परमेश्वर के गुण ही परमेश्वर हैं: गुण और कार्य का अंतर |Attributes of God

परमेश्वर के गुण Attributes of God

"यहोवा अपने सब मार्गों में धर्मी, और अपने सब कामों में कृपालु है।" (भजन 145:17) Attributes of God

Attributes of God परमेश्वर के गुण को जानना या परमेश्वर को जानने की यात्रा में अक्सर हम इस उलझन में पड़ जाते हैं कि परमेश्वर क्या करता है औरपरमेश्वर वास्तव में कौन है। भजन संहिता 145:17 हमें एक बहुत ही गहरा सत्य प्रदान करता है जो हमारे विश्वास की नींव को मजबूत करता है:

“यहोवा अपने सब मार्गों में धर्मी, और अपने सब कामों में कृपालु है।” (भजन 145:17)

यह आयत हमें परमेश्वर के गुणों (Attributes) और उसके कार्यों (Actions) के बीच के सुंदर संबंध को समझने में मदद करती है। मसीही धर्मशास्त्र (Theology) में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है: परमेश्वर के गुण ही परमेश्वर हैं। इसका अर्थ है कि परमेश्वर का प्रेम या उसका न्याय उससे अलग कोई चीज़ नहीं है; वह स्वयं प्रेम है और वह स्वयं न्याय है।


1. गुण और कार्य: अंतर क्या है?

इसे समझने के लिए हमें मानवीय स्वभाव और ईश्वरीय स्वभाव के अंतर को देखना होगा।

  • मानवीय स्तर पर: एक मनुष्य “दयालु कार्य” कर सकता है, लेकिन वह स्वभाव से पूरी तरह दयालु नहीं हो सकता। हम कभी दया दिखाते हैं और कभी कठोर हो जाते हैं। हमारे कार्य अक्सर हमारी परिस्थितियों या मूड पर निर्भर करते हैं। हमारा “कार्य” हमेशा हमारे “गुण” को नहीं दर्शाता।
  • ईश्वरीय स्तर पर: परमेश्वर के साथ ऐसा नहीं है। परमेश्वर जो करता है, वह वही है जो वह है। भजन 145:17 कहता है कि वह अपने “सब मार्गों” में धर्मी है। इसका मतलब है कि वह कभी भी ऐसा कुछ नहीं कर सकता जो अधर्मी हो, क्योंकि अधर्म उसके स्वभाव के विरुद्ध है।

कार्य (Works): यह वह है जो परमेश्वर समय और इतिहास में करता है (जैसे सृष्टि की रचना, लाल समुद्र को दो भाग करना, चंगाई देना)।

गुण (Attributes): यह वह है जो परमेश्वर अनादि काल से है (जैसे उसकी पवित्रता, उसकी धार्मिकता, उसकी सर्वज्ञता)।

2. “परमेश्वर के गुण ही परमेश्वर हैं” (The Simplicity of God)

धर्मशास्त्र में इसे ‘Divine Simplicity’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि परमेश्वर अलग-अलग हिस्सों से मिलकर नहीं बना है। ऐसा नहीं है कि परमेश्वर का 50% हिस्सा प्रेम है और 50% हिस्सा न्याय है। बल्कि, परमेश्वर पूरी तरह से प्रेम है और वह पूरी तरह से न्याय है।

जब भजन संहिता कहता है कि वह “अपने सब कामों में कृपालु है,” तो इसका अर्थ है कि उसकी कृपा (Grace) उसके हर कार्य से छलकती है। यहाँ तक कि जब वह न्याय करता है, तो वह अपनी पवित्रता और धर्म के गुण के कारण करता है।

  • वह धर्मी है, इसलिए वह पाप को अनदेखा नहीं कर सकता।
  • वह कृपालु है, इसलिए उसने हमारे पापों के लिए अपने पुत्र को दे दिया।

उसके कार्य उसके गुणों का प्रदर्शन मात्र हैं। यदि परमेश्वर ने दुनिया नहीं भी बनाई होती, तब भी वह “सृष्टिकर्ता” होने की सामर्थ्य रखता, क्योंकि वह उसके स्वभाव में है।

3. भजन 145:17 का हमारे जीवन में महत्व

यह सत्य केवल दार्शनिक नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन के लिए बहुत व्यावहारिक है:

  1. भरोसे की नींव: क्योंकि परमेश्वर के गुण ही परमेश्वर हैं, इसलिए वह कभी नहीं बदलता। यदि वह कल धर्मी था, तो वह आज भी धर्मी है। उसकी कृपा “परिस्थितिजन्य” नहीं है। आप उस पर भरोसा कर सकते हैं क्योंकि वह अपने स्वभाव के प्रति हमेशा सच्चा रहता है।
  2. संदेह का अंत: जब हमारे जीवन में कठिन समय आता है, तो हम अक्सर परमेश्वर के कार्यों पर सवाल उठाते हैं। हम पूछते हैं, “परमेश्वर ऐसा क्यों होने दे रहा है?” लेकिन भजन 145:17 हमें याद दिलाता है कि उसके सब मार्ग धर्मी हैं। भले ही हमें कार्य समझ न आए, लेकिन हम उसके चरित्र (गुणों) पर भरोसा कर सकते हैं।
  3. प्रार्थना का आधार: जब हम प्रार्थना करते हैं, तो हम केवल एक “शक्तिशाली सत्ता” से बात नहीं कर रहे होते, बल्कि उस परमेश्वर से बात कर रहे होते हैं जो स्वभाव से ही ‘कृपालु’ है। उसकी कृपा उसके होने का हिस्सा है।

निष्कर्ष: गुणों का प्रतिबिम्ब

परमेश्वर चाहता है कि हम उसे केवल उसके चमत्कारों (कार्यों) के लिए न जानें, बल्कि उसके चरित्र (गुणों) के लिए उससे प्रेम करें। जब हम उसकी धार्मिकता और कृपा को समझते हैं, तो हमारी आराधना गहरी हो जाती है। हम यह नहीं कहते कि “परमेश्वर ने मेरे लिए यह किया इसलिए वह अच्छा है,” बल्कि हम कहते हैं, “परमेश्वर अच्छा है, इसलिए उसने मेरे लिए यह किया।”


आज के लिए मनन और प्रार्थना

आज अपने जीवन के उन क्षेत्रों को देखें जहाँ आपको लगता है कि परमेश्वर “अन्याय” कर रहा है या “देर” कर रहा है। भजन 145:17 को ज़ोर से पढ़ें और घोषणा करें कि उसके मार्ग धर्मी हैं।

प्रार्थना:

“हे पवित्र परमेश्वर, मैं तेरी आराधना करता हूँ क्योंकि तू पवित्र, धर्मी और कृपालु है। धन्यवाद कि तू अपनी मर्जी के अनुसार नहीं बदलता, बल्कि तू सदैव वैसा ही रहता है जैसा तू है। जब मुझे तेरे कार्य समझ न आएँ, तब भी मुझे तेरे चरित्र पर भरोसा करना सिखा। मुझे यह समझने में मदद कर कि तेरी कृपा और तेरा न्याय कभी अलग नहीं होते। यीशु के नाम में, आमीन।”

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