दिन 1: पवित्र आत्मा कौन है? (यूहन्ना 14:16-17)

पवित्र आत्मा

परमेश्वर के गुणों के हमारे अध्ययन के बाद, अब हम उस अद्भुत व्यक्तित्व की ओर बढ़ रहे हैं जो आज इस पृथ्वी पर हमारे साथ है—पवित्र आत्मा। अक्सर लोग पवित्र आत्मा को केवल एक ‘शक्ति’, ‘बादल’ या ‘अहसास’ मानते हैं, लेकिन यीशु मसीह ने यूहन्ना 14:16-17 में उसे एक बहुत ही व्यक्तिगत और शक्तिशाली तरीके … Read more

यूसुफ का जीवन: बुराई के धागों से भलाई बुनने वाला परमेश्वर

यूसुफ का जीवन: बुराई के धागों से भलाई बुनने वाला परमेश्वर

परमेश्वर के गुणों और उसके प्रभुत्व (Sovereignty) के बारे में हमने जो कुछ भी सीखा है, उसका सबसे जीवंत और व्यावहारिक उदाहरण यूसुफ के जीवन में मिलता है। यूसुफ की कहानी केवल एक पारिवारिक विवाद या व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है; यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक संप्रभु परमेश्वर मानवीय पाप, … Read more

परमेश्वर के गुणों को जानना ही अनंत जीवन है

परमेश्वर के गुणों को जानना ही अनंत जीवन है

पिछले दिनों में हमने परमेश्वर के विभिन्न गुणों—उसकी पवित्रता, संप्रभुता, प्रेम, सर्वज्ञता और अपरिवर्तनीयता—का मनन किया। आज इस यात्रा के अंतिम पड़ाव पर हम उस सत्य तक पहुँचते हैं जो इन सभी गुणों को हमारे अस्तित्व के केंद्र से जोड़ देता है। परमेश्वर के गुणों को जानना केवल एक बौद्धिक अभ्यास या धार्मिक जानकारी नहीं … Read more

परमेश्वर का पवित्र क्रोध: पाप के प्रति न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया

परमेश्वर का पवित्र क्रोध: पाप के प्रति न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया

आज का विषय आधुनिक युग के सबसे कठिन और कम चर्चा किए जाने वाले विषयों में से एक है—परमेश्वर का क्रोध। अक्सर हम केवल परमेश्वर के प्रेम और करुणा की बात करना पसंद करते हैं, लेकिन बाइबल परमेश्वर के क्रोध को उसके एक अनिवार्य गुण के रूप में प्रस्तुत करती है। बिना क्रोध के, परमेश्वर … Read more

अगापे (Agape): पापी के लिए बलिदान वाला प्रेम

अगापे (Agape): पापी के लिए बलिदान वाला प्रेम

परमेश्वर के गुणों के इस अध्ययन में कल हमने सीखा कि “परमेश्वर प्रेम है”। आज हम उस प्रेम के सबसे ऊंचे और सबसे चुनौतीपूर्ण रूप को देखेंगे जिसे बाइबल ‘अगापे’ (Agape) कहती है। यह मानवीय प्रेम से पूरी तरह भिन्न है। संसार का प्रेम अक्सर योग्यता और आकर्षण पर आधारित होता है, लेकिन परमेश्वर का … Read more

परमेश्वर प्रेम है: भावनाओं से परे एक अटल संकल्प

परमेश्वर प्रेम है: भावनाओं से परे एक अटल संकल्प

दुनिया में ‘प्रेम’ शब्द का इस्तेमाल इतनी बार और इतने अलग-अलग तरीकों से किया जाता है कि इसका असली अर्थ कहीं खो गया है। हम कहते हैं कि हमें किसी फिल्म से प्रेम है, किसी भोजन से प्रेम है, या किसी व्यक्ति से प्रेम है। हमारे लिए प्रेम अक्सर एक ‘भावना’ (Feeling) होती है जो … Read more

आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness): मसीह की पवित्रता हमारा पहनावा

आरोपित धार्मिकता (Imputed Righteousness): मसीह की पवित्रता हमारा पहनावा

परमेश्वर की धार्मिकता और पवित्रता के बारे में जानने के बाद, एक बहुत ही स्वाभाविक और डरावना प्रश्न उठता है: “यदि परमेश्वर इतना पवित्र है कि वह पाप को देख नहीं सकता, और मैं इतना अशुद्ध हूँ कि अपनी धार्मिकता से उसे कभी खुश नहीं कर सकता, तो मैं उसके सामने खड़ा कैसे हो सकता … Read more

परमेश्वर की धार्मिकता: सच्चाई और न्याय का अंतिम मानक

परमेश्वर की धार्मिकता: सच्चाई और न्याय का अंतिम मानक

अक्सर हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ ‘सही’ और ‘गलत’ की परिभाषाएं परिस्थितियों के अनुसार बदल जाती हैं। जिसे एक समाज ‘न्याय’ कहता है, दूसरा उसे ‘अन्याय’ मान सकता है। इस नैतिक अस्पष्टता के बीच, बाइबल हमें एक ऐसे परमेश्वर की ओर ले जाती है जो स्वयं धार्मिकता और न्याय का अंतिम और … Read more

पवित्रता का प्रभाव: जब हम अपनी अशुद्धता को पहचानते हैं

पवित्रता का प्रभाव

कल हमने परमेश्वर की पवित्रता के अर्थ पर मनन किया था। हमने देखा कि वह “पवित्र, पवित्र, पवित्र” है। लेकिन आज हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि जब एक सीमित और पापी मनुष्य उस असीम पवित्रता के आमने-सामने आता है, तो उसका क्या प्रभाव होता है। यशायाह भविष्यवक्ता का अनुभव हमें मानवीय स्वाभिमान … Read more

पवित्र, पवित्र, पवित्र: परमेश्वर के गुणों का ताज

परमेश्वर की पवित्रता (Holiness)

बाइबिल में परमेश्वर के कई गुणों का वर्णन है—वह प्रेम है, वह सामर्थी है, वह सर्वज्ञ है। लेकिन एक गुण ऐसा है जिसे स्वर्गदूत निरंतर, बिना रुके पुकारते हैं, और यही वह गुण है जो उसके बाकी सभी गुणों को परिभाषित करता है। वह है परमेश्वर की पवित्रता (Holiness)। यशायाह भविष्यवक्ता ने जब स्वर्ग के … Read more