दिन 16: हृदय में संचय—पाप के विरुद्ध सबसे सुरक्षित ढाल

आज हम उस गुप्त स्थान के बारे में बात करेंगे जहाँ से आज्ञाकारिता का जन्म होता है—हमारा हृदय। वचन को केवल दिमाग में रखना या कागजों पर लिखना काफी नहीं है; इसे अपने हृदय की गहराई में सुरक्षित रखना आत्मिक विजय की सबसे बड़ी कुंजी है। भजनकार ने पाप पर जय पाने और परमेश्वर के […]
दिन 15: सुनने वाले नहीं, करने वाले—क्रियान्वित विश्वास

अब हम इस पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि हमें इस वचन के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज का विषय मसीही जीवन की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी आशीष के बारे में है—वचन को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारना। प्रभु यीशु के भाई याकूब, जो अपने व्यवहारिक उपदेशों के लिए जाने जाते हैं, विश्वासियों […]
दिन 14: बुद्धि का भंडार—साधारण को समझ देने वाला प्रकाश

आज हम इस सप्ताह का समापन एक बहुत ही सुंदर सत्य के साथ करेंगे—कि कैसे परमेश्वर का वचन हमें वह बुद्धि देता है जो स्कूल या कॉलेजों की डिग्रियों से कहीं बढ़कर है। संसार में बुद्धि को अक्सर बौद्धिक स्तर (IQ) से मापा जाता है, लेकिन बाइबल कहती है कि आत्मिक बुद्धि का द्वार हर […]
दिन 13: सफलता का रहस्य—मनन की सामर्थ्य

आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे पूरी दुनिया खोज रही है—सफलता। संसार सफलता को कड़ी मेहनत, भाग्य या संपर्कों के माध्यम से प्राप्त करने की कोशिश करता है, लेकिन बाइबल हमें एक ऐसा ‘सफलता का सूत्र’ (Formula for Success) देती है जो कभी विफल नहीं होता। जब मूसा की मृत्यु के बाद […]
दिन 12: चंगाई और छुटकारा—पुनर्स्थापना की सामर्थ्य

आज हम वचन के एक बहुत ही सुखद और कोमल पक्ष को देखेंगे—उसकी चंगा करने वाली सामर्थ्य। अक्सर हम चंगाई के लिए किसी व्यक्ति या विशेष प्रार्थना की खोज करते हैं, लेकिन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने चंगाई का सबसे शक्तिशाली माध्यम पहले ही हमें दे दिया है: उसका वचन। भजनकार उन लोगों […]
दिन 11: आत्मा की तलवार—अंधकार की शक्तियों पर विजय

आज हम देखेंगे कि यह विश्वास और वचन मिलकर हमारे जीवन में एक हथियार का काम कैसे करते हैं। मसीही जीवन केवल एक शांतिपूर्ण यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक युद्ध भी है। इस युद्ध में परमेश्वर ने हमें असुरक्षित नहीं छोड़ा है। प्रेरित पौलुस इफिसुस की कलीसिया को ‘परमेश्वर के सारे हथियार’ बाँधने […]
दिन 10: विश्वास का स्रोत—सुनने की सामर्थ्य

आज हम मसीही जीवन के सबसे महत्वपूर्ण तत्व—विश्वास—और उसके ‘पावर हाउस’ (वचन) के बीच के संबंध को समझेंगे। अक्सर लोग कहते हैं, “काश मेरा विश्वास और मज़बूत होता!” आज का वचन हमें बताता है कि विश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हमें अपनी इच्छाशक्ति से पैदा करना है, बल्कि यह एक ‘परिणाम’ है। प्रेरित […]
दिन 9: शुद्ध करने वाला—पवित्रता का मार्ग

आज हम देखेंगे कि नया जन्म पाने के बाद, यह वचन हमारे दैनिक जीवन और चरित्र को ‘साफ’ और ‘शुद्ध’ रखने में कैसे मदद करता है। जैसे हमें अपने शरीर को साफ रखने के लिए प्रतिदिन जल की आवश्यकता होती है, वैसे ही अपनी आत्मा और चाल-चलन को निष्कलंक रखने के लिए हमें वचन के […]
दिन 8: नया जन्म—अविनाशी बीज की सामर्थ्य

आज का विषय मसीही जीवन की सबसे बुनियादी और चमत्कारी घटना के बारे में है—हमारा नया जन्म। प्रेरित पतरस विश्वासियों को उनकी नई पहचान की याद दिलाते हुए बताते हैं कि उनका आत्मिक जन्म कैसे हुआ: “क्योंकि तुमने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवित और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया […]
दिन 7: शुद्ध सोना और मधु—परमेश्वर के वचन का अतुलनीय मूल्य

आज हम इस सप्ताह का समापन वचन के सौंदर्य और मूल्य के साथ करेंगे। वचन केवल एक ‘नियम की पुस्तक’ नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा खजाना है जो संसार की हर दौलत से कीमती है और हर सुख से अधिक मधुर है। भजनकार दाऊद, जो स्वयं एक राजा थे और जिनके पास धन-दौलत की […]