आज हम एक बहुत ही गंभीर और महत्वपूर्ण विषय पर विचार करेंगे—वचन की न्याय करने वाली सामर्थ्य।
अक्सर हम बाइबल को केवल एक मार्गदर्शक या सांत्वना देने वाली पुस्तक के रूप में देखते हैं, लेकिन यीशु ने स्पष्ट किया कि यही वचन अंत के दिनों में ‘न्याय का मापदंड’ भी होगा।
यीशु ने अपने प्रचार के दौरान उन लोगों को चेतावनी दी जो उनके वचनों को अनसुना कर रहे थे:
“जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता, उसको दोषी ठहराने वाला एक है; अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा।” (यूहन्ना 12:48)
1. “जो वचन मैं ने कहा है” (The Word Spoken)
परमेश्वर ने मनुष्य को अंधकार में नहीं छोड़ा है। उसने अपने वचनों के द्वारा स्पष्ट रूप से अपनी इच्छा, अपने प्रेम और पाप के परिणामों को प्रकट किया है।
- स्पष्टता: न्याय के दिन कोई यह नहीं कह पाएगा कि “मुझे पता नहीं था।” वचन ने हर एक को चेतावनी और निमंत्रण दोनों दिए हैं।
- स्थायी रिकॉर्ड: आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, लेकिन यीशु के कहे हुए शब्द कभी नहीं बदलेंगे। वे न्याय के दिन वैसे ही होंगे जैसे आज हैं।
2. “अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा” (Will Judge Him on the Last Day)
यहाँ यीशु यह समझा रहे हैं कि वे स्वयं किसी को दोषी ठहराने नहीं आए (यूहन्ना 3:17), बल्कि उनका सत्य ही न्याय का आधार होगा।
- न्याय का मापदंड: जैसे एक फुट-पट्टी (Ruler) यह तय करती है कि कोई चीज़ सीधी है या टेढ़ी, वैसे ही वचन यह तय करेगा कि हमारा जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार था या नहीं।
- उत्तरदायित्व: हमें उस प्रकाश के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा जो हमें मिला है। जितना अधिक हम वचन को जानते हैं, हमारी जिम्मेदारी उतनी ही बढ़ जाती है।
3. तुच्छ जानने का परिणाम
वचन को ‘तुच्छ जानने’ का अर्थ केवल उसका अपमान करना नहीं है, बल्कि उसे ‘नगण्य’ समझना या उस पर ध्यान न देना भी है।
- ग्रहण न करना: यदि हम वचन को सुनते हैं लेकिन उसे अपने जीवन में जगह नहीं देते, तो हम अनजाने में अपने लिए न्याय का आधार तैयार कर रहे होते हैं।
4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?
- आज ही सुधार करें: न्याय का दिन आने से पहले हमारे पास ‘अनुग्रह का समय’ है। यदि वचन आज हमें हमारी किसी गलती के लिए टोकता है, तो उसे न्याय के दिन के लिए न छोड़ें, बल्कि आज ही पश्चाताप करें और सुधारें।
- वचन को गंभीरता से लें: बाइबल पढ़ना केवल एक धार्मिक कार्य नहीं है; यह उस ‘संविधान’ को पढ़ना है जिसके आधार पर हमारा अनंत काल तय होगा। इसे पूरी गंभीरता और आदर के साथ पढ़ें।
- डर नहीं, तैयारी: एक विश्वासी के लिए यह आयत डरने के लिए नहीं, बल्कि तैयारी के लिए है। जब हम वचन के अनुसार चलते हैं, तो हमें न्याय के दिन का भय नहीं होता, क्योंकि हम जानते हैं कि हम ‘चट्टान’ पर खड़े हैं।
निष्कर्ष
परमेश्वर का वचन आज हमारा ‘मित्र और मार्गदर्शक’ है, लेकिन यदि हम इसे अस्वीकार करते हैं, तो यही कल हमारा ‘न्यायाधीश’ होगा। आज अनुग्रह का द्वार खुला है। आइए हम वचन को केवल अपने कानों तक न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन का स्वामी बनने दें। जब हम वचन के अधीन रहते हैं, तो हम उस दिन बड़े साहस के साथ परमेश्वर के सामने खड़े हो सकेंगे।
आज के लिए मनन और प्रार्थना
आज याकूब 2:12 पढ़ें: “तुम उन लोगों के समान बातें करो और काम भी करो, जिनका न्याय स्वतंत्रता की व्यवस्था के द्वारा होने वाला है।”
प्रार्थना:
“हे धर्मी न्यायाधीश और प्रेमी पिता, मैं तेरे पवित्र वचन के लिए तेरा धन्यवाद करता हूँ जो मुझे सत्य दिखाता है। प्रभु, मुझे क्षमा कर यदि मैंने कभी तेरे वचनों को हलके में लिया हो। मुझे वह बुद्धि और सामर्थ्य दे कि मैं तेरे सत्य के अनुसार अपना जीवन जी सकूँ। मेरे हृदय को शुद्ध कर ताकि न्याय के दिन मैं तेरे सामने निष्कलंक खड़ा हो सकूँ। आमीन।”




