परमेश्वर के गुणों को जानना ही अनंत जीवन है
पिछले दिनों में हमने परमेश्वर के विभिन्न गुणों—उसकी पवित्रता, संप्रभुता, प्रेम, सर्वज्ञता और अपरिवर्तनीयता—का मनन किया। आज इस यात्रा के […]
पिछले दिनों में हमने परमेश्वर के विभिन्न गुणों—उसकी पवित्रता, संप्रभुता, प्रेम, सर्वज्ञता और अपरिवर्तनीयता—का मनन किया। आज इस यात्रा के […]
आज का विषय आधुनिक युग के सबसे कठिन और कम चर्चा किए जाने वाले विषयों में से एक है—परमेश्वर का
परमेश्वर के गुणों के इस अध्ययन में कल हमने सीखा कि “परमेश्वर प्रेम है”। आज हम उस प्रेम के सबसे
दुनिया में ‘प्रेम’ शब्द का इस्तेमाल इतनी बार और इतने अलग-अलग तरीकों से किया जाता है कि इसका असली अर्थ
परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता के बारे में जानने के बाद, एक बहुत ही स्वाभाविक और डरावना प्रश्न उठता है:
अक्सर हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ ‘सही’ और ‘गलत’ की परिभाषाएं परिस्थितियों के अनुसार बदल जाती हैं।
कल हमने परमेश्वर की पवित्रता के अर्थ पर मनन किया था। हमने देखा कि वह “पवित्र, पवित्र, पवित्र” है। लेकिन
बाइबिल में परमेश्वर के कई गुणों का वर्णन है—वह प्रेम है, वह सामर्थी है, वह सर्वज्ञ है। लेकिन एक गुण
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ ‘परिवर्तन’ ही एकमात्र स्थिर चीज़ है। तकनीक बदल रही है, मौसम बदल
मसीही जीवन के सबसे गहरे रहस्यों में से एक है परमेश्वर की संप्रभुता (Sovereignty) और मनुष्य की जिम्मेदारी (Responsibility) के