30 DAYS • CHRIST-CENTERED STUDY

30 दिन मसीह के साथ

यीशु मसीह को और गहराई से जानने के लिए 30 दिनों की यात्रा। हर दिन एक लेख पढ़ें, मनन करें और जो सीखा उसे अपने जीवन से जोड़ें।

आपकी अध्ययन यात्रा
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DAY 01 ✓

आदि में वचन—यीशु की दिव्यता

यीशु मसीह कौन हैं और उनका अनन्त अस्तित्व क्या है?

DAY 02 ✓

मार्ग, सत्य और जीवन—एकमात्र द्वार

यीशु ही पिता तक पहुँचने का मार्ग, सत्य और जीवन हैं।

DAY 03 ✓

जगत की ज्योति—अंधकार पर विजय

मसीह की ज्योति अंधकार में चमकती है और जीवन को दिशा देती है।

DAY 04 ✓

अच्छा चरवाहा—प्रेम और सुरक्षा का बलिदान

अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है।

DAY 05 ✓

अल्फा और ओमेगा—आदि और अंत की संप्रभुता

मसीह आदि भी हैं और अंत भी—संपूर्ण इतिहास उनके अधीन है।

DAY 06

दिन 6 — जल्द उपलब्ध

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DAY 08 ✓

नम्र और मन में दीन—विश्राम देने वाला हृदय

यीशु थके और बोझ से दबे लोगों को अपने पास बुलाते हैं।

DAY 09 ✓

पापियों का मित्र—अद्भुत अनुग्रह का हाथ

यीशु पापियों के पास आए और अनुग्रह का मार्ग दिखाया।

DAY 10 ✓

करुणा से भरा हुआ—एक चंगा करने वाली छुअन

यीशु की करुणा दुखी और पीड़ित लोगों तक पहुँचती है।

DAY 11 ✓

प्रार्थनापूर्ण जीवन—पिता के साथ अटूट संबंध

यीशु के प्रार्थनापूर्ण जीवन से हम पिता के साथ संबंध सीखते हैं।

DAY 12 ✓

आज्ञाकारी पुत्र—क्रूस तक का समर्पण

मसीह की आज्ञाकारिता हमें विनम्रता और समर्पण सिखाती है।

DAY 13 ✓

महान शिक्षक—अधिकार और सामर्थ्य की वाणी

यीशु की शिक्षा केवल ज्ञान नहीं बल्कि अधिकार के साथ आती थी।

DAY 14 ✓

दुख उठाने वाला सेवक—हमारा बोझ उठाने वाला

मसीह ने हमारे दुख और पाप का भार अपने ऊपर लिया।

DAY 15 ✓

पापों की क्षमा—बंधनों से मुक्ति

मसीह में क्षमा और पाप के बंधन से मुक्ति का संदेश।

DAY 16 ✓

चंगाई देने वाला—पीड़ा का भार उठाने वाला

यशायाह की भविष्यवाणी में मसीह के दुख और चंगाई का चित्र।

DAY 17 ✓

अंधों को दृष्टि देना—एक नई पहचान और दृष्टि

यीशु केवल शारीरिक दृष्टि ही नहीं बल्कि जीवन की नई दृष्टि देते हैं।

DAY 18 ✓

क्रूस पर अंतिम शब्द—उद्धार का पूर्ण होना

क्रूस पर मसीह के अंतिम शब्दों में उद्धार की महान सच्चाई।

DAY 20 ✓

हमारा महायाजक—सहानुभूति रखने वाला मध्यस्थ

यीशु हमारे महायाजक हैं जो हमारी दुर्बलताओं को समझते हैं।

DAY 21 ✓

मध्यस्थ और वकील—स्वर्गीय न्यायालय में हमारा पक्ष

मसीह हमारे मध्यस्थ और पक्ष रखने वाले हैं।

DAY 22 ✓

मसीह में नई सृष्टि—पुराने का अंत, नए का आरंभ

मसीह में होने का अर्थ है नई सृष्टि के रूप में जीना।

DAY 23 ✓

दाखलता और डालियाँ—जुड़े रहने का रहस्य

मसीह में बने रहने से फलदायी जीवन का संबंध।

DAY 24 ✓

मसीह का मन रखना—स्वर्गीय दृष्टिकोण

मसीह की सोच और दृष्टिकोण को अपने जीवन में अपनाना।

DAY 25 ✓

मसीह के दुख में सहभागी—पीड़ा में छिपा आनंद

मसीह के दुखों में सहभागी होने और विश्वास में स्थिर रहने की बात।

DAY 26 ✓

मसीह की शांति—संसार से परे एक उपहार

मसीह की शांति परिस्थितियों से परे परमेश्वर में भरोसा सिखाती है।

DAY 27 ✓

मसीह का राजदूत—परमेश्वर का संदेशवाहक

विश्वासियों को मसीह के राजदूत के रूप में बुलाए जाने का अर्थ।

DAY 28 ✓

मसीह की देह का अंग—जुड़ाव और विशिष्टता

मसीह की देह में प्रत्येक विश्वासी की भूमिका और महत्व।

DAY 29 ✓

यीशु का दोबारा आना—महान आशा और अंतिम विजय

मसीह के पुनः आगमन की आशा और उसकी अंतिम विजय।

DAY 30 ✓

मसीह में संपूर्णता—अब कुछ भी बाकी नहीं

मसीह में हमारी पूर्णता और उसमें पाए जाने वाली पर्याप्तता।

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