दिन 10: करुणा से भरा हुआ—एक चंगा करने वाली छुअन

करुणा से भरा Mark 1:41

कल हमने ‘पापियों के मित्र’ के रूप में यीशु के अद्भुत अनुग्रह को देखा। आज हम उनके हृदय की उस कोमलता पर गौर करेंगे जो केवल हमारे पापों को ही नहीं, बल्कि हमारी शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा को देखकर भी द्रवित हो जाती है। यीशु के जीवन में ‘करुणा’ केवल एक भावना नहीं थी, बल्कि […]

दिन 8: नम्र और मन में दीन—विश्राम देने वाला हृदय

नम्र और मन में दीन matthew 11:29

अक्सर शक्तिशाली लोग कठोर होते हैं, लेकिन ब्रह्मांड का स्वामी, जिसके हाथ में सारा अधिकार है, अद्भुत रूप से कोमल है। आज हम उस निमंत्रण पर गौर करेंगे जो थके हुए हृदयों के लिए मरहम की तरह है। यीशु ने अपने पीछे चलने वालों को यह अनोखा आश्वासन दिया: “मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, […]

दिन 7: वह जो ‘मैं हूँ’ है—अपरिवर्तनीय परमेश्वर

जो 'मैं हूँ' है John 8:58

मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के पहले सप्ताह के अंतिम दिन में आपका स्वागत है। अब तक हमने यीशु को वचन, ज्योति, चरवाहा और मेमने के रूप में देखा। आज हम उस शिखर पर पहुँच गए हैं जहाँ यीशु ने अपनी पहचान के बारे में सबसे शक्तिशाली और चौंकाने वाला दावा किया। यह दावा इतना […]

दिन 5: अल्फा और ओमेगा—आदि और अंत की संप्रभुता

अल्फा और ओमेगा Revelation 22:13

मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के पांचवें दिन में आपका स्वागत है। कल हमने यीशु को एक ‘अच्छे चरवाहे’ के रूप में देखा, जो हमारी व्यक्तिगत देखभाल करता है। आज हम अपनी दृष्टि को थोड़ा और ऊपर उठाएंगे और यीशु के उस स्वरूप को देखेंगे जो समय और सृष्टि की सीमाओं से परे है—अल्फा और […]

दिन 3: जगत की ज्योति—अंधकार पर विजय

जगत की ज्योति john 8:12

मसीह पर केंद्रित हमारी यात्रा के तीसरे दिन में आपका स्वागत है। पहले दो दिनों में हमने यीशु को अनादि ‘वचन’ और एकमात्र ‘मार्ग’ के रूप में देखा। आज हम उस गुण पर गौर करेंगे जो हमारी दिशा और दृष्टि को बदल देता है—ज्योति। अंधेरे में चलना डरावना और अनिश्चित होता है, लेकिन जब प्रकाश […]

दिन 1: आदि में वचन—यीशु की दिव्यता

आदि में वचन

हम अपनी शुरुआत समय की शुरुआत से भी पहले से करेंगे। यीशु केवल 2000 साल पहले पैदा हुआ एक महापुरुष नहीं था, बल्कि वह अनादि काल से अस्तित्व में है। यूहन्ना का सुसमाचार हमें यीशु के जन्म की कहानी से नहीं, बल्कि उसकी अनंत प्रकृति से परिचित कराता है: “आदि में वचन था, और वचन […]

यीशु मसीह के क्रूस पर आखिरी 7 वचन: एक विस्तृत परिचय

यीशु मसीह के क्रूस पर आख़िरी वचन

यीशु मसीह के आख़िरी वचन यीशु मसीह के क्रूस पर कहे गए आखिरी वचन न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि गहन आत्मिक और धार्मिक अर्थ भी रखते हैं। यह एक सर्वमान्य मानवीय समझ है कि जब कोई व्यक्ति मृत्यु के कगार पर होता है, तो उसके मुख से निकले शब्द उसके हृदय की […]

परमेश्वर की सामर्थ्य का सर्वोच्च प्रमाण: पुनरुत्थान

परमेश्वर की सामर्थ्य का सर्वोच्च प्रमाण: पुनरुत्थान

जब हम परमेश्वर की सर्वशक्तिमानता (Omnipotence) की बात करते हैं, तो हमारे मन में सृष्टि की रचना या लाल समुद्र का दो भाग होना आता है। लेकिन मसीही विश्वास के केंद्र में एक ऐसी घटना है जो परमेश्वर की सामर्थ्य को ब्रह्मांड के सबसे बड़े शत्रु—मृत्यु—पर विजयी घोषित करती है। वह घटना है यीशु मसीह […]

Is Jesus the Messiah?

Jesus The Messiah

Jesus the Messiah- Introduction The concept of Jesus the Messiah (meaning “Anointed One”) plays a central role in the religious thought of Judaism, Christianity, and Islam, with significant variations in understanding across these faiths. Below is an in-depth, researched study on the figure of the Messiah, exploring its origins, theological implications, and evolution across the […]

यीशु मसीह कौन हैं Yishu Masih kon hain 01/ Who is Jesus Christ

यीशु मसीह कौन हैं

परिचय यीशु मसीह, यह नाम आज सारे संसार में बहुत अच्छे से जाना जाता है। मैं विश्वास करता हूँ आप ने भी कभी ना कभी यीशु मसीह का नाम सुना ही होगा। यीशु मसीह का नाम सुनते ही मन में बहुत सारे ख्याल आते होंगे। क्योंकि हमारे सिनेमा ने यीशु मसीह का नाम लेने वालो […]