प्रायश्चित का दिन (Yom Kippur): अर्थ, पुराने नियम का विधान और मसीही पूर्णता – 07 | Day of Atonement

प्रायश्चित का दिन का अर्थ क्या है? | Meaning of the Day of Atonement

इस्राइलियों के बीच ‘प्रायश्चित का दिन’ (Day of Atonement) को वर्ष का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इसे इब्रानी भाषा में ‘योम किप्पुर’ कहते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘ढकना’ या ‘क्षमा करना’। यह महापर्व साल में केवल एक बार, यहूदी कैलेंडर के सातवें महीने (तिशरी) के दसवें दिन मनाया जाता था, और यह इस्राएल राष्ट्र के लिए उनके सामूहिक और व्यक्तिगत पापों के लिए परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने का सर्वोच्च और एकमात्र वार्षिक अवसर था।

यह दिन इस्राइल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि यही वह एकमात्र अवसर होता था जब महायाजक को महापाप क्षमा की विशेष व्यवस्था को पूरा करने के लिए ‘महापवित्र स्थान’ (Holy of Holies) में, यानी वाचा के संदूक (Ark of the Covenant) के सामने प्रवेश करने की अनुमति मिलती थी। इस दिन, जो कि पूर्ण उपवास, नम्रता और आत्म-परीक्षा का दिन होता था, संपूर्ण इस्राइल समुदाय येरूशलेम में एकत्रित होता था और परमेश्वर के सम्मुख अपने पापों के प्रायश्चित हेतु विस्तृत रीति से बलिदान चढ़ाता था।

पुराने नियम का विधान: विस्तृत अनुष्ठान

‘प्रायश्चित का दिन’ के अनुष्ठान का विस्तृत वर्णन लैव्यव्यवस्था (Leviticus) के 16वें अध्याय में दिया गया है, और यह विशेष रूप से महायाजक हारून और उसके वंशजों द्वारा ही संपादित किया जाता था। यह प्रक्रिया परमेश्वर की पवित्रता और पाप की गंभीरता को दर्शाती थी।

  1. महायाजक की तैयारी: अनुष्ठान से पहले, महायाजक को अपने व्यक्तिगत पापों के लिए एक बछड़े का होमबलि चढ़ाना होता था। इसके बाद वह अपने अलंकृत वस्त्रों को उतारकर साधारण, पवित्र मलमल के वस्त्र पहनता था, जो उसकी नम्रता और सेवा की भावना को दर्शाता था।
  2. दो बकरों का चुनाव: पूरे समुदाय के पापों के लिए दो बकरे चुने जाते थे। उनके लिए चिट्ठी डाली जाती थी: एक ‘यहोवा के लिए’ और दूसरा ‘अज़ाज़ेल के लिए’ (scapegoat या बलि का बकरा)।
  3. पापबलि (बकरे का बलिदान): जिस बकरे पर ‘यहोवा के लिए’ चिट्ठी निकलती थी, उसे समुदाय के पापों के लिए पापबलि के रूप में बलिदान किया जाता था। महायाजक इस बकरे का लहू लेकर, धूप की आड़ में, महापवित्र स्थान में प्रवेश करता था और उसे वाचा के संदूक के प्रायश्चित आवरण (Mercy Seat) पर छिड़कता था। यह लहू इस्राएलियों के पापों को ढकने (क्षमा करने) का प्रतीक था।
  4. बलि का बकरा (Scapegoat): जिस दूसरे बकरे पर ‘अज़ाज़ेल के लिए’ चिट्ठी निकलती थी, उस पर महायाजक इस्राएलियों के सारे पापों को प्रतीकात्मक रूप से अपने हाथ रखकर स्वीकार करता था। इसके बाद, इस जीवित बकरे को एक निश्चित व्यक्ति द्वारा जंगल में, आबादी से दूर, उजाड़ स्थान पर छोड़ दिया जाता था। यह अनुष्ठान इस बात का प्रतीक था कि परमेश्वर ने उनके पापों को उनसे दूर कर दिया है और अब वे याद नहीं किए जाएंगे।

‘प्रायश्चित का दिन’ का यह विधान अस्थायी था। यह हर साल दोहराया जाता था, जो यह सिद्ध करता था कि पशुओं का लहू पापों को स्थायी रूप से दूर नहीं कर सकता था। यह केवल एक छाया और आने वाले पूर्ण बलिदान—मसीह यीशु—का पूर्वदर्शन था।

Day of Atonement Yom Kippur प्रायश्चित का दिन

पुराने नियम में ‘प्रायश्चित का दिन’ का महत्व – गहन अध्ययन

महाप्रायश्चित का दिन (योम किप्पुर) – परमेश्वर की ओर से पवित्र भेंट

मुख्य बाइबल वचन: लैव्यव्यवस्था 23:27-28; लैव्यव्यवस्था 16

संदर्भ और महत्व

‘प्रायश्चित का दिन’ (योम किप्पुर) इस्राएलियों के लिए परमेश्वर द्वारा निर्धारित सात वार्षिक पर्वों में सबसे पवित्र और गंभीर दिन था। यह केवल एक दिन का पर्व था, जो सातवें महीने (तिशरेय) के दसवें दिन मनाया जाता था। परमेश्वर ने इस दिन को एक “परम पवित्र विश्राम” (Sabbath of Sabbaths) घोषित किया था, 

जिस दिन इस्राएल के सभी लोगों को अपनी आत्माओं को दुःख देना होता था (उपवास रखना) और किसी भी प्रकार का काम नहीं करना होता था। इस दिन का मुख्य उद्देश्य पूरे राष्ट्र के पापों के लिए प्रायश्चित करना और परमेश्वर के साथ उनके संबंध को बहाल करना था। यह वार्षिक शुद्धिकरण का दिन था जो यह सुनिश्चित करता था कि परमेश्वर अपनी पवित्र उपस्थिति को तम्बू (मिलाप वाले तम्बू) में बनाए रखें।

‘प्रायश्चित का दिन’ की विस्तृत विधि

परमेश्वर ने अपने वचन में इस पर्व को मनाने की विधि बहुत ही बारीकी से बताई थी। लैव्यव्यवस्था 16 में इस दिन की प्रक्रियाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसका निष्पादन केवल महायाजक को ही करना होता था:

  1. महायाजक की आत्मिक और शारीरिक तैयारी:
    • वस्त्र परिवर्तन: हारून (या उस समय के महायाजक) को अपने प्रतिदिन के सोने से जड़े हुए और अलंकृत याजकीय वस्त्र उतारकर स्वयं को धोना होता था। यह शुद्धिकरण उसकी पवित्र सेवा के लिए अनिवार्य था।
    • पवित्र वस्त्र धारण: तत्पश्चात, वह उन विशेष सादे, सफेद सन के पवित्र वस्त्रों को धारण करता था जो केवल महापवित्र स्थान (Holy of Holies) में सेवा हेतु निर्धारित थे (लैव्यव्यवस्था 16:4; निर्गमन 28; 39)। इन सादे वस्त्रों ने परमेश्वर के सम्मुख महायाजक की नम्रता और पवित्रता पर बल दिया, न कि उसके पद के गौरव पर।
  2. महापवित्र स्थान में प्रवेश से पूर्व का अनुष्ठान:
    • धुएँ का बादल (अधिकार का आवरण): महापवित्र स्थान में प्रवेश करने से पहले, हारून को धूप (लोबान) जलाकर सुगंधित धुएँ का एक बादल बनाना होता था। वह उस वेदी पर से जलते हुए कोयले लेकर, धूप के महीन चूर्ण को उन पर रखकर महापवित्र स्थान में प्रवेश करता था।
    • उद्देश्य: यह धूप का बादल ‘प्रायश्चित के ढकने’ (Mercy Seat) के ऊपर एक पर्दे के समान कार्य करता था। यह महायाजक के लिए परमेश्वर की तेजमय उपस्थिति (Shekinah Glory) से एक सुरक्षा थी, ताकि वह परमेश्वर की पवित्रता के सामने जीवित रह सके (लैव्यव्यवस्था 16:13)।
  3. स्वयं के लिए प्रायश्चित:
    • सबसे पहले, महायाजक को अपने और अपने परिवार के पापों के लिए प्रायश्चित करना होता था। इसके लिए वह एक बैल को पाप-बलि के रूप में बलिदान करता था।
    • वह बैल के लहू को लेकर महापवित्र स्थान में प्रवेश करता और ‘प्रायश्चित के ढकने’ पर अपनी उंगली से एक बार और उसके सामने सात बार छिड़कना होता था (लैव्यव्यवस्था 16:14)। यह महायाजक को उस स्थान में सेवा करने के लिए शुद्ध करता था।
  4. राष्ट्र के पापों के लिए दो बकरों का रहस्य (अज़ाज़ेल):
    • महायाजक इस्राएल की मण्डली की ओर से दो बकरों को पाप-बलि के रूप में भेंट करता था।
    • चिट्ठी डालना: हारून दो बकरों पर चिट्ठी डालता था: एक चिट्ठी “यहोवा के लिए” और दूसरी चिट्ठी “अज़ाज़ेल के लिए” (लैव्यव्यवस्था 16:8)।
    • यहोवा के लिए बकरा (पाप-बलि): जिस बकरे पर “यहोवा के लिए” चिट्ठी निकलती थी, उसे पाप-बलि के रूप में बलिदान किया जाता था।
      • लहू का छिड़काव: इस बकरे के लहू को महायाजक महापवित्र स्थान में ले जाकर ‘प्रायश्चित के ढकने’ पर सात बार छिड़कना होता था (पद 15)। इस बलिदान और लहू के छिड़काव के द्वारा, परमेश्वर इस्राएलियों के पापों को क्षमा करते थे और उनकी पवित्र उपस्थिति को बनाए रखते थे।
  5. पाप का वहन करने वाला बकरा (अज़ाज़ेल):
    • पापों का अंगीकार: दूसरे बकरे को जीवित रखा जाता था। हारून अपने दोनों हाथों को उस जीवित बकरे के सिर पर रखता था और इस्राएल के सारे पापों, अपराधों और अन्यायों को अंगीकार करता था। इस प्रकार, वह प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्र के सभी पापों को उस बकरे पर डाल देता था।
    • निर्जन स्थान में विसर्जन: इस जीवित बकरे को, जिसे ‘अज़ाज़ेल’ (भटकने के लिए छोड़ा जाने वाला बकरा) कहा जाता था, एक नियुक्त व्यक्ति के द्वारा निर्जन स्थान (जंगल) में ले जाकर छोड़ दिया जाता था (लैव्यव्यवस्था 16:21-22)।
    • प्रतीकवाद: यह कार्य इस बात का शक्तिशाली प्रतीक था कि पाप अब इस्राएल की छावनी और सीमा से दूर चले गए हैं और वे कभी वापस नहीं आएंगे। यह पापों के पूर्ण रूप से हटाए जाने और क्षमा किए जाने का दृश्य प्रमाण था।

आधुनिक प्रासंगिकता

मसीही धर्मशास्त्र में, ‘प्रायश्चित का दिन’ और इसकी संपूर्ण विधि, विशेषकर दो बकरों का रहस्य, यीशु मसीह के कार्य की एक भविष्यवाणी के रूप में देखा जाता है।

  • यीशु “यहोवा के लिए बकरा” थे, जिन्होंने हमारे पापों के लिए बलिदान दिया और अपना लहू बहाया (इब्रानियों 9:12)।
  • यीशु “अज़ाज़ेल बकरा” भी थे, जिन्होंने क्रूस पर हमारे सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और उन्हें हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया (यशायाह 53:6; 2 कुरिंथियों 5:21)। मसीह के लहू के द्वारा हमें एक बार और हमेशा के लिए पूर्ण प्रायश्चित मिला है (इब्रानियों 10:10, 12)।

मसीहियों के लिए ‘प्रायश्चित का दिन’ (Yom Kippur) का गहन महत्व

प्रायश्चित का दिन (Yom Kippur) एक वार्षिक यहूदी पर्व था, जो परमेश्वर द्वारा ठहराया गया था, और मसीही विश्वासियों के लिए इसका अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। यह केवल एक ऐतिहासिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रभु यीशु मसीह के सिद्ध और अंतिम बलिदान की भविष्यवाणी और नींव था। 

इब्रानियों की पुस्तक का लेखक स्पष्ट रूप से बताता है कि पुराने नियम के अंतर्गत किए गए सभी बलिदान और महायाजकीय सेवाएँ आने वाले ‘सिद्ध बलिदान’ (अर्थात, यीशु मसीह) की केवल एक अस्थाई ‘परछाईं’ (Shadow) थीं, जबकि मसीह स्वयं वह ‘मूल पदार्थ’ (Substance) हैं (इब्रानियों 10:1)।

Day of Atonement Yom Kippur प्रायश्चित का दिन

1. सिद्ध महायाजक और उनका अद्वितीय प्रवेश

पुराने नियम की व्यवस्था में, महायाजक (जैसे हारून और उनके वंशज) एक वर्ष में केवल एक बार, प्रायश्चित के दिन, अति पवित्र स्थान (Holy of Holies) में प्रवेश करते थे।

  • पुराने नियम की अपूर्णता: महायाजक (हारून) को पहले स्वयं के पापों के लिए एक बछड़े का बलिदान चढ़ाना पड़ता था, क्योंकि वह स्वयं पाप की अधीनता में था और अपूर्ण था। उसका लहू स्वर्गीय स्थान में प्रवेश करने के योग्य नहीं था। उसे बार-बार बलिदान देना पड़ता था।
  • यीशु मसीह की पूर्णता: हमारा प्रभु यीशु मसीह, परमेश्वर का पुत्र होने के कारण, पूर्णतः निष्पाप, पवित्र और धर्मी हैं। उन्हें स्वयं के लिए किसी भी बलिदान की आवश्यकता नहीं थी। वह सिद्ध महायाजक (High Priest) हैं, जो मेलखीसेदेक की रीति के अनुसार हैं (इब्रानियों 7:11)।
  • एक ही बार का प्रवेश: यीशु ने पशुओं के लहू के द्वारा नहीं, बल्कि अपने स्वयं के अमूल्य लहू के द्वारा, इस सांसारिक तंबू में नहीं, बल्कि सीधे स्वर्गीय महापवित्र स्थान में (जो ‘हाथों का बनाया हुआ नहीं’ है) प्रवेश किया। उन्होंने यह प्रवेश केवल एक ही बार किया, और यह सदा सर्वदा के लिए है, जिसने एक अनन्त छुटकारा (Eternal Redemption) प्राप्त किया (इब्रानियों 8:1-2; 9:11-14; 10:11-22)।

2. पापों को ढांकना (Atonement) बनाम पापों को जड़ से दूर करना (Propitiation/Remission)

प्रायश्चित के दिन का पर्व यहूदी लोगों के पापों का निवारण करता था, लेकिन इसकी शक्ति सीमित थी।

  • ढांकने का कार्य (Covering of Sin): पुराने नियम में चढ़ाए गए पशु बलिदान (भेड़, बकरा) पापों को केवल एक वर्ष के लिए ‘ढांकते’ (Cover – कपार शब्द का अर्थ) थे। यह एक अस्थायी उपाय था। लहू परमेश्वर के क्रोध को शांत करता था, लेकिन पाप की प्रकृति को नहीं बदलता था। यही कारण था कि हर अगले वर्ष प्रायश्चित के दिन पुनः बलिदान की आवश्यकता होती थी, जो बलिदान की अपूर्णता को दर्शाता था।
  • दूर करने का कार्य (Taking Away of Sin): प्रभु यीशु मसीह ने एक ही बार क्रूस पर अपना बलिदान दिया। उनके बलिदान ने हमारे पापों को केवल ढांका नहीं, बल्कि उन्हें जड़ से दूर कर दिया और हटा दिया। उन्होंने परमेश्वर के धार्मिक क्रोध को पूरी तरह से शांत किया (Propitiation)। पवित्रशास्त्र कहता है, “उसने हमारे पापों को धो डाला” (प्रकाशितवाक्य 1:5), और “परमेश्वर का मेम्ना जो जगत के पाप उठा ले जाता है” (यूहन्ना 1:29)। इस बलिदान के द्वारा हम अनन्तकाल के लिए धर्मी ठहराए गए हैं (रोमियों 3:23-25; 2 कुरिन्थियों 5:21)।

3. सशर्त सहनशीलता से पूर्ण और अंतिम क्षमा तक

पुराने नियम के बलिदान परमेश्वर की सहनशीलता को दर्शाते थे, जिसके कारण पापियों को तुरंत न्याय का सामना नहीं करना पड़ा।

  • सहनशीलता (Forbearance): पुराने नियम के युग में, परमेश्वर ने लोगों के पापों को यीशु मसीह के भावी बलिदान के आधार पर ‘सहन’ किया (Rom. 3:25)। यह सहनशीलता सशर्त और अस्थायी थी।
  • पूर्ण क्षमा (Complete Forgiveness): यीशु मसीह का बलिदान हमें पापों की पूर्ण और अपरिवर्तनीय क्षमा प्रदान करता है। यह क्षमा हमारे भूतकाल, वर्तमान और भविष्य के सभी पापों से मुक्ति देती है। यह एक सिद्ध और अंतिम पूरक बलिदान है, जिसके बाद किसी अन्य बलिदान की आवश्यकता नहीं है। जो मसीह में है, उसके लिए अब कोई भी दण्ड की आज्ञा नहीं है (रोमियों 8:1)। उनका लहू हमें हर एक पाप से शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)।

4. महिमावान शरीर (Glorified Body) और मसीह का द्वितीय आगमन

जिस प्रकार ‘प्रायश्चित का दिन’ इस्राएल के लोगों को अपने पापों की अस्थायी मुक्ति और परमेश्वर की ओर से सफाई का बेसब्री से इंतज़ार रहता था, उसी प्रकार हम मसीही भी मसीह के बलिदान के अंतिम और पूर्ण प्रभाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं—जिसे ‘शारीरिक मुक्ति’ या ‘पुनरुत्थान’ कहा जाता है।

  • आत्मिक मुक्ति बनाम शारीरिक अपूर्णता: यद्यपि हम प्रभु यीशु मसीह के बलिदान के द्वारा आत्मिक रूप से बचा लिए गए हैं और हमें एक नया जन्म मिला है, फिर भी शारीरिक रूप से हम अभी भी इस नाशवान संसार में, बीमारी, दुःख और मृत्यु की अधीनता में हैं।
  • अंतिम आशा: हमारी महान आशा प्रभु यीशु मसीह के द्वितीय आगमन में निहित है। उस समय, उनके बलिदान का कार्य पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। हमारा वर्तमान “विनम्र शरीर” (Body of Humiliation) पाप और मृत्यु से मुक्त होकर, उनके महिमावान शरीर के समान बदल जाएगा। यह उद्धार का अंतिम चरण है, जिसे ‘अंगीकरण’ (Adoption) भी कहा जाता है—जो हमारे शरीर का छुटकारा है (रोमियों 8:18-25; 1 कुरिन्थियों 15:42-57; फिलिप्पियों 3:20-21)। हम उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब मसीह अपने ‘स्वर्गीय अति पवित्र स्थान’ से बाहर निकलकर, हमारे उद्धार को पूरा करेंगे।

संक्षेप में, ‘प्रायश्चित का दिन’ मसीहियों को यह सिखाता है कि उद्धार मनुष्य के कर्मों से नहीं, बल्कि परमेश्वर के सिद्ध बलिदान के द्वारा ही संभव है, जिसे प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस पर एक ही बार में पूरा किया।

निष्कर्ष

परमेश्वर की सिद्ध प्रायश्चित योजना: पुराने नियम की छाया से मसीह की वास्तविकता तक

परमेश्वर, जो प्रेम और न्याय में अनंत हैं, ने अनादि काल से अपनी दिव्य और अपरिवर्तनीय योजना के तहत मनुष्य जाति के लिए उद्धार का एक सिद्ध मार्ग तैयार किया था। इस योजना का केंद्रबिंदु एक ऐसा प्रायश्चित था, जो मानव के पापों के दंड को पूरी तरह से चुका सके और उसे परमेश्वर के साथ खोए हुए मेल-मिलाप को पुनः स्थापित कर सके।

पुराने नियम का ‘प्रायश्चित का दिन’ (योम किप्पुर) केवल एक भविष्यवाणी की छाया थी। यह वार्षिक रीति एक सांकेतिक कार्य थी जो भविष्य में आने वाली महान वास्तविकता की ओर इशारा करती थी। महायाजक द्वारा बलि किए गए पशुओं का लहू, जो वर्ष में एक बार परम पवित्र स्थान में छिड़का जाता था, पापों को केवल ‘ढँकता’ था, लेकिन उन्हें जड़ से समाप्त नहीं कर सकता था। ये बलिदान एक अस्थायी उपाय थे, जो लगातार दोहराए जाने की आवश्यकता रखते थे, जो यह दर्शाता था कि वे पूर्णतः प्रभावी नहीं थे। वे लोगों को यह सिखाने के लिए थे कि पाप का दंड मृत्यु है और परमेश्वर के पास जाने के लिए लहू बहाना अनिवार्य है।

यीशु मसीह में वह वास्तविकता प्रकट हुई। मसीह का बलिदान पुराने नियम के सभी बलिदानों से अनगिनत गुना उत्तम और श्रेष्ठ है। वह न केवल एक निर्दोष बलि का पशु थे, बल्कि वे स्वयं महायाजक भी थे, जिन्होंने अपने ही लहू को परमेश्वर के सामने एक बार और हमेशा के लिए पेश किया।

  • उत्तम बलिदान: पुराने नियम के पशुओं की बलि की तुलना में, यीशु मसीह ने अपना जीवन बलिदान किया, जो कि एक अनंत और सिद्ध व्यक्ति का बलिदान था। यह बलिदान किसी अपूर्ण या क्षणिक वस्तु का नहीं था, बल्कि परमेश्वर के पुत्र का था, इसलिए इसका मूल्य और प्रभाव भी अनंत था।
  • उत्तम स्थान: यीशु मसीह ने पृथ्वी पर बने मंदिर के हाथों से बनाए गए परम पवित्र स्थान में प्रवेश नहीं किया, जो केवल एक प्रतीक था, बल्कि वे सीधे स्वर्ग में, परमेश्वर के वास्तविक और स्वर्गीय निवास में प्रवेश कर गए।
  • एक ही बार का बलिदान: जहाँ पुराने नियम के बलिदान हर वर्ष दोहराए जाते थे, वहीं यीशु मसीह ने कलवरी के क्रूस पर स्वयं को हमारे लिए प्रायश्चित के रूप में एक ही बार अर्पित कर दिया। इस ‘एक ही बार’ के बलिदान ने पाप की समस्या को स्थायी और अंतिम रूप से हल कर दिया।

अंतिम परिणाम: परमेश्वर के साथ स्थायी मेल-मिलाप। मसीह का बलिदान केवल हमारे पापों की क्षमा प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि यह वह पुल है जो हमें परमेश्वर के पास वापस ले जाता है। उन्होंने हमारे और परमेश्वर के बीच की शत्रुता को अपने शरीर में समाप्त कर दिया, हमें धर्मी ठहराया, और हमें परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनाया। इस प्रायश्चित के माध्यम से, हम अब डर या दूरी में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और निर्भीकता के साथ, परमेश्वर के साथ एक अटूट और सदा के लिए कायम रहने वाला मेल-मिलाप स्थापित कर सकते हैं। यह सिद्ध प्रायश्चित सिद्ध परमेश्वर की सिद्ध योजना का प्रमाण है।


प्रायश्चित का दिन पर पूछे जाने वाले सवाल  FAQs

Resources :

the Bible Project

Got Questions – What is the Day of Atonement

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top