30-दिवसीय आत्मिक यात्रा
30 दिन यीशु मसीह के साथ
यीशु मसीह केवल इतिहास के एक महान शिक्षक नहीं, बल्कि जीवित परमेश्वर, उद्धारकर्ता और संसार की आशा हैं। यह 30-दिवसीय अध्ययन आपको उनके जीवन, चरित्र, शिक्षाओं, प्रेम, क्रूस, पुनरुत्थान और अनन्त राज्य को परमेश्वर के वचन के प्रकाश में गहराई से जानने में सहायता करेगा।
"और अनन्त जीवन यह है कि वे तुझ अद्वितीय सच्चे परमेश्वर को, और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जानें।"
— यूहन्ना 17:3
दिन 06
परमेश्वर का मेम्ना
जानें कि यीशु परमेश्वर के मेम्ने के रूप में संसार के पापों को उठाने के लिए आए।
दिन 17
अंधों को दृष्टि देने वाला
यीशु आत्मिक और शारीरिक दोनों प्रकार की दृष्टि देते हैं।
🎉 बधाई! आपने 30 दिन यीशु मसीह के साथ पूरे किए
मसीह को जानने की यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई—यह तो केवल एक नई शुरुआत है।
पिछले 30 दिनों में आपने परमेश्वर के वचन के द्वारा यीशु मसीह के जीवन, चरित्र, प्रेम, बलिदान, पुनरुत्थान और प्रतिज्ञाओं को जाना। प्रार्थना है कि यह अध्ययन केवल आपके ज्ञान को ही नहीं, बल्कि आपके विश्वास, चरित्र और प्रभु के साथ आपके व्यक्तिगत संबंध को भी गहरा करे।
याद रखें, यीशु को जानना केवल 30 दिनों का अध्ययन नहीं, बल्कि जीवन भर चलने वाली यात्रा है। प्रतिदिन परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें, प्रार्थना में बने रहें, स्थानीय कलीसिया में सहभागिता रखें, और जो आपने सीखा है उसे अपने जीवन में लागू करें।
"कि मैं उसे और उसके पुनरुत्थान की सामर्थ्य को जानूँ..."
फिलिप्पियों 3:10
🌿 आगे क्या करें?
✔ प्रतिदिन बाइबल पढ़ना जारी रखें।
✔ नियमित प्रार्थना में समय बिताएँ।
✔ अपने सीखे हुए सत्य को दूसरों के साथ साझा करें।
✔ किसी स्थानीय बाइबल-विश्वासी कलीसिया में सहभागिता करें।
✔ हमारे अन्य 30-दिवसीय अध्ययनों को भी पूरा करें।