30 दिन मसीह के साथ
यीशु मसीह को और गहराई से जानने के लिए 30 दिनों की यात्रा। हर दिन एक लेख पढ़ें, मनन करें और जो सीखा उसे अपने जीवन से जोड़ें।
आदि में वचन—यीशु की दिव्यता
यीशु मसीह कौन हैं और उनका अनन्त अस्तित्व क्या है?
मार्ग, सत्य और जीवन—एकमात्र द्वार
यीशु ही पिता तक पहुँचने का मार्ग, सत्य और जीवन हैं।
जगत की ज्योति—अंधकार पर विजय
मसीह की ज्योति अंधकार में चमकती है और जीवन को दिशा देती है।
अच्छा चरवाहा—प्रेम और सुरक्षा का बलिदान
अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है।
अल्फा और ओमेगा—आदि और अंत की संप्रभुता
मसीह आदि भी हैं और अंत भी—संपूर्ण इतिहास उनके अधीन है।
दिन 6 — जल्द उपलब्ध
इस दिन का अध्ययन लेख अभी उपलब्ध नहीं है।
वह जो ‘मैं हूँ’ है—अपरिवर्तनीय परमेश्वर
परमेश्वर का अस्तित्व और उसकी अपरिवर्तनीयता हमें स्थिर आशा देती है।
नम्र और मन में दीन—विश्राम देने वाला हृदय
यीशु थके और बोझ से दबे लोगों को अपने पास बुलाते हैं।
पापियों का मित्र—अद्भुत अनुग्रह का हाथ
यीशु पापियों के पास आए और अनुग्रह का मार्ग दिखाया।
करुणा से भरा हुआ—एक चंगा करने वाली छुअन
यीशु की करुणा दुखी और पीड़ित लोगों तक पहुँचती है।
प्रार्थनापूर्ण जीवन—पिता के साथ अटूट संबंध
यीशु के प्रार्थनापूर्ण जीवन से हम पिता के साथ संबंध सीखते हैं।
आज्ञाकारी पुत्र—क्रूस तक का समर्पण
मसीह की आज्ञाकारिता हमें विनम्रता और समर्पण सिखाती है।
महान शिक्षक—अधिकार और सामर्थ्य की वाणी
यीशु की शिक्षा केवल ज्ञान नहीं बल्कि अधिकार के साथ आती थी।
दुख उठाने वाला सेवक—हमारा बोझ उठाने वाला
मसीह ने हमारे दुख और पाप का भार अपने ऊपर लिया।
पापों की क्षमा—बंधनों से मुक्ति
मसीह में क्षमा और पाप के बंधन से मुक्ति का संदेश।
चंगाई देने वाला—पीड़ा का भार उठाने वाला
यशायाह की भविष्यवाणी में मसीह के दुख और चंगाई का चित्र।
अंधों को दृष्टि देना—एक नई पहचान और दृष्टि
यीशु केवल शारीरिक दृष्टि ही नहीं बल्कि जीवन की नई दृष्टि देते हैं।
क्रूस पर अंतिम शब्द—उद्धार का पूर्ण होना
क्रूस पर मसीह के अंतिम शब्दों में उद्धार की महान सच्चाई।
मृत्यु पर विजय—वह जीवित है!
यीशु का पुनरुत्थान मृत्यु पर विजय की घोषणा है।
हमारा महायाजक—सहानुभूति रखने वाला मध्यस्थ
यीशु हमारे महायाजक हैं जो हमारी दुर्बलताओं को समझते हैं।
मध्यस्थ और वकील—स्वर्गीय न्यायालय में हमारा पक्ष
मसीह हमारे मध्यस्थ और पक्ष रखने वाले हैं।
मसीह में नई सृष्टि—पुराने का अंत, नए का आरंभ
मसीह में होने का अर्थ है नई सृष्टि के रूप में जीना।
दाखलता और डालियाँ—जुड़े रहने का रहस्य
मसीह में बने रहने से फलदायी जीवन का संबंध।
मसीह का मन रखना—स्वर्गीय दृष्टिकोण
मसीह की सोच और दृष्टिकोण को अपने जीवन में अपनाना।
मसीह के दुख में सहभागी—पीड़ा में छिपा आनंद
मसीह के दुखों में सहभागी होने और विश्वास में स्थिर रहने की बात।
मसीह की शांति—संसार से परे एक उपहार
मसीह की शांति परिस्थितियों से परे परमेश्वर में भरोसा सिखाती है।
मसीह का राजदूत—परमेश्वर का संदेशवाहक
विश्वासियों को मसीह के राजदूत के रूप में बुलाए जाने का अर्थ।
मसीह की देह का अंग—जुड़ाव और विशिष्टता
मसीह की देह में प्रत्येक विश्वासी की भूमिका और महत्व।
यीशु का दोबारा आना—महान आशा और अंतिम विजय
मसीह के पुनः आगमन की आशा और उसकी अंतिम विजय।
मसीह में संपूर्णता—अब कुछ भी बाकी नहीं
मसीह में हमारी पूर्णता और उसमें पाए जाने वाली पर्याप्तता।
दूसरे शब्द से खोजकर देखें।
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