दिन 18: आनंद और शांति—परिस्थितियों से परे का राज्य
आज हम उस आत्मिक फल के अगले दो महत्वपूर्ण हिस्सों पर गौर करेंगे—आनंद और शांति। दुनिया अक्सर खुशी और सुकून […]
आज हम उस आत्मिक फल के अगले दो महत्वपूर्ण हिस्सों पर गौर करेंगे—आनंद और शांति। दुनिया अक्सर खुशी और सुकून […]
आज हम पवित्र आत्मा के उन गुणों पर गौर करेंगे जो हमारे संबंधों और व्यवहार को निखारते हैं—धीरज और कृपा।
आज हम उस फल के सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अंश पर गौर करेंगे—प्रेम। बाइबल के अनुसार, प्रेम केवल एक
एक मसीही जीवन की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह क्या ‘कहता’ है, बल्कि इस बात से
अक्सर मसीही जीवन में हम एक बड़ी गलती करते हैं—हम सोचते हैं कि एक बार पवित्र आत्मा पा लेना ही
हम उस महान विजय पर गौर करेंगे जो पवित्र आत्मा हमारे जीवन में लाता है। कल हमने ‘पाप के बोध’
जब पवित्र आत्मा हमें नया जीवन देता है, तो वह हमें केवल जीवित ही नहीं करता, बल्कि वह हमारे भीतर
यीशु मसीह के आख़िरी वचन यीशु मसीह के क्रूस पर कहे गए आखिरी वचन न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण
हमने ‘छाप’, ‘बपतिस्मा’ और ‘बयाने’ के बारे में गहराई से समझा। आज हम उस बुनियादी और चमत्कारी कार्य पर गौर
आज हम एक ऐसे शब्द पर गौर करेंगे जो व्यापार और वादों की दुनिया से आता है, लेकिन इसका अर्थ