आज हम उस गुण पर विचार करेंगे जो बाइबल को इस संसार की हर दूसरी चीज़ से अलग करता है—उसका स्थायित्व (Permanence)

एक ऐसी दुनिया में जहाँ तकनीक, फैशन, विचार और यहाँ तक कि रिश्ते भी हर दिन बदल रहे हैं, परमेश्वर का वचन एक ऐसी स्थिर चट्टान है जो कभी नहीं हिलती।

यीशु मसीह ने भविष्य की घटनाओं और अंत के समय के बारे में बताते हुए एक बहुत ही साहसिक और शक्तिशाली घोषणा की थी:

“आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।” (मत्ती 24:35)

1. “आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे” (The Transience of Creation)

हम जिसे सबसे स्थायी मानते हैं—यह विशाल ब्रह्मांड, तारे, और यह पृथ्वी—यीशु कहते हैं कि ये भी एक दिन समाप्त हो जाएंगे।

2. “मेरी बातें कभी न टलेंगी” (The Eternal Word)

यीशु के शब्द केवल समय के लिए नहीं, बल्कि अनंत काल के लिए हैं।

3. विश्वसनीयता का उच्चतम प्रमाण

जब यीशु कहते हैं कि उनका वचन आकाश और पृथ्वी से भी अधिक स्थायी है, तो वे हमें एक ठोस आधार दे रहे हैं।

4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?

  1. सुरक्षा की भावना: जब आपकी दुनिया हिल रही हो—नौकरी का संकट हो, बीमारी हो या अनिश्चितता हो—तो परमेश्वर के वादों को पकड़ लें। वे ‘टलने’ वाले नहीं हैं।
  2. सत्य की खोज: लोग ‘सत्य’ की तलाश में यहाँ-वहाँ भटकते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन वह एकमात्र सत्य है जो कभी नहीं बदलता। इसे अपनी नैतिकता और जीवन का मापदंड (Standard) बनाएं।
  3. अनंत निवेश: अपना समय उस चीज़ को जानने में लगाएँ जो हमेशा बनी रहेगी। जो हम वचन के माध्यम से अपनी आत्मा में जमा करते हैं, वह मृत्यु के बाद भी हमारे साथ रहता है।

निष्कर्ष

परमेश्वर का वचन ‘अनंत और अटल’ है, इसका अर्थ है कि इसमें दिया गया हर एक वादा आपके लिए “हाँ और आमीन” है। यह किसी राजनेता का वादा नहीं जो चुनाव के बाद बदल जाए, बल्कि यह उस राजा की घोषणा है जिसका राज्य कभी समाप्त नहीं होगा। आज उस पर भरोसा करें जो कभी नहीं बदलेगा।

आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज यशायाह 40:8 को पढ़ें: “घास तो सूख जाती है, और फूल कुम्हला जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।”

प्रार्थना:

“हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर, मैं तेरे उस वचन के लिए तेरा धन्यवाद करता हूँ जो समय की सीमाओं से परे है। प्रभु, इस बदलती हुई दुनिया में मेरा मन अक्सर व्याकुल हो जाता है। मुझे सिखा कि मैं अपनी ज़िंदगी की नींव तेरे अटल वचनों पर रखूँ। धन्यवाद कि तेरे वादे कभी नहीं बदलते और तेरा प्रेम कभी समाप्त नहीं होता। मेरा भरोसा तुझ पर बना रहे। आमीन।”

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