दिन 20: बीज और भूमि—एक फलवंत हृदय का रहस्य

आज हम इस सप्ताह का समापन एक बहुत ही महत्वपूर्ण दृष्टांत के साथ करेंगे—बीज और भूमि। यह वचन हमें बताता है कि वचन की सामर्थ्य के साथ-साथ हमारे ‘हृदय की स्थिति’ भी कितनी महत्वपूर्ण है। यीशु ने ‘बोने वाले के दृष्टांत’ की व्याख्या करते हुए उस भूमि (हृदय) के बारे में बताया जो वास्तव में […]
दिन 19: कांपने वाला हृदय—आदर और विनम्रता का महत्व

आज हम एक ऐसे गुण पर विचार करेंगे जो यह निर्धारित करता है कि परमेश्वर किसके जीवन में अपना निवास स्थान बनाएगा—वह है वचन का भय और आदर करना। परमेश्वर ब्रह्मांड का स्वामी है, फिर भी वह एक विशेष प्रकार के व्यक्ति की ओर अपनी दृष्टि लगाता है। यशायाह भविष्यद्वक्ता के माध्यम से परमेश्वर अपने […]
दिन 18: प्यास और लालसा—एक भूखे हृदय की पुकार

आज हम उस ‘हृदय की स्थिति’ के बारे में बात करेंगे जो एक विश्वासी को परमेश्वर के रहस्यों की गहराई में ले जाती है—वह है आत्मिक प्यास। जब हम वचन की मिठास को चख लेते हैं, तो हमारे भीतर और अधिक पाने की एक पवित्र व्याकुलता पैदा होती है। भजनकार ने परमेश्वर के वचन के […]
दिन 17: वचन में बने रहना—सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग

आज हम उस ‘निरंतरता’ (Consistency) की बात करेंगे जो एक साधारण विश्वासी को यीशु के सच्चे ‘चेले’ में बदल देती है। मसीही जीवन केवल एक बार का अनुभव नहीं है, बल्कि यह हर पल मसीह के वचनों के साथ एक गहरे संबंध में बने रहना है। जब यीशु उन यहूदियों से बात कर रहे थे […]
दिन 16: हृदय में संचय—पाप के विरुद्ध सबसे सुरक्षित ढाल

आज हम उस गुप्त स्थान के बारे में बात करेंगे जहाँ से आज्ञाकारिता का जन्म होता है—हमारा हृदय। वचन को केवल दिमाग में रखना या कागजों पर लिखना काफी नहीं है; इसे अपने हृदय की गहराई में सुरक्षित रखना आत्मिक विजय की सबसे बड़ी कुंजी है। भजनकार ने पाप पर जय पाने और परमेश्वर के […]
दिन 15: सुनने वाले नहीं, करने वाले—क्रियान्वित विश्वास

अब हम इस पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि हमें इस वचन के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज का विषय मसीही जीवन की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी आशीष के बारे में है—वचन को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारना। प्रभु यीशु के भाई याकूब, जो अपने व्यवहारिक उपदेशों के लिए जाने जाते हैं, विश्वासियों […]
दिन 14: बुद्धि का भंडार—साधारण को समझ देने वाला प्रकाश

आज हम इस सप्ताह का समापन एक बहुत ही सुंदर सत्य के साथ करेंगे—कि कैसे परमेश्वर का वचन हमें वह बुद्धि देता है जो स्कूल या कॉलेजों की डिग्रियों से कहीं बढ़कर है। संसार में बुद्धि को अक्सर बौद्धिक स्तर (IQ) से मापा जाता है, लेकिन बाइबल कहती है कि आत्मिक बुद्धि का द्वार हर […]
दिन 13: सफलता का रहस्य—मनन की सामर्थ्य

आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे पूरी दुनिया खोज रही है—सफलता। संसार सफलता को कड़ी मेहनत, भाग्य या संपर्कों के माध्यम से प्राप्त करने की कोशिश करता है, लेकिन बाइबल हमें एक ऐसा ‘सफलता का सूत्र’ (Formula for Success) देती है जो कभी विफल नहीं होता। जब मूसा की मृत्यु के बाद […]
दिन 12: चंगाई और छुटकारा—पुनर्स्थापना की सामर्थ्य

आज हम वचन के एक बहुत ही सुखद और कोमल पक्ष को देखेंगे—उसकी चंगा करने वाली सामर्थ्य। अक्सर हम चंगाई के लिए किसी व्यक्ति या विशेष प्रार्थना की खोज करते हैं, लेकिन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने चंगाई का सबसे शक्तिशाली माध्यम पहले ही हमें दे दिया है: उसका वचन। भजनकार उन लोगों […]
दिन 11: आत्मा की तलवार—अंधकार की शक्तियों पर विजय

आज हम देखेंगे कि यह विश्वास और वचन मिलकर हमारे जीवन में एक हथियार का काम कैसे करते हैं। मसीही जीवन केवल एक शांतिपूर्ण यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक युद्ध भी है। इस युद्ध में परमेश्वर ने हमें असुरक्षित नहीं छोड़ा है। प्रेरित पौलुस इफिसुस की कलीसिया को ‘परमेश्वर के सारे हथियार’ बाँधने […]