दिन 9: उद्धार की छाप—आपकी सुरक्षा की मुहर
आज हम उसी ‘छाप’ या ‘मुहर’ के गहरे अर्थ को समझेंगे, जो न केवल हमारे वर्तमान को बल्कि हमारे अनंत […]
आज हम उसी ‘छाप’ या ‘मुहर’ के गहरे अर्थ को समझेंगे, जो न केवल हमारे वर्तमान को बल्कि हमारे अनंत […]
पवित्र आत्मा की प्राप्ति और बपतिस्मा।” बहुत से मसीही इस उलझन में रहते हैं कि पवित्र आत्मा को पाने के
पवित्र आत्मा के व्यक्तित्व, उसके वास और उसके मार्गदर्शन के बारे में सीखने के बाद, आज हम सप्ताह के अंतिम
हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जिसे अक्सर “सत्य-पश्चात” (Post-truth) युग कहा जाता है। यहाँ हर किसी के पास
मानव इतिहास में ‘मंदिर’ का स्थान हमेशा से अत्यंत पवित्र और विशिष्ट रहा है। पुराने नियम के समय में, परमेश्वर
“और पृथ्वी बेडौल और सूनी पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्वर का आत्मा जल के
मुख्य वचन: “इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के चेलों को बनाओ और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के
मुख्य आयत: “परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिससे तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी
परमेश्वर के गुणों के हमारे अध्ययन के बाद, अब हम उस अद्भुत व्यक्तित्व की ओर बढ़ रहे हैं जो आज
परमेश्वर के गुणों और उसके प्रभुत्व (Sovereignty) के बारे में हमने जो कुछ भी सीखा है, उसका सबसे जीवंत और