आत्मा से भरते जाओ Filled with Holy Spirit Ephesian 5:18

दिन 15: आत्मा से भरते जाओ—एक निरंतर प्रक्रिया

अक्सर मसीही जीवन में हम एक बड़ी गलती करते हैं—हम सोचते हैं कि एक बार पवित्र आत्मा पा लेना ही काफी है। लेकिन प्रेरित पौलुस हमें एक गहरा रहस्य बताता है जो हमारे आत्मिक जीवन की ‘ताजगी’ को बनाए रखता है।

“और दाखमधु से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।” (इफिसियों 5:18)


1. यह एक आज्ञा है, सुझाव नहीं

इफिसियों 5:18 में “परिपूर्ण होते जाओ” का मूल यूनानी अर्थ एक आज्ञा (Command) के रूप में है।

  • परमेश्वर हमें यह नहीं कह रहा कि “यदि तुम्हारा मन करे तो भर जाना।”
  • यह एक मसीही के लिए अनिवार्य है। जैसे हमारे शरीर को जीवित रहने के लिए हर दिन भोजन और सांस की ज़रूरत होती है, वैसे ही हमारी आत्मा को हर दिन पवित्र आत्मा की नई भरपूरी की ज़रूरत होती है।

2. “होते जाओ” (Be filled): एक निरंतर क्रिया

यूनानी व्याकरण में यहाँ जिस काल (Tense) का प्रयोग किया गया है, उसका अर्थ है—“लगातार भरते रहना।” * यह ‘एक बार’ की घटना नहीं है (जैसे बपतिस्मा)। यह एक ‘रोजाना’ की प्रक्रिया है।

  • जैसे एक कार को चलाने के लिए बार-बार ईंधन (Fuel) की ज़रूरत होती है, वैसे ही संसार की परीक्षाओं और शैतान के हमलों का सामना करने के लिए हमें बार-बार आत्मा से भरने की ज़रूरत है।
  • कल की भरपूरी आज की चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं है।

3. नियंत्रण का आत्मसमर्पण

पौलुस यहाँ ‘दाखमधु’ (शराब) और ‘आत्मा’ के बीच एक तुलना करता है।

  • जब कोई व्यक्ति शराब के नशे में होता है, तो वह शराब के नियंत्रण में होता है—उसका बोलना, चलना और सोचना बदल जाता है।
  • “आत्मा से भरने” का अर्थ भी यही है कि हम पवित्र आत्मा को अपने जीवन का पूर्ण नियंत्रण सौंप दें।
  • जब हम आत्मा से भरे होते हैं, तो हमारा व्यवहार, हमारी बातें और हमारे निर्णय पवित्र आत्मा के स्वभाव को दर्शाते हैं।

4. हम खाली क्यों हो जाते हैं?

पवित्र आत्मा हमें कभी छोड़कर नहीं जाता (यूहन्ना 14:16), लेकिन हमारे जीवन में पाप, संसार की चिंताएँ और शरीर की अभिलाषाएँ उस ‘भरपूरी’ को कम कर देती हैं।

  • जैसे एक बर्तन में अगर गंदगी भरी हो, तो उसमें शुद्ध पानी नहीं भरा जा सकता, वैसे ही हमें हर दिन अपने पापों का अंगीकार करके खुद को ‘खाली’ करना पड़ता है ताकि वह हमें ‘भर’ सके।

निष्कर्ष

आत्मा से भरना कोई ‘जादुई अहसास’ नहीं है, बल्कि यह समर्पण का परिणाम है। यह परमेश्वर के प्रति हमारी निर्भरता को दर्शाता है। आज अपनी ताकत पर भरोसा करना छोड़ें और उससे कहें, “प्रभु, मैं खाली हूँ, मुझे आज फिर से अपने आत्मा से भर दे।”

जब आप आत्मा से भरे होते हैं, तभी आप वह ‘फल’ ला सकते हैं जिसके बारे में हम इस सप्ताह आगे पढ़ेंगे।


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज सुबह या अभी इसी वक्त, अपने जीवन के उन हिस्सों को देखें जहाँ आप अपनी मर्जी चला रहे हैं। क्या आप उन हिस्सों को पवित्र आत्मा के नियंत्रण में देने के लिए तैयार हैं?

प्रार्थना:

“हे प्रिय पवित्र आत्मा, मैं स्वीकार करता हूँ कि मुझे हर दिन तेरी आवश्यकता है। मुझे क्षमा कर कि मैं अक्सर अपनी ताकत पर भरोसा करता हूँ। आज मैं अपने जीवन का नियंत्रण तुझे सौंपता हूँ। मुझे अपने सामर्थ्य, प्रेम और बुद्धि से फिर से भर दे। मुझे आज के दिन की चुनौतियों के लिए तैयार कर ताकि मेरे जीवन से मसीह की महिमा हो। यीशु के नाम में, आमीन।”

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