दिन 30: मसीह में संपूर्णता—अब कुछ भी बाकी नहीं Complete in Christ
आज, जब हम इस यात्रा का समापन कर रहे हैं, तो हम उस सत्य पर…
दिन 29: यीशु का दोबारा आना—महान आशा और अंतिम विजय
हमने यीशु के जन्म, उनके स्वभाव, उनके क्रूस के कार्य और कलीसिया में हमारी पहचान…
दिन 28: मसीह की देह का अंग—जुड़ाव और विशिष्टता
परमेश्वर ने हमें एक ऐसे जीवंत समूह का हिस्सा बनाया है जहाँ हर व्यक्ति की…
दिन 27: मसीह का राजदूत—परमेश्वर का संदेशवाहक
आज हम अपनी बुलाहट (Calling) के बारे में बात करेंगे। जब हम मसीह में नई…
दिन 26: मसीह की शांति—संसार से परे एक उपहार
कल हमने ‘मसीह के दुखों में सहभागिता’ जैसे कठिन लेकिन गहरे विषय पर बात की…
दिन 25: मसीह के दुख में सहभागी—पीड़ा में छिपा आनंद
कल हमने ‘मसीह का मन रखने’ के अद्भुत विशेषाधिकार के बारे में सीखा। आज हम…