Second Coming of Jesus Hindi

दिन 29: यीशु का दोबारा आना—महान आशा और अंतिम विजय

Second Coming of Jesus Hindi

हमने यीशु के जन्म, उनके स्वभाव, उनके क्रूस के कार्य और कलीसिया में हमारी पहचान को देखा है। लेकिन मसीही विश्वास केवल इतिहास (बीते हुए कल) के बारे में नहीं है, यह एक महान भविष्य के बारे में भी है। आज हम उस सत्य पर गौर करेंगे जो हर सताए हुए, थके हुए और प्रतीक्षारत विश्वासी की अंतिम आशा है—यीशु का दूसरा आगमन

पूरी बाइबल का समापन एक बहुत ही संक्षिप्त लेकिन शक्तिशाली संवाद के साथ होता है। यीशु एक वादा करते हैं और कलीसिया उसका उत्तर देती है:

“जो इन बातों की गवाही देता है, वह कहता है, ‘हाँ, मैं शीघ्र आने वाला हूँ।’ आमीन। हे प्रभु यीशु, आ! (प्रकाशितवाक्य 22:20)


1. “हाँ, मैं शीघ्र आने वाला हूँ” (The Promise)

यह कोई संभावना नहीं, बल्कि एक निश्चित प्रतिज्ञा है।

  • अधूरा कार्य पूरा करना: पहली बार यीशु एक ‘मेमने’ के रूप में आए ताकि पापों के लिए बलिदान हों। दूसरी बार वे एक ‘सिंह’ (राजाओं के राजा) के रूप में आएंगे ताकि न्याय करें और अपना राज्य स्थापित करें।
  • शीघ्र का अर्थ: परमेश्वर की दृष्टि में ‘शीघ्र’ का अर्थ समय की गणना नहीं, बल्कि घटना की ‘निश्चितता’ और ‘अचानक’ होना है। वह किसी भी क्षण आ सकते हैं।

2. “हे प्रभु यीशु, आ!” (Maranatha)

शुरुआती कलीसिया में ‘मारनाथा’ (Maranatha) एक आम अभिवादन था, जिसका अर्थ है—”प्रभु आता है” या “हे प्रभु, आ!”

  • तड़प और प्रेम: यह एक दुल्हन की अपने दूल्हे के लिए पुकार है। एक मसीही विश्वासी के लिए यीशु का आना डर का विषय नहीं, बल्कि परम आनंद का विषय है।
  • अंत का आरंभ: जब वह आएगा, तो वह हर आँसू पोंछ देगा। फिर न मृत्यु होगी, न शोक, न विलाप और न पीड़ा (प्रकाशितवाक्य 21:4)।

3. अंतिम न्याय और बहाली (Restoration)

उनका दोबारा आना इस बात की गारंटी है कि बुराई की जीत हमेशा नहीं रहेगी।

  • पूर्ण न्याय: संसार के तमाम अन्याय और पापों का अंतिम हिसाब होगा।
  • नई सृष्टि का पूर्ण होना: वह सब कुछ नया बना देगा। स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन होगा और हम अपने परमेश्वर के साथ हमेशा के लिए रहेंगे।

4. इसका आपके जीवन के लिए क्या अर्थ है?

  1. तैयारी और पवित्रता: 1 यूहन्ना 3:3 कहता है कि जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है जैसा वह पवित्र है। उसकी प्रतीक्षा हमें आलसी नहीं, बल्कि अधिक वफादार बनाती है।
  2. धैर्य और सांत्वना: जीवन के कठिन समय में यह याद रखना कि “प्रभु आने वाला है,” हमें सहने की शक्ति देता है। हमारे दुख अस्थायी हैं, लेकिन उसकी महिमा अनंत है।
  3. मिशन की गंभीरता: चूँकि वह शीघ्र आने वाला है, इसलिए राजदूत के रूप में हमारा कार्य और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमें जल्द से जल्द मेल-मिलाप का संदेश उन तक पहुँचाना है जो अभी भी अंधेरे में हैं।

निष्कर्ष

यीशु मसीह का दोबारा आना मसीही जीवन की ‘फिनिश लाइन’ (Finish Line) है। आज दुनिया चाहे कितनी भी अशांत क्यों न दिखे, हमारा राजा सिंहासन पर है और वह वापस आ रहा है। यह सत्य हमारे हर डर को दूर करता है। क्या आपका हृदय आज कह पा रहा है—”आमीन, हे प्रभु यीशु, आ!”?


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18 पढ़ें। विचार करें कि उस दिन जब तुरही फूँकी जाएगी, तो आपका मिलना अपने उद्धारकर्ता से कैसा होगा।

प्रार्थना:

“हे प्रभु यीशु, मैं तेरी इस महान प्रतिज्ञा के लिए तेरा धन्यवाद करता हूँ कि तू हमें लेने वापस आएगा। प्रभु, मुझे वह जागृत हृदय दे जो तेरी प्रतीक्षा करता रहे। मुझे इस संसार की मोह-माया में इतना न फंसने दे कि मैं तेरे आने की खुशी भूल जाऊँ। मुझे वफादार बना ताकि जब तू आए, तो मैं तुझे आनंद के साथ देख सकूँ। मारनाथा! हे प्रभु यीशु, आ! आमीन।”

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