भी सीधे तौर पर परमेश्वर के कार्यों से जुड़ा हुआ है।

ये त्योहार परमेश्वर द्वारा मनुष्यजाति के उद्धार के लिए किए गए कार्यों का प्रमाण देते हैं। हर एक त्योहार हमें यह बताता है कि किस तरह से परमेश्वर ने यहूदी जाति के साथ व्यवहार किया और उनके माध्यम से अपनी योजना को प्रकट किया।

परमेश्वर ने यहूदियों को विशेष तौर पर यह आज्ञा दी थी कि उन्हें साल में तीन बार परमेश्वर के मंदिर में त्योहार मनाने के लिए अनिवार्य रूप से आना है। इन तीन विशेष अवसरों को हम वार्षिक त्योहार भी कह सकते हैं। लैव्यव्यवस्था 23 में परमेश्वर ने इस्राइल को बहुत ही स्पष्ट रीति से निर्देश दिए थे कि इन त्योहारों को किस तरह से मनाना है। परमेश्वर ने हर एक पर्व के लिए बहुत ही व्यवस्थित तरीका निर्धारित किया था।

बाइबल के अनुसार यहूदियों के प्रमुख पर्व

त्योहार का नाममनाने का समयबाइबल पद संदर्भ
फसह का पर्वनीसान 14निर्गमन 12:1-14; 23:15; लैव्य 23:5; गिनती 28:16; मत्ती 26:17-20
अखमीरी रोटी का पर्व*नीसान 15-21निर्गमन 12:15-20; 34:18; लैव्य 23:6-8; गिनती 28:17-25
पहले पूले का पर्वनीसान 16, सिवान 6लैव्य 23:9-14; गिनती 28:26
पिन्तेकुस्त / सप्ताहों का पर्व*हर-सिवान 6निर्गमन 23:16; 34:22; लैव्य 23:15-22; गिनती 28:26-31; व्यवस्था 16:9-12; प्रेरितों 2:1
तूहरियों का पर्व / नव-वर्षरोष-तिशरी 1लैव्य 23:23-25; गिनती 29:1-6
प्रायश्चित का दिनतिशरी 10लैव्य 16:2-34; 23:26-32; गिनती 29:7-11; इब्रानियों 9:7
झोपड़ियों का पर्व*तिशरी 15-22निर्गमन 23:16; 34:22; लैव्य 23:33-43; गिनती 29:12-39; व्यवस्था 16:13-17; नेहेम्याह 8:13-18; यूहन्ना 7:2
ज्योतियों का त्योहार (हनुक्का)§किशलेव 25 (8 दिन)यूहन्ना 10:22
पुरीम§आदार 14-15एस्तेर 9:18-32
  • जिन त्योहारों के पीछे स्टार (*) का निशान है, उन्हें मनाने के लिए इस्राइल के सभी पुरुषों को साल में एक बार येरूशलेम के मंदिर में जाना अनिवार्य था।*
    • जिनके पीछे (§) यह निशान है, वे परमेश्वर द्वारा लैव्यव्यवस्था में सीधे तौर पर नहीं दिए गए थे, बल्कि बाद में इस्राइल के इतिहास में घटी विशेष घटनाओं पर आधारित थे।

यहूदी त्योहारों का संक्षिप्त विवरण | Brief Explanation of Jewish Festival

अब हम संक्षेप में देखेंगे कि इन त्योहारों का यहूदियों के लिए क्या महत्व था। आने वाले लेखों में हम प्रत्येक त्योहार पर विस्तार से चर्चा करेंगे, लेकिन यहाँ एक आधारभूत जानकारी दी जा रही है:

1. फसह का पर्व (Passover):

यह इस्राइलियों द्वारा मनाया जाने वाला सबसे पहला त्योहार था। इसका संबंध उस समय से है जब परमेश्वर ने इस्राइल को मिस्र की गुलामी से आश्चर्यजनक रीति से छुड़ाया था। उस महान छुटकारे की याद में यह पर्व मनाया जाता है।

2. अखमीरी रोटी का पर्व:

यह फसह के ठीक अगले दिन शुरू होता है और सात दिनों तक चलता है। इन सात दिनों के दौरान भोजन में खमीर का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित होता था (व्यवस्था 16:4)।

3. पहले पूले का पर्व (Firstfruits):

इस पर्व में इस्राइल के लोग अपनी फसल की पहली उपज को परमेश्वर के भवन में लेकर आते थे और उसे वहां अर्पित किया जाता था। यह परमेश्वर की आशीषों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन था।

4. पिन्तेकुस्त का त्योहार (Pentecost):

इसे ‘कटनी का पर्व’ भी कहा जाता है। इस त्योहार को मनाने के लिए भी इस्राइल के लोगों को येरूशलेम जाना होता था। यह फसल पकने की खुशी और परमेश्वर के प्रावधान का उत्सव था।

यहूदी त्योहारों Introduction to Jewish Festival

5. तूहरियों का पर्व (Feast of Trumpets):

यह पर्व तूहरी (Trumpet) बजाने के साथ शुरू होता था और एक पवित्र महासभा के रूप में आयोजित किया जाता था। यह नए खेती के साल की शुरुआत का प्रतीक था। इस दौरान किसी भी प्रकार का कठिन परिश्रम करना प्रतिबंधित था और लोग आनंद के साथ जश्न मनाते थे।

6. प्रायश्चित का दिन (Day of Atonement):

यह इस्राइलियों के लिए साल का सबसे पवित्र और गंभीर दिन है। यह वर्ष में केवल एक बार मनाया जाता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिन यहूदियों का महायाजक ‘महापवित्र स्थान’ में प्रवेश करता था और अपने व पूरे इस्राइल के पापों के लिए प्रायश्चित करता था।

7. झोपड़ियों का पर्व (Feast of Tabernacles):

यह पर्व उस समय की याद में मनाया जाता है जब इस्राइल के लोग मिस्र से निकलने के बाद 40 वर्षों तक जंगल में रहे थे। उस कठिन समय में परमेश्वर ने किस तरह उनकी रक्षा की और उनके साथ रहा, इसे याद करते हुए यहूदी लोग झोपड़ियाँ बनाकर इस पर्व को मनाते हैं।


निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से मैंने आपको यहूदी त्योहारों का एक विस्तृत परिचय देने का प्रयास किया है। मुख्य रूप से 7 ऐसे पर्व थे जो परमेश्वर ने स्वयं उन्हें मनाने की आज्ञा दी थी। हालांकि, समय के साथ यहूदियों ने कुछ और ऐतिहासिक पर्व भी जोड़ दिए, जो उनके इतिहास की महत्वपूर्ण विजयों और घटनाओं की याद दिलाते हैं।

इन त्योहारों का गहरा आत्मिक अर्थ समझना हमारे मसीही जीवन की नींव को और भी मजबूत करता है।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top