दिन 10: आत्मा का बपतिस्मा—मसीह की देह में प्रवेश

अब हम एक बहुत ही गहरे और एकता लाने वाले सत्य पर पहुँच गए हैं। अक्सर लोग ‘आत्मा के बपतिस्मा’ को केवल एक व्यक्तिगत अनुभव या सामर्थ्य के प्रदर्शन के रूप में देखते हैं, लेकिन प्रेरित पौलुस इसे एक बहुत ही सुंदर ‘जुड़ाव’ के रूप में प्रस्तुत करता है।1 कुरिन्थियों 12:13 हमें बताता है कि […]
दिन 9: उद्धार की छाप—आपकी सुरक्षा की मुहर

आज हम उसी ‘छाप’ या ‘मुहर’ के गहरे अर्थ को समझेंगे, जो न केवल हमारे वर्तमान को बल्कि हमारे अनंत भविष्य को भी सुरक्षित करती है। प्रेरित पौलुस इफिसियों की कलीसिया को एक गंभीर लेकिन बहुत ही आश्वस्त करने वाली चेतावनी और प्रतिज्ञा देता है: “परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिससे तुम […]
दिन 8: पवित्र आत्मा कैसे प्राप्त करें?

पवित्र आत्मा की प्राप्ति और बपतिस्मा।” बहुत से मसीही इस उलझन में रहते हैं कि पवित्र आत्मा को पाने के लिए क्या उन्हें कोई विशेष कठिन कार्य करना होगा, या बहुत लंबे समय तक उपवास और प्रार्थना करनी होगी। आज का मनन इस भ्रम को दूर करता है और सुसमाचार की उस सरल लेकिन सामर्थी […]
दिन 7: मसीह की महिमा—पवित्र आत्मा का परम उद्देश्य

पवित्र आत्मा के व्यक्तित्व, उसके वास और उसके मार्गदर्शन के बारे में सीखने के बाद, आज हम सप्ताह के अंतिम दिन उस ‘मुख्य कार्य’ पर ध्यान केंद्रित करेंगे जो पवित्र आत्मा की हर गतिविधि का केंद्र है। अक्सर लोग पवित्र आत्मा के वरदानों, चमत्कारों या अहसासों में इतने खो जाते हैं कि वे उसके आने […]
दिन 6: सत्य का मार्गदर्शक—वह आपको हर सत्य में ले जाएगा

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जिसे अक्सर “सत्य-पश्चात” (Post-truth) युग कहा जाता है। यहाँ हर किसी के पास अपना एक ‘सत्य’ है, और सोशल मीडिया से लेकर समाचारों तक, सूचनाओं का एक ऐसा सैलाब है कि यह पहचानना कठिन हो जाता है कि वास्तव में सही क्या है। जीवन के बड़े निर्णयों, नैतिक […]
दिन 5: पवित्र आत्मा का वास—आप परमेश्वर का मंदिर हैं

मानव इतिहास में ‘मंदिर’ का स्थान हमेशा से अत्यंत पवित्र और विशिष्ट रहा है। पुराने नियम के समय में, परमेश्वर की उपस्थिति एक भौतिक इमारत—सुलेमान के मंदिर—में वास करती थी। उस मंदिर के सबसे भीतरी भाग, जिसे ‘परमपवित्र स्थान’ कहा जाता था, वहाँ परमेश्वर का तेज (शेकिना ग्लोरी) उतरता था। वह स्थान इतना पवित्र था […]
दिन 4: सृष्टि में पवित्र आत्मा — वह शुरुआत से ही जीवन देने का कार्य कर रहा है

“और पृथ्वी बेडौल और सूनी पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।” — उत्पत्ति 1:2 विस्तृत प्रस्तावना: अंधकार के बीच सृजनकर्ता की सक्रिय उपस्थिति जब हम पवित्र आत्मा (Holy Spirit) के कार्य पर विचार करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान तत्काल उसके नाटकीय प्रकटीकरणों—जैसे […]
दिन 3: त्रिएक में पवित्र आत्मा — वह पिता और पुत्र के साथ एक ही परमेश्वर है

मुख्य वचन: “इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के चेलों को बनाओ और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।” — मत्ती 28:19प्रस्तावना: त्रिएक का रहस्य और पवित्र आत्मा की दिव्यता मसीही विश्वास की नींव और उसका सबसे गहरा, सबसे आकर्षक सत्य ‘त्रिएक’ (Trinity) का सिद्धांत है। यह कोई साधारण धार्मिक […]
दिन 2: पवित्र आत्मा का व्यक्तित्व—वह एक व्यक्ति है

मुख्य आयत: “परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिससे तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।” (इफिसियों 4:30) अक्सर लोग पवित्र आत्मा की तुलना बिजली की शक्ति या किसी अदृश्य हवा से करते हैं। लेकिन शक्ति कभी “शोकित” (Grieve) नहीं होती। केवल एक व्यक्ति ही दुखी हो सकता है। […]
दिन 1: पवित्र आत्मा कौन है? (यूहन्ना 14:16-17)

परमेश्वर के गुणों के हमारे अध्ययन के बाद, अब हम उस अद्भुत व्यक्तित्व की ओर बढ़ रहे हैं जो आज इस पृथ्वी पर हमारे साथ है—पवित्र आत्मा। अक्सर लोग पवित्र आत्मा को केवल एक ‘शक्ति’, ‘बादल’ या ‘अहसास’ मानते हैं, लेकिन यीशु मसीह ने यूहन्ना 14:16-17 में उसे एक बहुत ही व्यक्तिगत और शक्तिशाली तरीके […]