दिन 7: शुद्ध सोना और मधु—परमेश्वर के वचन का अतुलनीय मूल्य

वचन की बहुमूल्यता

आज हम इस सप्ताह का समापन वचन के सौंदर्य और मूल्य के साथ करेंगे। वचन केवल एक ‘नियम की पुस्तक’ नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा खजाना है जो संसार की हर दौलत से कीमती है और हर सुख से अधिक मधुर है। भजनकार दाऊद, जो स्वयं एक राजा थे और जिनके पास धन-दौलत की […]

दिन 6: आत्मिक भोजन—आत्मा की अनिवार्य आवश्यकता

आत्मिक भोजन मत्ती 4:4

आज हम देखेंगे कि यह वचन केवल हमें ‘बनाता’ ही नहीं, बल्कि हमें ‘बनाए’ भी रखता है। जैसे हमारे शरीर को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, वैसे ही हमारी आत्मा को जीवित रहने के लिए परमेश्वर के वचन की निरंतर आवश्यकता है। जब यीशु जंगल में चालीस दिन के उपवास के […]

दिन 5: सृजनात्मक सामर्थ्य—शून्य से सृष्टि तक

भजन संहिता 33:6 सृजनात्मक सामर्थ्य

आज हम उस चमत्कारी शक्ति को देखेंगे जिससे यह संपूर्ण ब्रह्मांड अस्तित्व में आया। बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने संसार बनाने के लिए किसी औजार या सामग्री का उपयोग नहीं किया, बल्कि उसने केवल कहा, और सब कुछ हो गया। भजनकार परमेश्वर की सृजन शक्ति का वर्णन इन गहरे शब्दों में करता है: […]

दिन 4: अनंत और अटल—परिवर्तनशील संसार में अपरिवर्तनीय सत्य

Devotion of Matthew 4:4 मत्ती 4:4 अनंत और अटल वचन

आज हम उस गुण पर विचार करेंगे जो बाइबल को इस संसार की हर दूसरी चीज़ से अलग करता है—उसका स्थायित्व (Permanence)। एक ऐसी दुनिया में जहाँ तकनीक, फैशन, विचार और यहाँ तक कि रिश्ते भी हर दिन बदल रहे हैं, परमेश्वर का वचन एक ऐसी स्थिर चट्टान है जो कभी नहीं हिलती। यीशु मसीह […]

दिन 3: ज्योति और मार्गदर्शक—भ्रम के अंधेरे में स्पष्टता

kumar Bhushan ministry

आज हम वचन के एक अत्यंत कोमल और व्यावहारिक रूप को देखेंगे—एक मार्गदर्शक ज्योति। इस संसार की अनिश्चितताओं और भ्रम के अंधेरे में, परमेश्वर का वचन हमें यह बताता है कि हमारा अगला कदम कहाँ होना चाहिए।भजनकार ने अपने जीवन के अनुभवों से परमेश्वर के वचन की उपयोगिता को इन प्रसिद्ध शब्दों में व्यक्त किया […]

दिन 2: जीवित और प्रबल—हृदय की शल्य-चिकित्सा

आज हम उस सामर्थ्य को देखेंगे जो इस दैवीय श्वास के कारण वचन में समाहित है। परमेश्वर का वचन केवल स्याही और पन्नों तक सीमित नहीं है; यह एक सक्रिय शक्ति है जो हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी परतों में प्रवेश करने की क्षमता रखती है। इब्रानियों के लेखक परमेश्वर के वचन की पैठ और […]

दिन 1: परमेश्वर की श्वास—वचन की ईश्वरीय प्रेरणा

आज का हमारा ध्यान उस स्रोत पर है जहाँ से बाइबल निकली है। यह केवल मनुष्यों के विचारों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह स्वयं सृष्टिकर्ता की वाणी है। प्रेरित पौलुस, तीमुथियुस को लिखे अपने अंतिम पत्र में, पवित्र शास्त्र की अलौकिक उत्पत्ति के बारे में यह आधारभूत सत्य बताते हैं: “हर एक पवित्र शास्त्र […]

10 कारण बाइबल की आवश्यकता क्यों है? | 10 Reasons Why do We Need Bible  

बाइबल की आवश्यकता why do we need bible - 1

बाइबल की आवश्यकता Why do We Need Bible  – एक परिचय मसीही धर्मशास्त्र (Christian Theology) के केंद्र में एक मौलिक और आधारभूत प्रश्न खड़ा होता है: “क्या कारण है कि हमें बाइबल की आवश्यकता है?” यह प्रश्न केवल एक अकादमिक जिज्ञासा नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर की प्रकृति, मानव जाति के साथ उसके संबंध और उसके […]

बाइबल की प्रेरणा / Bible ki Prerna/ Inspiration of Bible 02

बाइबल की प्रेरणा

बाइबल की प्रेरणा क्या है? बाइबल की प्रेरणा के बारे में हम क्या जानते हैं ? क्या बाइबल सच में परमेश्वर का वचन हैं ? हम इस लेख में बाइबल की प्रेरणा के बारे में सब बातों को समझने का प्रयास करेंगे। बाइबल की प्रेरणा का क्या अर्थ है हिंदी बाइबल में प्रेरणा शब्द यूनानी शब्द से लिया […]

बाइबल क्या हैं 01 / Bible kya hain ?/ What is Bible?

त्रिएकता (ट्रिनिटी) Trinity models

बाइबल क्या हैं: एक परिचय बाइबल क्या हैं ? अगर ये सवाल आप से पूछा जाए तो आप के पास भी बहुत सारे ऐसे जबाब होंगे | जो शायद आपको सही लगते हों ? क्या आप वास्तव में जानते है की बाइबल क्या है? इसके लेकर बहुत सारे लोग अपने अपने विचारों को रखते हैं| कोई बाइबल को पवित्र ग्रन्थ […]