दिन 17: प्रेम (अगापे)—परमेश्वर का उंडेला हुआ प्रेम
आज हम उस फल के सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अंश पर गौर करेंगे—प्रेम। बाइबल के अनुसार, प्रेम केवल एक […]
आज हम उस फल के सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अंश पर गौर करेंगे—प्रेम। बाइबल के अनुसार, प्रेम केवल एक […]
एक मसीही जीवन की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह क्या ‘कहता’ है, बल्कि इस बात से
अक्सर मसीही जीवन में हम एक बड़ी गलती करते हैं—हम सोचते हैं कि एक बार पवित्र आत्मा पा लेना ही
हम उस महान विजय पर गौर करेंगे जो पवित्र आत्मा हमारे जीवन में लाता है। कल हमने ‘पाप के बोध’
जब पवित्र आत्मा हमें नया जीवन देता है, तो वह हमें केवल जीवित ही नहीं करता, बल्कि वह हमारे भीतर
हमने ‘छाप’, ‘बपतिस्मा’ और ‘बयाने’ के बारे में गहराई से समझा। आज हम उस बुनियादी और चमत्कारी कार्य पर गौर
आज हम एक ऐसे शब्द पर गौर करेंगे जो व्यापार और वादों की दुनिया से आता है, लेकिन इसका अर्थ
अब हम एक बहुत ही गहरे और एकता लाने वाले सत्य पर पहुँच गए हैं। अक्सर लोग ‘आत्मा के बपतिस्मा’
आज हम उसी ‘छाप’ या ‘मुहर’ के गहरे अर्थ को समझेंगे, जो न केवल हमारे वर्तमान को बल्कि हमारे अनंत
पवित्र आत्मा की प्राप्ति और बपतिस्मा।” बहुत से मसीही इस उलझन में रहते हैं कि पवित्र आत्मा को पाने के