दिन 20: बीज और भूमि—एक फलवंत हृदय का रहस्य

Day 20 बीज और भूमि लूका 8:15 Luke 8:15 The Seed and the Soil

आज हम इस सप्ताह का समापन एक बहुत ही महत्वपूर्ण दृष्टांत के साथ करेंगे—बीज और भूमि। यह वचन हमें बताता है कि वचन की सामर्थ्य के साथ-साथ हमारे ‘हृदय की स्थिति’ भी कितनी महत्वपूर्ण है। यीशु ने ‘बोने वाले के दृष्टांत’ की व्याख्या करते हुए उस भूमि (हृदय) के बारे में बताया जो वास्तव में […]

दिन 19: कांपने वाला हृदय—आदर और विनम्रता का महत्व

Day 19 कांपने वाला हृदय यशायाह 66:2 Isaiah 66:2 Trembling at God's Word

आज हम एक ऐसे गुण पर विचार करेंगे जो यह निर्धारित करता है कि परमेश्वर किसके जीवन में अपना निवास स्थान बनाएगा—वह है वचन का भय और आदर करना। परमेश्वर ब्रह्मांड का स्वामी है, फिर भी वह एक विशेष प्रकार के व्यक्ति की ओर अपनी दृष्टि लगाता है। यशायाह भविष्यद्वक्ता के माध्यम से परमेश्वर अपने […]

दिन 18: प्यास और लालसा—एक भूखे हृदय की पुकार

प्यास और लालसा भजन संहिता 119:131 Thirst and Longing for God's Word Psalm 119:131

आज हम उस ‘हृदय की स्थिति’ के बारे में बात करेंगे जो एक विश्वासी को परमेश्वर के रहस्यों की गहराई में ले जाती है—वह है आत्मिक प्यास। जब हम वचन की मिठास को चख लेते हैं, तो हमारे भीतर और अधिक पाने की एक पवित्र व्याकुलता पैदा होती है। भजनकार ने परमेश्वर के वचन के […]

दिन 17: वचन में बने रहना—सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग

वचन में बने रहनावचन में बने रहना यूहन्ना 8:31-32 Abiding in the Word John 8:31-32

आज हम उस ‘निरंतरता’ (Consistency) की बात करेंगे जो एक साधारण विश्वासी को यीशु के सच्चे ‘चेले’ में बदल देती है। मसीही जीवन केवल एक बार का अनुभव नहीं है, बल्कि यह हर पल मसीह के वचनों के साथ एक गहरे संबंध में बने रहना है। जब यीशु उन यहूदियों से बात कर रहे थे […]

दिन 16: हृदय में संचय—पाप के विरुद्ध सबसे सुरक्षित ढाल

हृदय में संचय भजन संहिता 119:11 Storing the Word in the Heart Psalm 119:11

आज हम उस गुप्त स्थान के बारे में बात करेंगे जहाँ से आज्ञाकारिता का जन्म होता है—हमारा हृदय। वचन को केवल दिमाग में रखना या कागजों पर लिखना काफी नहीं है; इसे अपने हृदय की गहराई में सुरक्षित रखना आत्मिक विजय की सबसे बड़ी कुंजी है। भजनकार ने पाप पर जय पाने और परमेश्वर के […]

दिन 15: सुनने वाले नहीं, करने वाले—क्रियान्वित विश्वास

सुनने वाले नहीं करने वाले James 1:22 Doers of the Word

अब हम इस पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि हमें इस वचन के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज का विषय मसीही जीवन की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी आशीष के बारे में है—वचन को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारना। प्रभु यीशु के भाई याकूब, जो अपने व्यवहारिक उपदेशों के लिए जाने जाते हैं, विश्वासियों […]

दिन 14: बुद्धि का भंडार—साधारण को समझ देने वाला प्रकाश

Storehouse of Wisdom Psalm 119:130 बुद्धि का भंडार

आज हम इस सप्ताह का समापन एक बहुत ही सुंदर सत्य के साथ करेंगे—कि कैसे परमेश्वर का वचन हमें वह बुद्धि देता है जो स्कूल या कॉलेजों की डिग्रियों से कहीं बढ़कर है। संसार में बुद्धि को अक्सर बौद्धिक स्तर (IQ) से मापा जाता है, लेकिन बाइबल कहती है कि आत्मिक बुद्धि का द्वार हर […]

दिन 13: सफलता का रहस्य—मनन की सामर्थ्य

Joshua 1:8 Secret of Success

आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसे पूरी दुनिया खोज रही है—सफलता। संसार सफलता को कड़ी मेहनत, भाग्य या संपर्कों के माध्यम से प्राप्त करने की कोशिश करता है, लेकिन बाइबल हमें एक ऐसा ‘सफलता का सूत्र’ (Formula for Success) देती है जो कभी विफल नहीं होता। जब मूसा की मृत्यु के बाद […]

दिन 12: चंगाई और छुटकारा—पुनर्स्थापना की सामर्थ्य

Psalm 107:20 Healing and Deliverance a

आज हम वचन के एक बहुत ही सुखद और कोमल पक्ष को देखेंगे—उसकी चंगा करने वाली सामर्थ्य। अक्सर हम चंगाई के लिए किसी व्यक्ति या विशेष प्रार्थना की खोज करते हैं, लेकिन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने चंगाई का सबसे शक्तिशाली माध्यम पहले ही हमें दे दिया है: उसका वचन। भजनकार उन लोगों […]

दिन 11: आत्मा की तलवार—अंधकार की शक्तियों पर विजय

इफिसियों 6:17 आत्मा की तलवार

आज हम देखेंगे कि यह विश्वास और वचन मिलकर हमारे जीवन में एक हथियार का काम कैसे करते हैं। मसीही जीवन केवल एक शांतिपूर्ण यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक युद्ध भी है। इस युद्ध में परमेश्वर ने हमें असुरक्षित नहीं छोड़ा है। प्रेरित पौलुस इफिसुस की कलीसिया को ‘परमेश्वर के सारे हथियार’ बाँधने […]